श्री गणेश भगवान की अमृतवाणी

श्री गणेश भगवान की अमृतवाणी संस्कृत में और हिंदी में अर्थ

गणपति जी सर्वप्रथम पूजनीय माने गए है। उनकी पूजा से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। गणपति देव बुद्धि, ज्ञान और धन के देवता के साथ ही सुख और समृद्धि प्रदान करने वाले माने एग हैं। बुधवार के दिन गणपति जी की विशेष पूजा का विधान होता है। मान्यता है कि इस दिन यदि मनुष्य गणपति देव का दर्शन कर उनके नाम का जाप करें तो उसकी सारी ही समस्याएं दूर हो जाती हैं।

श्री गणेश भगवान की अमृतवाणी

ॐ गं गणपतये नमः।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अगजानन पद्मार्कं गजाननं अहर्निशम्।
अनेकदन्तं भक्तानां एकदन्तं उपास्महे॥
वक्रतुण्डाय हुं।
विघ्नहर्ता तु विघ्नराजः विद्यार्थी भक्ति-पूर्वकम्।
सर्वकार्येषु सर्वदा सिद्धिः स्याद् विघ्नभञ्जनः॥
ॐ गं गणपतये नमः।
गणेश भगवान को विद्या, सरलता, बुद्धि, संवृद्धि, अनुग्रह, धैर्य, शक्ति और समृद्धि की प्रतीक रूप माना जाता है। वे समस्त देवताओं में प्रथम पूज्य हैं और उन्हें सर्वांग सुखकर्ता माना जाता है। भगवान गणेश की उपासना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनकी रक्षा हमेशा बनी रहती है।
नोट: यह अमृतवाणी संस्कृत में है और विभिन्न भाषाओं में गणेश भगवान के भक्तों द्वारा उपयोग की जाती है।

गणेश भगवान की अमृतवाणी का हिंदी में अर्थ

ॐ गं गणपतये नमः।
  1. वक्रतुण्ड: वक्रारूपी तथा तुण्डमान श्री गणेशाय नमः।
  2. महाकाय: महा-विशाल शरीर वाले श्री गणेशाय नमः।
  3. सूर्यकोटि समप्रभ: सूर्य के समान तेज वाले श्री गणेशाय नमः।
  4. निर्विघ्नं: सभी कार्यों में बिना विघ्न के सफलता प्रदान करने वाले श्री गणेशाय नमः।
  5. कुरु मे देव: हे देव, कृपया मेरे प्रति करें।
  6. सर्वकार्येषु सर्वदा: सभी कार्यों में हमेशा।
  7. अगजानन: जिसका जन्म अज यानी दुर्जन की योनि से नहीं हुआ हो, ऐसे श्री गणेशाय नमः।
  8. पद्मार्कं: जिनके शरीर पर कमल के नाद यानी पद्म के निशान हों, ऐसे श्री गणेशाय नमः।
  9. गजाननं: जिनके विशाल भृकुटि गज यानी हाथी के समान हो, ऐसे श्री गणेशाय नमः।
  10. अहर्निशम्: दिन-रात, सदा।
  11. अनेकदन्तं: जिनके अनेक दांत हों, ऐसे श्री गणेशाय नमः।
  12. भक्तानां एकदन्तं: एक दांत वाले भक्तों के स्वामी।
  13. उपास्महे: हम तुझे उपासना करते हैं।
  14. वक्रतुण्डाय हुं: हे वक्रतुण्ड (वक्रारूपी तथा तुण्डमान) गणेशाय नमः।
  15. विघ्नहर्ता: विघ्नों को दूर करने वाले श्री गणेशाय नमः।
  16. विघ्नराजः विघ्नों के राजा, उनके नियंत्रक।
  17. विद्यार्थी भक्ति-पूर्वकम्: विद्यार्थी जो भक्ति से उपासना करते हैं।
  18. सर्वकार्येषु सर्वदा: सभी कार्यों में हमेशा।
  19. सिद्धिः स्याद् विघ्नभञ्जनः श्री गणेशाय विघ्नों को तोड़ने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
ॐ गं गणपतये नमः।

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