हनुमान जी के 21 नाम निम्नलिखित हैं मंत्र (श्लोक) और रोचक तथ्य /Following are the 21 names of Hanuman ji, mantras (verses) and interesting facts

हनुमान जी के 21 नाम निम्नलिखित हैं मंत्र (श्लोक) और रोचक तथ्य 
1. हनुमान
2. महावीर
3. भीम
4. मारुति
5. पवनसुत
6. अंजनीसुत
7. वायुपुत्र
8. श्रीरामभक्त
9. मंगलमूर्ति
10. कपीन्द्र
11. लङ्काद्वीपहरण
12. लङ्कासोकनाशन
13. महामति
14. सुमति
15. रामदूत
16. अतुलितबलधाम
17. हनुमान्तार्जनीसुत
18. जितेन्द्रिय
19. भक्तमानस्त्रिकालज्ञ
20. रामायणान्तकर
21. वायुपुत्रप्रियकर
यह नाम भगवान हनुमान के गुणों, कर्तव्यों और महत्वपूर्ण युद्ध कला को वर्णित करते हैं। हिंदू धर्म में हनुमान जी को भक्ति, शक्ति, साहस और प्रेम का प्रतीक माना जाता है और उन्हें भगवान श्रीराम के विश्वासपूर्व सेवक के रूप में भी जाना जाता है।


हनुमान जी के 21 नाम के मंत्र (श्लोक) निम्नलिखित हैं:

ॐ अंजनीसूनुवेगसंवर्गाय नमः।
ॐ महावीराय रामवीराय नमः।
ॐ वायुपुत्राय नमः।
ॐ पंचवदनाय नमः।
ॐ वीरध्वजाय नमः।
ॐ हनुमते नमः।
ॐ मारुतात्मजाय नमः।
ॐ महाबलाय नमः।
ॐ सिताशोकविनाशकाय नमः।
ॐ दशग्रीवदर्पहरणाय नमः।
ॐ श्रीरामभक्ताय नमः।
ॐ सुग्रीवप्रियाय नमः।
ॐ लङ्काद्वीपहरणाय नमः।
ॐ अञ्जनागर्भसम्भूताय नमः।
ॐ अमितविक्रमाय नमः।
ॐ कपीन्द्राय नमः।
ॐ वायुपुत्रप्रियाय नमः।
ॐ रामसेवापरायणाय नमः।
ॐ महामतये नमः।
ॐ धीराय नमः।
ॐ वीराय नमः।
ॐ अतुलितबलधामाय नमः।
यह मंत्र भगवान हनुमान की भक्ति एवं साधना में उच्चारण किया जाता है। इन नामों के उच्चारण से भक्ति और दृढ़ता में वृद्धि होती है और साधक को साहस, संयम, और धैर्य की प्राप्ति होती है।

हनुमान जी के 21 नाम के बारे में कुछ रोचक तथ्य हिंदी में 

1. हनुमान: हनुमान जी का यह प्रमुख नाम उन्हें भगवान श्रीराम के विश्वासपूर्व सेवक के रूप में परिचय कराता है।
2. महावीर: 'महावीर' शब्द हनुमान जी के महान शौर्य और साहस को दर्शाता है।
3. भीम: हनुमान जी को इस नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि वे भीमसेन के रूप में भी प्रसिद्ध हैं।
4. मारुति: हनुमान जी का यह नाम उन्हें मारुती के पुत्र के रूप में जाना जाता है, क्योंकि माता अंजनी हनुमान जी की माता थीं जो मारुत राज के रूप में भी प्रसिद्ध थीं।
5. पवनसुत: हनुमान जी का यह नाम उन्हें वायुपुत्र के रूप में वर्णित करता है, क्योंकि वायुदेव ने हनुमान जी को अपने पुत्र के रूप में पाला था।
6. अंजनीसुत: हनुमान जी को इस नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उनकी माता का नाम अंजनी था और वे अंजनी के पुत्र थे।
7. वायुपुत्र: हनुमान जी का यह नाम उन्हें वायुदेव के पुत्र के रूप में संबोधित करता है।
8. श्रीरामभक्त: हनुमान जी को इस नाम से पुकारा जाता है, क्योंकि वे भगवान श्रीराम के अभिभूत भक्त थे और उनकी अनन्य भक्ति के चरित्र के लिए प्रसिद्ध हैं।
9. मंगलमूर्ति: हनुमान जी का यह नाम उन्हें मंगलकारक मूर्ति के रूप में जाना जाता है, जो भक्तों के लिए मंगल और शुभ कारणी होते हैं।
10. कपीन्द्र: हनुमान जी को इस नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि वे वानरराज के अभिभूत थे और वानरों के प्रमुख भी थे।
11. लङ्काद्वीपहरण: हनुमान जी ने लंका द्वीप को हराने के लिए भी अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।
12. लङ्कासोकनाशन: हनुमान जी ने लंका को नष्ट करने के लिए अपने भयानक रूप का प्रदर्शन किया था, इसलिए उन्हें 'लङ्कासोकनाशक' भी कहा जाता है।
13. महामति: हनुमान जी को इस नाम से भी पुकारा जाता है, क्योंकि वे महान बुद्धिमान थे और आपत्तियों को समझने और समाधान करने में निपुण थे।
14. सुमति: इस नाम से हनुमान जी को भी जाना जाता है, क्योंकि उनकी बुद्धि सुविचारपूर्वक और समझदार थी।
15. रामदूत: हनुमान जी को इस नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि वे भगवान श्रीराम के दूत के रूप में लंका भेजे गए थे।
16. अतुलितबलधाम: हनुमान जी को इस नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उनका बल अतुलनीय था, जिससे वे भक्तों की सहायता करते थे।
17. हनुमान्तार्जनीसुत: यह नाम हनुमान जी की माता अंजनी से संबंधित है, जो वायुपुत्र हनुमान की माता थीं।
18. जितेन्द्रिय: हनुमान जी को इस नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने अपनी इंद्रियों को जीत लिया था और ब्रह्मचारी रहकर संयम बनाए रखा था।
19. भक्तमानस्त्रिकालज्ञ: हनुमान जी को भक्ति में अत्यधिक प्रतिष्ठा है, और उन्हें तीनों कालों (त्रिकाल) में ज्ञानी भक्त के रूप में सम्मानित किया जाता है।
20. रामायणान्तकर: हनुमान जी ने अपने शक्ति के साथ रावण के अन्त का कारण बनाया, इसलिए उन्हें 'रामायणान्तकर' भी कहा जाता है।
21. वायुपुत्रप्रियकर: यह नाम हनुमान जी को वायुदेव के पुत्र होने के लिए प्रसिद्ध करता है, क्योंकि वायुदेव ने उन्हें पाला था और उनसे अत्यंत प्रीति रखते थे।
यहां उपरोक्त नामों में से हर नाम हनुमान जी की विशेषता और महत्व को दर्शाता है। इन नामों का जाप और स्मरण भक्ति के लिए उत्तम माना जाता है।

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