भगवान शिव माता सती के बारे में जानिए / Know about Lord Shiva Mata Sati

भगवान शिव माता सती के बारे में जानिए

भगवान शिव और माता सती हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण देवी-देवता हैं। शिव भगवान हिंदू धर्म के त्रिमूर्ति में से एक हैं, जिनमें ब्रह्मा (सृष्टि का पालन करने वाले), विष्णु (पालन का संरक्षण करने वाले) और शिव (संहार करने वाले) शामिल हैं। शिव को भोलेनाथ, नीलकंठ, रुद्र, महादेव आदि नामों से भी जाना जाता है। उन्हें सदाशिव, अशुतोष, शंकर, भैरव, रुद्राक्षाधारी आदि गुणों से परिचित किया जाता है।
माता सती, भगवान शिव की पहली पत्नी थीं। उनके पिता का नाम दक्ष था, जो एक प्रमुख ऋषि और दक्षप्रजापति थे। वे देवी आदि शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।
भगवान शिव और माता सती का विवाह भगवान के अनेक विधान्तों में से एक विधान्त के अनुसार हुआ था। प्राचीन कथाओं में, माता सती के पिता दक्ष राजसभा में एक यज्ञ का आयोजन करते हैं, जिसमें वे भगवान शिव को न बुलाते हैं और न ही उन्हें यज्ञ में अभिषिक्त करते हैं। इसका प
रिणामस्वरूप, सती अपने देह को जली में अर्पित करती हैं।
भगवान शिव बहुत दुखी हो जाते हैं और उनका विलाप जगत में व्याप्त हो जाता है। इसके बाद, उनके तांडव नृत्य से प्रभावित हुए देवताओं और ऋषियों ने सती के शरीर को भंग कर दिया और वे व्योमगमन करती हैं।
माता सती की मृत्यु के बाद, उनका पुनर्जन्म पार्वती के रूप में होता है, जो भगवान शिव की दूसरी पत्नी बनती हैं। पार्वती और शिव के संयोग से कार्तिकेय, गणेश आदि देवताएं जन्म लेती हैं।
भगवान शिव के उपासकों में माता सती का विशेष महत्व है। वे भक्तों की माँगों को पूरा करने की क्षमता रखती हैं और सुख और समृद्धि की प्राप्ति में सहायता करती हैं। शिवरात्रि जैसे विशेष पर्व पर उन्हें याद किया जाता है और उनके भक्तों द्वारा पूजा की जाती है।
भगवान शिव और माता सती पुराणों और हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण देवी-देवताओं में से एक हैं। शिव त्रिमूर्ति का एक हिस्सा माने जाते हैं और सती उनकी पत्नी हैं। भगवान शिव को पुराणों में विष्णु और ब्रह्मा के साथ त्रिमूर्ति माना जाता है, जो सृष्टि, स्थिति और संहार के देवता हैं। शिव का अर्थ "मंगलमय" होता है और वे जीवन के संपूर्ण चक्र का प्रतीक हैं।
माता सती भगवान शिव की पत्नी थीं और पर्वती नाम से भी जानी जाती हैं। उन्हें शक्ति की प्रतिष्ठा और मातृत्व की देवी के रूप में पूजा जाता है। माता सती को दुर्गा, काली, पार्वती, आदि नामों से भी पुकारा जाता हैं। वे प्रेम, सौंदर्य, सहानुभूति, शक्ति और धैर्य की प्रतीक मानी जाती हैं।
माता सती की कथा पुराणों में विस्तारपूर्वक वर्णित है। उन्होंने अपने पिता की उपमहाद्वीप में होने वाली एक यज्ञ में प्रवेश किया था, जहां प्रजापति दक्ष ने उनकी पूजा को अनदेखा कर दिया था। इस अपमान के कारण सती ने अपनी अहंकारिता को छोड़ दिया और वहां अपने शरीर को जली दिया। इसके बाद उनका पुनर्जन्म हुआ और वे पार्वती के रूप में प्रकट हुईं और शिव जी की पत्नी बनीं।
शिव-पार्वती का संयोग भारतीय धार्मिक परंपरा में प्रेम, सौंदर्य, संयम, सहानुभूति, पारिवारिक संबंधों, और साधारण जीवन के मूल्यों की प्रतीकता के रूप में माना जाता है। शिव-पार्वती की पूजा और उनके भक्ति करने से श्रद्धालुओं को साधारणतः ज्ञान, शक्ति, सुख, संतान, धन और समृद्धि की प्राप्ति होने की आशा की जाती है।

यहाँ हैं भगवान शिव और माता सती के 40 रोचक तथ्य:

1. शिव भगवान का भोलेनाथ नाम प्रसिद्ध है, जो उनके सादे-व्यवहार और सरल स्वभाव को दर्शाता है।
2. माता सती का पूरा नाम 'दाक्षायनी' था, क्योंकि उनके पिता का नाम दक्ष ऋषि था।
3. शिव पुराण में कहा गया है कि माता सती ने अपने तपस्या द्वारा शिव को प्राप्त किया था।
4. माता सती ने अपने पिता के यज्ञ में बिना आमंत्रित होकर जाने का निर्णय लिया, जहां वे उनकी अपमानित करने का अनुभव करीं।
5. माता सती के जलने के बाद, उनके अवशेषों से 51 शक्तिपीठों की उत्पत्ति हुई, जिन्हें देवी दुर्गा की नाम से भी जाना जाता है।
6. माता सती का जन्म दक्ष ऋषि के घर में हुआ था।
7. माता सती को पार्वती नाम से पुनर्जन्म प्राप्त हुआ था, जब उन्होंने शिव का पत्नी बनने का व्रत रखा था।
8. माता सती और पार्वती का संयोग एक अद्वितीय प्रेम कथा के रूप में माना जाता है।
9. शिव को त्रिशूल, दमरू और सर्प वाहन माना जाता है।
10. माता सती को वाहन में नंदी भैरव का स्वरूप दिया जाता है।
11. शिव का पुत्र कार्तिकेय है, जो सुंदरता और सामरिक बुद्धिमत्ता का प्रतीक है।
12. गणेश भगवान, जो बुद्धिमत्ता और विजय का प्रतीक है, माता सती और शिव के द्वारा पालित किए गए बच्चे हैं।
13. शिव की आवास स्थान के रूप में कैलाश पर्वत प्रसिद्ध है।
14. माता सती को सौंदर्य, भक्ति, और साहस की देवी के रूप में माना जाता है।
15. भगवान शिव को त्रिनेत्री यानी तीनों नेत्रों वाले देवता के रूप में जाना जाता है।
16. शिव को गंगा जी की जटा में स्थान दिया जाता है, जिसे गंगाधारी भी कहा जाता है।
17. शिव को अशेष तपस्या करने के लिए मनभावन शिवलिंग की पूजा की जाती है।
18. माता सती को विश्वरूपिणी के रूप में भी जाना जाता है, जिसका अर्थ होता है 'संपूर्ण विश्व में व्याप्त रूप'।
19. शिव पर्वती के साथ ही पार्वतीपति के रूप में भी जाने जाते हैं, अर्थात् उनके सम्पूर्ण संसार का स्वामी।
20. भगवान शिव को मृत्युंजय भी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है 'मृत्यु को जीतनेवाला'।
21. माता सती को भुवनेश्वरी के रूप में भी पुकारा जाता है, जो पृथ्वी की रानी का अर्थ होता है।
22. शिव और सती का विवाह विश्व के पहले विवाह माना जाता है।
23. माता सती का रंग गोरा था और उनके बाल काले थे।
24. शिव को भैरव रूप में भी जाना जाता है, जो उनके उग्र और रुद्ररूप को दर्शाता है।
25. माता सती और शिव की प्रतिष्ठा कश्मीर घाटी में मानी जाती है, जहां पर्वतीपति शिव ने उनका विलाप किया था।
26. शिव को मृगेश के रूप में भी पुकारा जाता है, जो मृग का स्वामी का अर्थ होता है।
27. माता सती को दुर्गा, काली और पर्वती नामों से भी पुकारा जाता है, जो उनके विभिन्न स्वरूपों को दर्शाता है।
28. शिव को गिरीश के रूप में भी जाना जाता है, जो पर्वत का स्वामी का अर्थ होता है।
29. माता सती को विश्वजननी भी कहा जाता है, जो सभी जी
वों की माता का अर्थ होता है।
30. शिव को अर्धनारीश्वर भी कहा जाता है, जिसमें उनका एक ही स्वरूप पुरुष और स्त्री दोनों का अंशिक रूप से होता है।
31. माता सती को विजयलक्ष्मी के रूप में भी पुकारा जाता है, जो सभी विजयों की देवी का अर्थ होता है।
32. शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है, जो उनके नीले गले के लिए प्रसिद्ध है।
33. माता सती को अम्बिका, शैलपुत्री और हिमावती नामों से भी जाना जाता है।
34. शिव को पशुपति के रूप में भी पुकारा जाता है, जिसका अर्थ होता है 'पशुओं का स्वामी'।
35. माता सती को माँ जगदम्बा के रूप में भी पुकारा जाता है, जो संपूर्ण जगती की माता का अर्थ होता है।
36. शिव को रुद्र के रूप में भी जाना जाता है, जो उनके तेजस्वी और भयानक स्वरूप को दर्शाता है।
37. माता सती को शक्ति के स्वरूप में भी जाना जाता है, जो सृष्टि, स्थिति और संहार की देवी का अर्थ होता है।
38. शिव को नटराज भी कहा जाता है, जिसमें उनका नृत्य प
्रदर्शन करते हुए दर्शाया जाता है।
39. माता सती को आद्यशक्ति का रूप में भी माना जाता है, जिसका अर्थ होता है 'समस्त शक्तियों का आदि'।
40. शिव को जगद्गुरु भी कहा जाता है, जो संसार के गुरु का अर्थ होता है और जिसे सभी धर्मों का संक्षिप्त सार कहा जाता है।
ये कुछ रोचक तथ्य हैं भगवान शिव और माता सती के बारे में। यह उनके महत्वपूर्ण आदि-अंत से संबंधित हैं और उनकी महिमा और अनुयायियों के द्वारा पूजन किए जाते हैं।

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