शनि देव के अभिषेक के बारे में / About the consecration of Shani Dev

शनि देव के अभिषेक  के बारे में

शनि देव को भारतीय धर्म में एक प्रमुख देवता माना जाता है, जिन्हें शनि ग्रह के नाम से भी जाना जाता है। वे नवग्रहों में से एक हैं और ज्योतिष शास्त्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शनि ग्रह को भारतीय ज्योतिषीय गणित में शनि देवता के संबंध में विभिन्न प्रभावों वाला ग्रह माना जाता है, जिसका अधिपति शनि देव हैं।
शनि देव वैदिक पुराणों में एक देवता के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं, जो अपने तपस्या, नृत्य, और न्याय प्रशासन के लिए प्रसिद्ध हैं। शनि देव की वाहनी क्रौंच (रावण के भाई कुबेर का स्वर्ग का धनि है) होती है और उनके आदेशानुसार, क्रौंच शनि द्वारा भेजे जाते हैं और शनि देव इसे विनाशकारी नहीं मानते।
शनि देव का अभिषेक शनिवार को किया जाता है, क्योंकि भारतीय ज्योतिष में शनिवार को शनि देव का दिन माना जाता है। इस दिन शनि देव की पूजा, अर्चना, और अभिषेक करने से मान्यता मानी जाती है। अभिषेक एक प्रकार का पूजा रूप होता है जिसमें प्रतिमा, शिवलिंग, या देवता को तैल, दूध, गंध, अक्षता, फूल, धूप, और बिल्वपत्रों से सम्पन्न किया जाता है। इसके माध्यम से श्रद्धा भाव से देवता की प्रसन्नता और आशीर्वाद प्राप्ति की जाती है।
कृपया ध्यान दें कि यहां दिए गए जानकारी भारतीय धर्म और परंपरा से सम्बंधित है और यहां दी गई जानकारी में अन्य संस्कृतियों या मतवादों की अभिव्यक्ति नहीं की गई है।


शनि देव के अभिषेक के पीछे एक कथा 

जो उनके अभिषेक के महत्व को समझाती है। निम्नलिखित है शनि देव के अभिषेक की कथा:
कल्युग में एक समय की बात है, देवराज इंद्र ने स्वर्ग में एक महोत्सव का आयोजन किया। इस आयोजन में सभी देवता और ऋषि-मुनि उपस्थित थे। इंद्र ने विशेष रूप से वृद्धि, समृद्धि, और धन के देवता कुबेर को भी आमंत्रित किया था।
आयोजन के दौरान, देवता और ऋषि-मुनि नेत्रदान करते थे, लेकिन कुबेर ने इसमें सहायता नहीं की। उन्होंने अपने वृद्ध पिता विश्रवा और भगवान शिव की सहायता से अपने आंखों को प्राप्त किया था। इसके कारण, कुबेर को धनाधिपति और धन के देवता के रूप में सम्मानित नहीं किया गया था।
कुबेर ने इस अपमान को सहन नहीं किया और उन्होंने अपनी भाग्य को दोषी मानकर शिवलिंग पर श्राप देने का संकल्प किया। इससे प्रभावित हुए, धनाधिपति कुबेर के संपूर्ण संपत्ति और समृद्धि को कष्ट में डाल दिया गया।
शनि देव, जो भाग्यशाली और न्यायप्रिय थे, ने यह दुर्व्यवहार देखा और कुबेर के पास प्रत्येक सात दिन में अभिषेक करने के लिए आग्रह किया। शनि देव के प्रकोप को देखकर, कुबेर ने उन्हें स्वीकार किया और उनके अभिषेक के बाद उन्हें प्रसन्न किया।
इस प्रकार, कुबेर के अभिषेक से उन्हें धन, समृद्धि, और वृद्धि के देवता के रूप में मान्यता मिली और शनि देव के अभिषेक का महत्व प्रत्यक्ष रूप से प्रकट हुआ।
यह कथा भगवान शनि देव के अभिषेक के महत्व और प्रसन्नता को दर्शाती है। भक्तजन शनि देव के अभिषेक को नियमित रूप से करते हैं ताकि उन्हें समृद्धि, सुख, और सम्पत्ति की प्राप्ति हो।

शनि देव के अभिषेक के बारे में निम्नलिखित 15 तथ्य हैं:

1. शनि देव, भारतीय ज्योतिष में नवग्रहों में एक महत्वपूर्ण ग्रह हैं।
2. शनि देव को भारतीय ज्योतिष में कर्म ग्रह के रूप में जाना जाता है, जिसका मतलब है कि उनके प्रभाव के अनुसार व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार फल मिलता है।
3. शनि देव का अभिषेक शनिवार को किया जाता है, क्योंकि शनिवार को शनि देव का दिन माना जाता है।
4. शनि देव का प्रतिरूप काले रंग के बाल और बाढ़े नाक वाले मुकुट में दिखाई देता है।
5. शनि देव का वाहन क्रौंच (रावण के भाई कुबेर का स्वर्ग का धनि) होता है।
6. शनि देव को प्रसन्न करने के लिए बिल्वपत्र, घी, तिल, शहद, अदरक, सरसों के तेल, नीला फूल, शनि देव की प्रतिमा और शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।
7. शनि देव का अभिषेक करने से धन, समृद्धि, और सुख की प्राप्ति होती है।
8. शनि देव के अभिषेक में शनि मन्त्र जाप और शनि चालीसा का पाठ किया जाता है।
9. शनि देव के अभिषेक के दौरान विशेष रूप से उनके श्रद्धा भाव और भक्ति के साथ पूजा की जाती है।
10. शनि देव के अभिषेक से बुराई और अशुभ ग्रहांतर का प्रभाव कम होता है।
11. शनि देव के अभिषेक का विशेष महत्व शनि पेरियार स्थल में है, जो भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित है।
12. शनि देव के अभिषेक में दीपक जलाने का विशेष महत्व है, क्योंकि दीपक से आत्मा की शुद्धि होती है और उसके प्रकोप को शांत किया जा सकता है।
13. शनि देव के अभिषेक में उधड़ी हुई उड़द दाल का प्रयोग भी किया जाता है, क्योंकि इसे शनि देव का प्रतिष्ठान माना जाता है।
14. शनि देव के अभिषेक से मनुष्य को अधिक समय तक दिलचस्पी से बचा रहने की क्षमता मिलती है।
15. शनि देव के अभिषेक से व्यक्ति को सफलता, संतुलन, और सामर्थ्य की प्राप्ति होती है।
यहां ऊपर दिए गए तथ्य शनि देव के अभिषेक के महत्व को समझने में मदद करेंगे और आपको उनके अभिषेक के विधि-विधान के बारे में ,

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