भगवान विष्णु 12 अवतार के बारे मै /about lord vishnu 12 avatar

भगवान विष्णु 12 अवतार के बारे मै

 1- वामन अवतार 

 इस अवतार के बारे मै कहा जाता है कि एक बार दैत्य राज बली ने देवों को हराकर स्वर्गलोक पर अपना कब्जा कर लिया। तब भगवान विष्णु देवमाता अदिति के गर्भ से उत्पन्न हुए। 
उनका यह अवतार वामन अवतार के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि एक बार जब बलि महायज्ञ कर रहा था तब भगवान वामन वहां पहुंचे और राजा बलि से तीन पग धरती दान में मांग लिया। किन्तु राजा बलि के गुरु शुक्राचार्य भगवान की लीला समझ गए और उन्होंने बलि को दान देने से रोक दिया। लेकिन बलि ने फिर भी भगवान वामन को तीन पग धरती दान में दे दिया। तब भगवान वामन ने विशाल रूप धारण कर एक पग में धरती और दूसरे पग में स्वर्ग लोक नाप लिया। जब तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा तो बलि ने भगवान वामन को अपने सिर पर पग रखने को कहा। बलि के सिर पर पग रखने से वह पाताललोक पहुंच गया। भगवान बलि से प्रसन्न हुए और उसे पाताललोक का स्वामी भी बना दिया। इस प्रकार भगवान वामन ने देवताओं को स्वर्ग पुन: लौटाया था।   

2- परशुराम अवतार 

भगवान विष्णु का छठा अवतार परशुराम अवतार था। इस अवतार को भगवान का आवेशावतार कहा जाता हे. इस अवतार के जन्म से जुड़ी कथा कुछ इस प्रकार है. दरअसल प्राचीन काल में धरतीपर हैहयवंशीय क्षत्रियो का अत्याचार बढ़ गया था. भार्गव और हैहयवंशीय क्षत्रियो की पुराणी दुश्मनी चली आ रही थी। हैहयवंश के अत्याचारी राजा सहस्त्रबाहु ने दत्तात्रेय भगवान से १० हजार हातो का वरदान मांग लिया था, इसके बाद उसने निर्दोष प्राणियों की हत्या और ब्राह्मणो का अपमान करना शुरू किया। तब ऋषि जमगदाग्नि और माता रेणुका के गर्भ से भगवान परशुराम अवतरित हुए. उन्होंने भगवान शिव से युद्ध कला प्राप्त की और इसके बाद सहस्त्रबाहु को मारकर लगभग 21 बार उन्होंने दृष्ट क्षत्रिय राजाओं से पृथ्वी को मुक्त कराया। 

3- कूर्म / कश्यप अवतार 

कूर्म अवतार भगवान विष्णु का द्वितीय अवतार था इस अवतरण मै वे कछवे के रूप मै अवतरित हुए थे। इस अवतार को लेने के पीछे जो कथा है वह कुछ इस प्रकार है एक बार महर्षि दुर्वासा ने देवताओं के राजा इन्द्र समेत सभी देवताओ को श्राप देकर शक्ति हीन कर दिया।  तब भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन की सलाह दी। विष्णु जी ने दैत्यों को देवताओं के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने के लिए तैयार किया। 
समुद्र मंथन के लिए मंद्राचल पर्वत को मंथनी और वासुकि नाग को रस्सी के स्थान पर प्रयोग किया गया. मंथन प्रारम्भ होने के कुछ समय बाद मंद्राचल पर्वत समुद्र में धंस कर डूबने लगा। तभी भगवान् विष्णु ने कूर्म अवतार धारण किया और मंद्राचल पर्वत के नीचे आसीन हो गए। उसके पश्चात् उनकी पीठ पर मंद्राचल पर्वत स्थापित हुआ और समुद्र मंथन आरम्भ हुआ। भगवान विष्णु का यह अवतार कछवे की तरह था इस कारण इसे कश्यप अवतार भी कहा जाता है।

4- श्री सनकादि मुनि 

धर्म ग्रंथों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में लोक पितामह ब्रह्मा ने अनेक लोकों की रचना करने की इच्छा से घोर तपस्या की। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने तप अर्थ वाले सन नाम से युक्त होकर सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार नाम के चार मुनियों के रूप में अवतार लिया। ये चारों प्राकट्य काल से ही मोक्ष मार्ग परायण, ध्यान में तल्लीन रहने वाले, नित्यसिद्ध एवं नित्य विरक्त थे। ये भगवान विष्णु के सर्वप्रथम अवतार माने जाते हैं।

5- कूर्म अवतार 

धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने कूर्म (कछुए) का अवतार लेकर समुद्र मंथन में सहायता की थी। भगवान विष्णु के कूर्म अवतार को कच्छप अवतार भी कहते हैं। भगवान कूर्म  की विशाल पीठ पर मंदराचल तेजी से घुमने लगा और इस प्रकार समुद्र मंथन संपन्न हुआ।

6- भगवान धन्वन्तरि

धर्म ग्रंथों के अनुसार जब देवताओं व दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो उसमें से सबसे पहले भयंकर विष निकला जिसे भगवान शिव ने पी लिया। इसके बाद समुद्र मंथन से उच्चैश्रवा घोड़ा, देवी लक्ष्मी, ऐरावत हाथी, कल्प वृक्ष, अप्सराएं और भी बहुत से रत्न निकले। सबसे अंत में भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। यही धन्वन्तरि भगवान विष्णु के अवतार माने गए हैं। इन्हें औषधियों का स्वामी भी माना गया है।

7- भगवान नृसिंह 

भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। जब हिरण्यकशिपु स्वयं प्रह्लाद को मारने ही वाला था तब भगवान विष्णु नृसिंह का अवतार लेकर खंबे से प्रकट हुए और उन्होंने अपने नाखूनों से हिरण्यकशिपु का वध कर दिया।

8- हयग्रीव अवतार 

भगवान हयग्रीव अवतार  में भगवान विष्णु की गर्दन और मुख घोड़े के समान थी। तब भगवान हयग्रीव रसातल में पहुंचे और मधु-कैटभ का वध कर वेद पुन: भगवान ब्रह्मा को दे दिए।

9- श्रीहरि अवतार 

धर्म ग्रंथों के अनुसार गजेंद्र की स्तुति सुनकर भगवान श्रीहरि प्रकट हुए और उन्होंने अपने चक्र से मगरमच्छ का वध कर दिया। भगवान श्रीहरि ने गजेंद्र का उद्धार कर उसे अपना पार्षद बना लिया।

10- श्रीराम अवतार

त्रेतायुग में राक्षसराज रावण का बहुत आतंक था। उसके वध के लिए भगवान विष्णु ने राजा दशरथ के यहां माता कौशल्या के गर्भ से पुत्र रूप में जन्म लिया। भगवान विष्णु ने राम अवतार लेकर देवताओं को भय मुक्त किया।

11- श्रीकृष्ण अवतार

द्वापरयुग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार लेकर अधर्मियों का नाश किया। कंस का वध भी भगवान श्रीकृष्ण ने ही किया। महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सारथि बने और दुनिया को गीता का ज्ञान दिया। धर्मराज युधिष्ठिर को राजा बना कर धर्म की स्थापना की। भगवान विष्णु का ये अवतार सभी अवतारों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

12- कल्कि अवतार 

धर्म ग्रंथों के अनुसार कलयुग में भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेंगे। कल्कि अवतार कलियुग व सतयुग के संधिकाल में होगा। यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा। पुराणों के अनुसार उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले के शंभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि पुत्र रूप में जन्म लेंगे। कल्कि देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और धर्म की पुन:स्थापना करेंगे।

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