जानिए भगवान श्रीराम के वंश को क्यों कहा जाता है 'रघुकुल'

जानिए भगवान श्रीराम के वंश को क्यों कहा जाता है 'रघुकुल'

भगवान राम के कुल को 'रघुकुल' कहा जाता है क्योंकि इस कुल की शुरुआत राजा रघु से हुई थी. रघु, ककुत्स्थ के पुत्र थे और सूर्यवंश की एक शाखा से थे. रघु के प्रताप के कारण ही इस कुल को उनके नाम पर रघुकुल या रघुवंश कहा जाता है. रघु के बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया और तब राम के कुल को रघुकुल भी कहा जाने लगा !
भगवान राम के पूर्वजों में रघु, दिलीप, पुनर्वा, भरत, अज, भागीरथ, दशरथ आदि थे. दशरथ के चार पुत्र हुए राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न. वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, भगवान राम 'इक्ष्वाकु वंश' में पैदा हुए थे. इक्ष्वाकु वंश, सूर्यवंशियों में से पैदा हुआ एक वंश है. रघुकुल, एक प्रसिद्ध भारतीय राजवंश है, जिसका ज़िक्र हिंदू धर्मग्रंथों जैसे इतिहास और पुराणों में मिलता है. महाकवि कालिदास के महाकाव्य 'रघुवंश' के आखिरी चार सर्गों में भी राम की वंशावली का विस्तृत वर्णन मिलता है

The genealogy of Lord Shri Ram is called 'Raghukul'

रघुकुल के अनुसार, भगवान राम के वंशज 

रघुकुल के मुताबिक, भगवान राम के वंशजों की पीढ़ियां आज भी चल रही हैं. भगवान राम के दोनों पुत्रों से अलग-अलग वंश निकले थे, जो रघुकुल की शाखाएं मानी गईं और बाद में वंश का रूप ले लिया. माना जाता है कि वर्तमान में जो सिसोदिया, कुशवाह (कच्छवाहा), मौर्य, शाक्य, बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) आदि राजपूत वंश हैं, वे सभी प्रभु श्रीराम के वंशज हैं भगवान राम के पूर्वजों में रघु, दिलीप, पुनर्वा, भरत, अज, भागीरथ, दशरथ आदि थे. रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया और तब से श्रीराम के कुल को रघुकुल भी कहा जाता है. ब्रह्मा की 39वीं पीढ़ी में श्री राम का जन्म हुआ था. 
भगवान राम के दो पुत्र थे, लव और कुश. नरसिंह पुराण के मुताबिक, रामजी के पुत्र लव से पद्म की उत्पत्ति हुई, बाद में पद्म से अनुपर्ण और अनुपर्ण से वस्त्रपाणि का जन्म हुआ. वस्त्रपाणि से शुद्धोदन और शुद्धोदन से बुध (बुद्ध) की उत्पत्ति हुई. राजा लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ जिनमें बड़गुजर, जयास और सिकरवारों का वंश चला !
भगवान श्री राम के इस रघुकुल वंश से वंशावली का संबंध है। इस वंश में धर्मिक गुणों के प्रतीक राजा-महाराजा और भगवान राम जैसे आदर्श पुरुषों का जन्म हुआ था। भगवान राम की कथा 'रामायण' में उनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन है।रघुकुल वंश की वंशावली का संबंध मुख्य रूप से 'रामायण' और अन्य पुराणों में वर्णित कथाओं से जुड़ा है। रघुकुल वंश की कथा का मुख्य तत्व भगवान राम के पिता राजा दशरथ और उनके पूर्वजों के जीवन का वर्णन है। निम्नलिखित है

रघुकुल वंश की कुछ प्रमुख कथाएं 

  • रघुवंश महाकाव्य की कहानी राजा दिलीप के चरित्र-चित्रण से शुरू होती है. दिलीप बहुत प्रतापी और पराक्रमी राजा थे, लेकिन उनके कोई बच्चे नहीं थे. सन्तान प्राप्ति की इच्छा से वे अपनी पत्नी सुदक्षिणा के साथ गुरु वशिष्ठ के पास जाते हैं. गुरु वशिष्ठ के आदेशानुसार, वे कामधेनु की पुत्री नन्दिनी (गो) की सेवा का व्रत लेते हैं.
  • रघुवंश के प्रसिद्ध राजा भागीरथ ने ही गंगा नदी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाया था.
  • रघुवंश के अंतिम राजा सुमित्रा को महापद्म नंद ने हराया था.
  • रघुवंश के राजा रघु बहुत पराक्रमी और तेजस्वी थे, इसलिए इस वंश का नाम रघुवंश पड़ा.
  • रघु के पुत्र प्रवृद्ध एक शाप के कारण राक्षस हो गए थे और उनका दूसरा नाम कल्माषपाद था.
  • रघुवंश के राजा दशरथ के चार पुत्र हुए थे- श्री रामचंद्र, भरत, लक्ष्मण, और शत्रुघ्न.
  • रघुवंशी राजपूतों का इतिहास युद्ध, शासन, कला, और साहित्य के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान से भरा पड़ा है

भगवान श्री राम की वंशावली के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य-

  • भगवान राम का जन्म वैवस्वत मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था.
  • इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया था और इस तरह इक्ष्वाकु कुल की स्थापना की थी.
  • इक्ष्वाकु वंश में विकुक्षि, निमि, और दंडक पुत्रों का जन्म हुआ था.
  • धीरे-धीरे इस वंश परंपरा आगे बढ़ती गई और हरिश्चंद्र, रोहित, वृष, बाहु, और सगर भी पैदा हुए.
  • भगीरथ ने कठोर तप के बल पर मां गंगा को पृथ्वी पर लाया था.
  • भगीरथ के पुत्र ककुत्स्थ हुए और ककुत्स्थ से रघु का जन्म हुआ.
  • नाभाग हुए और फिर नाभाग के पुत्र अज हुए.
  • अज से पुत्र दशरथ हुए और फिर दशरथ अयोध्या के राजा बने.
  • इस तरह भगवान राम का जन्म ब्रह्राजी की ही 67 पीढ़ियां में हुआ.
  • भगवान राम के मुख्य पूर्वज इक्ष्वाकु, कुक्षि, दिलीप, रघु, अज, और महाराजा दशरथ थे.
  • रामायण में भी भगवान राम के पूर्वजों का ज़िक्र मिलता है.

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