भगवान गणेश और कार्तिकेय (स्कंद या मुरुगन) दोनों

भगवान गणेश और कार्तिकेय (स्कंद या मुरुगन) दोनों

ही हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं और वे दोनों ही मां पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं। ये दोनों देवताएं पुराणों और इतिहास के कई महत्वपूर्ण कथाओं में प्रसिद्ध हैं।

भगवान गणेश:

  • गणेश, विद्या, विवेक, समृद्धि, विद्यमान रक्षा और समस्त शुभ आरंभ के देवता के रूप में जाने जाते हैं।
  • उन्हें विघ्नहर्ता और सिद्धिविनायक भी कहा जाता है, क्योंकि वे हर कार्य में आने वाले विघ्नों को दूर करते हैं और सफलता प्रदान करते हैं।
  • गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म में एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भारत और दुनिया भर में धूमधाम से मनाया जाता है।

भगवान कार्तिकेय:

  • कार्तिकेय, धर्म, युद्ध, वीरता, ब्रह्मचर्य, शक्ति और ज्ञान के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
  • उन्हें शंकर सूर्य पुत्र और स्कंद भी कहा जाता है।
  • भारत के विभिन्न भागों में उन्हें शास्ता, मुरुगन, सेनानायक, स्वामी और मंगल भी कहा जाता है।
  • वे समस्त शक्तियों का साम्राज्य करने के लिए भी जाने जाते हैं और दुर्गा माता के सवारी पर युद्ध में भगवान शिव की ओर से लड़ाई में अग्रणी थे।
भगवान गणेश और कार्तिकेय दोनों ही भगवान शिव और मां पार्वती के आदर्श पुत्रों के रूप में माने जाते हैं और उन्हें शुभ, समृद्धि और सफलता के देवता के रूप में पूजा जाता है। उनकी कथाएं, महत्वपूर्ण संयोग, और उनकी भक्ति भावना हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।


भगवान गणेश और कार्तिकेय के कई कथाएं 

हिंदू पुराणों में मिलती हैं। नीचे, मैं कुछ प्रमुख कथाओं का संक्षेप में वर्णन करता हूं
  • गणेश का जन्म: पुराणों के अनुसार, मां पार्वती ने अपने मिट्टी से एक पुतली बनाई और उसमें जीवन दी। उस समय भगवान शिव युद्ध में व्यस्त थे और उन्हें इस घटना का अवगत नहीं था। जब वे वापस आए, तो उन्होंने उस पुतली को देखा और पूछा कि यह कौन है। मां पार्वती ने उसे अपने पुत्र के रूप में परिचय किया और उसने उसका नाम गणेश रखा।
  • गणेश और मूषिक राज: एक कथा के अनुसार, गणेश को मूषिक (चूहा) राजा के घर बुलाया गया, जहां एक प्रसिद्ध विद्वान ने एक सार्वजनिक शास्त्रार्थ का आयोजन किया था। गणेश ने अपनी बुद्धिमता से सभी के प्रश्नों के उत्तर दिए, जिससे उसे शास्त्रीय अभिवादन का उत्तर्दायित्व मिला। इसलिए उसे मूषिक राजा बना दिया गया।
  • कार्तिकेय का जन्म: एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने अपने विचित्र और रहस्यमय रूप से बने शिशु को गोदी में लिया था। इसलिए उन्हें कार्तिकेय भी कहा जाता है। इस प्रकार उनका जन्म हुआ था और उन्हें ब्रह्मचारी बनाया गया था ताकि वे दिव्य सेना का सेनानायक बन सकें।
  • तारकासुर के वध से मुक्ति: तारकासुर राक्षस राजा था जो देवताओं को परेशान कर रहा था। उन्हें वध करने के लिए, देवताओं ने कार्तिकेय को चुना। इस लड़ाई में, कार्तिकेय ने तारकासुर को मार डाला और देवताओं को मुक्ति दिलाई। इसके बाद, उन्हें सेनानायक के रूप में जाना जाने लगा।
ये कथाएं केवल कुछ उदाहरण हैं। गणेश और कार्तिकेय के बारे में और भी कई प्रमुख कथाएं हैं, जो हिंदू धर्म के विभिन्न ग्रंथों और पुराणों में वर्णित हैं। ये कथाएं उनके भक्तों के बीच प्रसिद्ध हैं और उन्हें अध्ययन और सुनने से लोग भगवान गणेश और कार्तिकेय की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

भगवान गणेश और कार्तिकेय कुछ तथ्य

  • भगवान गणेश को "विघ्नहर्ता" या "विघ्नराज" के रूप में जाना जाता है, क्योंकि उन्हें हर कार्य में आने वाले विघ्नों को दूर करने का शक्तिशाली देवता माना जाता है।
  • गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म में एक प्रमुख त्योहार है जो भारत और अन्य देशों में धूमधाम से मनाया जाता है। यह उत्सव भगवान गणेश के जन्म की खुशी में मनाया जाता है।
  • गणेश का वाहन हाथी (गज) है, जो उनकी विवेकशीलता और बुद्धिमत्ता को प्रतिष्ठित करता है।

भगवान कार्तिकेय (स्कंद)

  • कार्तिकेय को "स्कंद" या "मुरुगन" के नाम से भी जाना जाता है, और वे धर्म, युद्ध, वीरता, शक्ति, और ज्ञान के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
  • उन्हें शिव और पार्वती के पुत्र के रूप में माना जाता है। भगवान कार्तिकेय का जन्म कार्तिक मास (कार्तिक पूर्णिमा) में हुआ था, जिसले उन्हें "कार्तिकेय" के नाम से भी जाना जाता है।
  • उनका वाहन मांस बना हुआ मूषक (चूहा) है। इसका पीछा करते हुए कार्तिकेय को शास्ता भी कहा जाता है।
  • दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में, खासकर तमिलनाडु में, उन्हें मुरुगन के नाम से पूजा जाता है और उनके भक्तों में उनकी विशेष भक्ति प्रतिष्ठा है।
यह तथ्य भगवान गणेश और कार्तिकेय के बारे में कुछ मुख्य जानकारी प्रदान करते हैं। यह दोनों ही देवताएं हिंदू धर्म के विभिन्न परंपराओं में भक्ति और पूजा के विषय में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

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