भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा /Story of fish incarnation of Lord Vishnu

भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा

एक समय की बात है, कृतयुग के दौरान धरती पर महाप्रलय का समय आ गया। महाप्रलय से पूरे संसार को नष्ट होने की संभावना थी। ब्रह्माजी ने इस संकटपूर्ण परिस्थिति में मानवता की रक्षा के लिए भगवान विष्णु से सहायता मांगी। भगवान विष्णु ने ब्रह्माजी की विनती को स्वीकार करते हुए मत्स्य अवतार धारण किया।
भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में अपने आप को एक मत्स्य (मछली) के रूप में प्रकट किया। मत्स्य अवतार के समय, एक पुराणिक राजा नामक महात्मा मनु ने समुद्र तट पर एक यज्ञ का आयोजन किया था। मनु ने यज्ञ के समय एक छोटे से पुस्तक को संग्रह किया, जिसमें मानवीय और आध्यात्मिक ज्ञान संग्रहित था।
जब मत्स्य अवतार धारण करने वाले भगवान विष्णु ने ज्ञात किया कि इस पुस्तक में मानवता की संरक्षा के लिए विशेष महत्वपूर्ण ज्ञान संग्रहित है, तो वे मनु की सहायता करने के लिए उनके पास पहुंचे। मत्स्य भगवान ने रूप बदलकर उसे अपनी पीठ पर ले जाया और समुद्र में स्थापित किया।
उस समय, एक विशालकाय राक्षस नामक असुर जिसका नाम है हयग्रीव ने उनकी उपस्थिति का पता लगाया। उसने पुस्तक को चुरा लिया और स्वयं को देवताओं के विरुद्ध स्थापित करने की योजना बनाई। मत्स्य अवतार में, भगवान विष्णु ने हयग्रीव के सामर्थ्य को पहचानते हुए उससे लड़ाई चेड़ ली और पुस्तक को पुनः प्राप्त कर लिया।
मत्स्य भगवान ने फिर समुद्र में प्रवेश किया और महाप्रलय के समय मानव समुदाय के साथ पुस्तक को सुरक्षित रखकर प्रलय के जल को सहायता दी। इस प्रकार, मत्स्य अवतार ने महाप्रलय से धरती को बचाया और मानवता को संसार के नवनिर्माण की संभावना दी।
धरती पुनः स्थापित होने पर मत्स्य अवतार अपनी महिमा छुपा लिया, लेकिन वे सदैव मानव समुदाय की रक्षा करने के लिए युग-युगांतर बने रहते हैं।

यहां भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार के बारे में कुछ रोचक तथ्य हैं:

1. मत्स्य अवतार भगवान विष्णु का पहला अवतार माना जाता है। यह कृतयुग के दौरान हुआ था।

2. भगवान मत्स्य अवतार में एक मछली के रूप में प्रकट हुए थे। उनके सिर पर मकर का होना था और उनकी पृष्ठ पर चक्र होता था।

3. मत्स्य अवतार के समय भगवान विष्णु ने मनु को विविध ज्ञान का प्रदान किया और प्रलय के बाद नये युग की शुरुआत के लिए धर्मग्रंथों को संग्रहित किया।

4. मत्स्य अवतार में भगवान विष्णु ने मनु को पुस्तक दी, जिसमें मानवीय और आध्यात्मिक ज्ञान संग्रहित था। यह पुस्तक मानव सभ्यता के नए आरंभिक युग की सृष्टि में महत्वपूर्ण योगदान करती है।

5. मत्स्य अवतार के समय भगवान विष्णु ने हयग्रीव नामक राक्षस के साथ लड़ाई की और पुस्तक को पुनः प्राप्त किया। यह लड़ाई धर्म और अधर्म के संघर्ष का प्रतीक है।

6. मत्स्य अवतार ने मानवता कोमहाप्रलय से बचाया और नवनिर्मित धरती की स्थापना की। इस रूप में वे प्राकृतिक विनाश से मानव समुदाय की सुरक्षा करने के लिए उदाहरण हैं।

7. मत्स्य अवतार की कथा पुराणों, वेदों और हिंदू धर्म के मान्यताओं में महत्वपूर्ण है। यह धर्म, श्रद्धा, ज्ञान, संरक्षण और सम्पूर्णता के सिद्धांतों को संकल्पित करती है।

भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार के लिए निम्नलिखित मंत्र का जाप किया जाता है:

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय विष्णवे मत्स्याय नमः॥"
इस मंत्र का अर्थ है, "हे भगवान वासुदेव (भगवान विष्णु) और विष्णु (परमात्मा) के नामों का समर्थन करता हूँ, मैं मत्स्य अवतार (मछली रूपी अवतार) को नमस्कार करता हूँ॥"
यह मंत्र भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की पूजा और आराधना के दौरान जाप किया जाता है। इसका जाप करने से भक्त भगवान मत्स्य की कृपा, सुरक्षा और आशीर्वाद को प्राप्त कर सकते हैं।

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