भगवान शिव की बहन असावरी देवी एक पौराणिक कथा '/Asavari Devi, the sister of Lord Shiva, a legend

भगवान शिव की बहन असावरी देवी एक पौराणिक कथा

भगवान शिव की पत्नी और बच्चों के बारे में सभी जानते हैं लेकिन क्या आपको ये पता है कि शिवजी की एक बहन भी थीं. एक पौराणिक कथा के अनुसार जब देवी पार्वती ने भगवान शिव से विवाह किया तो वह खुद को घर में अकेला महसूस करती थीं. उनकी इच्छा थी कि काश उनकी भी एक ननद होती जिससे उनका मन लगा रहता लेकिन भगवान शिव तो अजन्मे थे।
शिव अनादि हैं, उनका ना कोई आरंभ है और ना कोई अंत। वह स्वयंभू हैं, उनका ना तो जन्म हुआ है और ना ही कभी उनकी मृत्यु संभव है। वे सृष्टि के विनाशक भी हैं और महादेव भी। वह रुद्र भी हैं और शांत चेहरे वाले बाबा भोलेनाथ भी।

अगर उनके क्रोध की ज्वाला से कोई बच नहीं सकता तो उन्हें प्रसन्न करना भी अन्य देवी-देवताओं से कहीं ज्यादा आसान है। भगवान भोलेनाथ ने समय-समय पर अपने विभिन्न स्वरूपों के दर्शन दिए।
कभी वे वीरभद्र बने, तो कभी उन्होंने नटराज रूप धारण किया, कभी वे काल भैरव बने तो कभी अर्धनारीश्वर बनकर अपने भक्तों के बीच प्रसिद्ध हुए।

भगवान शिव की बहन एक पौराणिक कथा 

प्रचलित मान्यता अनुसार कहते हैं कि भगवान शिव की बहन असावरी देवी थीं। कहते हैं कि पार्वती अकेली रहती थीं तो उन्होंने एक बार शिव से कहा कि काश मेरी ननद होती तो अच्छा होता। तब शिव ने अपनी माया से अपनी एक बहन की उत्पत्ति की और पार्वती देवी से कहा ये रही आपकी ननद।

देवी पार्वती अपनी ननद को देखकर बड़ी प्रसन्न हो गई। असावरी देवी स्नान करके आईं और भोजन मांगने लगीं। तब माता पार्वती ने उन्हें भोजन दिया परंतु जब असावरी देवी ने खाना शुरू किया तो पार्वती के भंडार में जो कुछ भी था सब खा गईं और किसी के लिए कुछ बचा ही नहीं। यह देखकर माता पार्वती दुःखी हो गईं। 
इसके बाद जब देवी पार्वती ने ननद को पहनने के लिए नए वस्त्र दिए तो असावरी देवी के लिए वह वस्त्र छोटे पड़ गए। पार्वती उनके लिए दूसरे वस्त्र का ढूंढने करने लगीं। इस बीच ननद आसावरी को अकत्माक ही परिहास करने की इच्छा हुई कि थोड़ा मजाक कर लिया जाए तो उन्होंने अपने पैरों की दरारों में पार्वतीजी को छुपा लिया। वहां पार्वतीजी का दम घुटने लगा।

 शिवजी ने जब असावरी देवी से पार्वती के बारे में पूछा कि वे कहां चली गई तो असावरी देवी ने झूठ बोला। जब शिव जी ने कहा कि कहीं ये तुम्हारी हरकत तो नहीं है? असावरी देवी हंसने लगीं और भूमि पर पांव पटक दिया।
 इससे पैर की दरारों में दबी देवी पार्वती बाहर निकलकर गिर पड़ी। ननद के इस व्यवहार से देवी पार्वती को बहुत क्रोध आया और उन्होंने भगवान शिव से कहा कि कृपया ननद को जल्दी से ससुराल भेजने की कृपा करें। मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने ननद की इच्छा व्यक्त की। तब भगवान शिव ने असावरी देवी को कैलाश से विदा कर दिया। 

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