हनुमान जी के बाल रूप के बारे में /About Hanuman ji's child form

हनुमान जी के बाल रूप के बारे में 

हनुमान जी के बारे में हनुमान चालीसा और रामायण के अनुसार, हनुमान जी का बाल रूप एक प्रसिद्ध पहलू है। हनुमान जी को हनुमान चालीसा में अनेक रूपों में प्रकट होने वाले देवताओं में से एक रूप माना गया है, जिसमें उन्हें बालक रूप में देखा जाता है।बाल रूप में हनुमान जी का वर्णन किया गया है कि वे छोटे आकार के एक बालक की तरह दिखते हैं और सीता माता द्वारा प्रीति भाव से बढ़ाए जाते हैं। उनके शरीर में शक्ति, बल, वीरता, और बुद्धि की अनुपस्थिति नहीं होती है। उनके चार मुख होते हैं और उनके मुखों में आत्मा के चार अवस्थाएं दिखाई देती हैं - जाग्रत (जागरूक), स्वप्न (सपना), सुषुप्ति (सुस्ती), और तुरीय (समाधि)।
बाल रूप में हनुमान जी की खास भक्ति भावना होती है और वे बच्चों और बालकों के अनुकूल होते हैं। हनुमान जी का बाल रूप उनकी प्राकृतिक और सरल भक्ति को दर्शाता है और भक्तों को उनके समीप आने की अनुमति देता है, विशेष रूप से बच्चों के बीच में।हनुमान जी के बाल रूप का स्मरण करके उन्हें विशेष प्रसन्नता और आशीर्वाद मिलता है, जो उनके भक्तों की दुःखों और संकटों को दूर करने में मदद करता है। इसलिए, हनुमान जी को बाल रूप में भी पूजनीय माना जाता है।


हनुमान जी के बाल रूप की कथा

 रामायण के आदि कांड (Balakanda) में प्रस्तुत की गई है। यह कथा हनुमान जी के बाल रूप का उदय होने का वर्णन करती है।
कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी ने देवताओं के आश्रय स्थान के रूप में एक स्थान बनाने का निर्णय किया था। इस उद्देश्य के लिए, उन्होंने अग्नि, वायु, और सूर्य को प्रार्थना करके अपने तीसरे भाग में से अपनी शक्ति का एक भाग छोड़ दिया। इस भाग से एक वीर बालक उत्पन्न हुआ, जिसका नाम अंजनी रखा गया। अंजनी देवी वायुपुत्री थीं और वायु के आश्रय से ही उनके घर में वायु देव का वास था।
एक दिन, अंजनी देवी ने वायु देव का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने में हनुमान जी का जन्म लिया। हनुमान जी उस समय एक बड़े वन में विचरण कर रहे थे। वन में रहने वाली ऋषियों के संग खेलते और उनसे विद्या लेते हुए, उन्होंने वानर जाति की उत्कृष्टता को प्राप्त किया।
एक दिन, हनुमान जी अपने खेलते समय सूर्य को एक बड़ी लाल कमल की तरह देखा। अपने बचपन की भूली चाल में, उन्होंने सूर्य को रोटी मानकर खाने की कोशिश की। तत्पश्चात, सूर्य ने अपनी दिव्यता दिखाई और हनुमान जी को बताया कि उन्हें अपना विश्वरूप देखने का अधिकार है।
सूर्य देव के आशीर्वाद से हनुमान जी को दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई और उन्हें अस्त्र-शस्त्रों की ज्ञान प्राप्त हो गई। इसके बाद हनुमान जी को गुरु सूर्य देव का आशीर्वाद मिला और वायुपुत्री अंजनी देवी उन्हें पालने और संसार को भरने का धर्म सौंपा गया।
हनुमान जी की बाल रूप की यह कथा उनके बचपन की अनूठी भक्ति और दृढ़ आस्था का प्रतीक है, जो उन्हें भगवान राम के सेवक बनने की ओर प्रेरित करता है। हनुमान जी का बाल रूप उनकी प्राकृतिक और निष्कपट भक्ति का प्रतीक है, जो आज भी उनके भक्तों को प्रेरित करता है।

हनुमान जी के बाल रूप के बारे में कुछ रोचक तथ्य (facts) 

1. हनुमान जी का बाल रूप विश्वरूपी था, जिसमें वे छोटे और मासूम बालक के रूप में प्रकट होते थे।
2. हनुमान जी के बाल रूप में उनके विशाल शक्ति और ब्रह्मज्ञान का सार्वभौमिक रूप छिपा था।
3. हनुमान जी को प्रीति भाव से बढ़ाए जाने के लिए सीता माता द्वारा बचपन में उन्हें बाल रूप में पाला गया था।
4. हनुमान जी के बाल रूप में उनके शरीर में आत्मा के चार अवस्थाएं (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, और तुरीय) दिखाई देती थीं।
5. हनुमान जी को अपनी शक्तियों का अभिवादन करने के लिए वायुदेव ने उन्हें बाल रूप में जन्म लेने की विधि बताई थी।
6. हनुमान जी के बाल रूप में उन्हें गुरु सूर्य देव ने आत्मा ज्ञान और अस्त्र-शस्त्रों की ज्ञान प्रदान किया था।
7. हनुमान जी के बाल रूप को देखकर सुर्य देव उनकी प्रशंसा करते थे और उन्हें संसार को भरने का धर्म सौंपा था।
8. हनुमान जी के बाल रूप की भक्ति और आस्था अद्भुत थी, जिसके कारण उन्हें ब्रह्मचारी बालक (ब्रह्मचारी वीर बालक) कहा जाता है।
9. हनुमान जी के बाल रूप को देखकर उन्हें देवता, सिद्ध, गन्धर्व, नाग, यक्ष, राक्षस, विद्याधर, अप्सरा, और मुनियों ने अशीर्वाद दिया था।
10. हनुमान जी के बाल रूप में उन्होंने अपनी खुदाई के लिए किशोर भगवान शिव को भी आकर्षित किया था।
11. बाल रूप में हनुमान जी को बच्चों के बीच में विशेष प्रेम और स्नेह मिलता था।
12. हनुमान जी के बाल रूप में भी वे मारुति यानी हनुमान थे, जिन्हें माता अंजनी ने पाला था।
13. बाल रूप में हनुमान जी का विशेष चरित्रधार किया गया है, जो वीरता, साहस, एकाग्रता, और निःस्वार्थ प्रेम को प्रतिनिधित्व करता है।
14. हनुमान जी के बाल रूप में उनकी आंखें विशाल, शीतल, और प्रकाशमय थीं, जिससे वे राम भक्ति में खो जाते थे।
15. बाल रूप में हनुमान जी का भोजन वन्य फल, मूल,
 और जड़ी-बूटियों से होता था।
16. हनुमान जी के बाल रूप में उन्हें लगभग सभी विद्याओं का ज्ञान प्राप्त था।
17. हनुमान जी के बाल रूप में उनकी खेल-कूद व वानर समुदाय के साथ अनेक मार्गदर्शक और संस्कारी भूमिकाएं थीं।
18. हनुमान जी के बाल रूप को देखकर लोग उन्हें प्राकृतिक भक्ति, वीरता, और ज्ञान का प्रतीक मानते थे।
19. बाल रूप में हनुमान जी को आभूषण नहीं पसंद थे, और उन्हें अपने भक्तों के प्रति सदा नम्र भाव दिखाना अच्छा लगता था।
20. बाल रूप में हनुमान जी को देवता गण और दिव्य पुरुष भी आकर्षित होते थे।
21. हनुमान जी के बाल रूप में उनके चाल-ढाल और वैभव ने देवता और सिद्धों को चकित कर दिया था।
ये थे कुछ रोचक तथ्य हनुमान जी के बाल रूप से संबंधित। उनके बाल रूप का ध्यान करने से भक्तों को अधिक प्रीति और आस्था के साथ उनके प्रति समर्पण होता है।

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