भगवान विष्णु की कहानी ,10 संस्कृत नाम मंत् अर्थ /Story of Lord Vishnu, 10 Sanskrit Names with Meaning



  भगवान विष्णु की कहानी

विष्णु ब्रह्मांड के रक्षक मानी जाती है। ब्रह्मा, विष्णु और शिव, मिलकर त्रिदेव कहलाते हैं। भगवान विष्णु को चार भुजाओं वाला और गुलाब कमल पर आसीन दिखाया जाता है। उनके एक हाथ में शंख रहता है जो पवित्र ध्वनि ‘ओम’का प्रतीक है। उनके दूसरे हाथ में सुदर्शन चक्र रहता है, जो समय के चक्र तथा नेक जीवन जीने की याद दिलाता है। तीसरे हाथ में कमल रहता है, जो गौरवशाली अस्तित्व का सूचक है। उनके चौथे हाथ में गदा रहती है।
बहुत तेज गति से उड़ने वाला गरुड़ उनका वाहन है। उन्हें अधिकतर अपने निवास क्षीरसागर मैं कुंडली मारे शेषनाग पर आराम करते दिखाया जाता है। देवी लक्ष्मी उनकी पत्नी है।माना जाता है कि विष्णु के दस अवतार हैं, जिनमें सबसे अधिक लोकप्रिय राम और कृष्ण हुए हैं। विष्णु को अपना दसवां अवतार अभी लेना है। उनका दसवां अवतार तब होगा, जब दुनिया में अधर्म पूरी तरह से बढ़ जाएगा।

वराह अवतार की कहानी

भक्त और भगवान की कहानी बहुत समय पहले की बात है। हिरण्याक्ष नाम का एक असुर था, जो हिरण्यकश्यप का भाई था। उसे ब्रह्मा से अमर होने का वरदान मिला हुआ था। कोई देवता, असुर, जानवर या मनुष्य उसे नहीं मार सकता था। हिरण्याक्ष की शक्ति दिनों दिन बढ़ती जा रही थी। 1 दिन वह पृथ्वी को खींच कर अपने साथ समुंदर में ले गया। सारे देवता घबरा गए और सहायता के लिए विष्णु के पास पहुंचे।विष्णु को याद आया कि ब्रह्मा हिरण्याक्ष को दो दांतो वाले जंगली सूअर वराह से अमरता का वरदान देना भूल गए थे। विष्णु ने अपने आप को वराह के रूप में बदला और समुद्र में छलांग लगा दी। वहां जाकर उन्होंने हिरण्याक्ष को लड़ने की चुनौती दी। कुछ ही देर में विष्णु ने हिरण्याक्ष का सिर धड़ से अलग कर दिया और पृथ्वी को वापस खींच लाए

10 संस्कृत नाम मंत् अर्थ 

1अव्यय-ॐअव्ययाय नमः -विनाश के बिना
2बुद्धावतार -ॐबुद्धावताराय नमः।-भगवान विष्णु का एक अवतार
3शान्तात्म -ॐशान्तात्मने नमः।-शांतात्मा
4दामोदर- ॐदामोदराय नमः।-जिसका पेट तीन रेखाओं से अंकित है
5विराड्रूप -ॐविराड्रूपाय नमः।-वीरद्रोपा
6आदिदेव -ॐआदिदेवाय नमः।-देवो के भगवन
7देवदेव -ॐदेवदेवाय नमः।-देवताओं के देवता
8श्रीमहाविष्णु -ॐश्रीमहाविष्णवे नमः।-भगवान विष्णु का नाम
9प्रह्लादपरिपालक -ॐप्रह्लादपरिपालकाय नमः।-प्रहलादपरिपालक
10लीलामानुषविग्रह -ॐलीलामानुषविग्रहाय नमः।-लीला-मानुष-विग्रह:
                             ॐआदिदेवाय नमः
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