हनुमान जी ने लंका को जला दिया "लंका दहन

हनुमान जी ने लंका को जला दिया "लंका दहन"

हनुमान जी ने रामायण महाकाव्य में एक महत्वपूर्ण कार्य किया था, जिसमें उन्होंने लंका जलाई थी।
रामायण के अनुसार, जब रावण ने माता सीता को अपहरण कर लिया था और उसे लंका ले गया था, तो प्रभु श्री राम और उनके सेना ने उसकी खोज करने का निर्णय किया। हनुमान जी राम का वयनक सेनानी और अनुभवी वानर योद्धा थे, जिन्हें उनकी भक्ति और शक्ति के कारण राम के द्वारा विशेष अधिकार दिया गया था।हनुमान जी ने लंका जाकर सीता माता का पता लगाने के लिए रवाना के दरबार तक पहुंचा। वहां पहुंचकर उन्होंने माता सीता से मिलकर उन्हें आश्वस्त किया और राम का सन्देश भी दिया। उन्होंने लंका के राजमहल में भी घुस जाने की कोशिश की, परन्तु उन्हें पकड़ लिया गया। लंका के राजा रावण ने हनुमान जी की बलि चढ़ाने की कोशिश की, परन्तु हनुमान जी ने उसके बंधन को भी आसानी से तोड़ दिया।तब हनुमान जी ने अपनी वज्रायुध के सहारे लंका को आग लगाने का निर्णय लिया। उन्होंने लंका के सभी प्रमुख स्थानों को आग लगा दिया और युद्ध से पीछे हट कर वापस लंका के बाहर उन्होंने अपनी वज्रायुध से वायु को गले लगाकर अपने माता पिता भगवान् श्री राम और भक्त हनुमान को प्रणाम किया।इस प्रकार, हनुमान जी ने माता सीता का पता लगाने के बाद, लंका को जलाकर भगवान् राम की सेना को संदेश दिया और रावण जैसे अधर्मी राक्षसों के विनाश में अहम भूमिका निभाई। इस घटना को भगवान् हनुमान की महानता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

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Hanuman ji burnt Lanka "Lanka Dahan"

हनुमान जी ने लंका को जलाने की कथा

रामायण महाकाव्य में बहुत प्रसिद्ध है। इसे "लंका दहन" या "लंकापति रावण का विनाश" की कथा भी कहा जाता है। निम्नलिखित है उस कथा का संक्षेपित सारांश:अयोध्या में श्री राम, देवी सीता, और लक्ष्मण ने बिताए वनवास के अवधि बाद आग्रह करने पर हनुमान जी ने हनुमान जी को लंका की खोज के लिए भेजा। उन्होंने समुद्र तट पर पहुंचकर वानरराज सुग्रीव और अंगद के साथ समझौता किया।हनुमान जी ने अपनी वज्रायुध और भक्ति शक्ति के साथ वानरराज सुग्रीव के सैन्य का साथ लेकर लंका की तलाश में निकल पड़े। वहां पहुंचकर, हनुमान जी ने चित्रकूट पर्वत पर एक विशाल प्रस्तर के ऊपर बैठे रावण के दरबार में प्रवेश किया। हनुमान जी ने रावण से भगवान् राम का संदेश सुनाया और माता सीता का संदेश भी पहुंचाया। रावण के सैनिक ने हनुमान जी को पकड़ लिया, लेकिन उन्होंने उसे आसानी से छुड़ा दिया। तब हनुमान जी ने अपनी वज्रायुध का उपयोग करके लंका के प्रमुख स्थानों को आग लगा दिया। लंका भगवान् शिव के अशीर्वाद से अजनबी राष्ट्रीय अस्त्र के अभाव में थी और इसलिए हनुमान जी का आग लगाने वाला प्रयास सफल हो गया।इस प्रकार, हनुमान जी ने अपनी बड़ी भक्ति और शक्ति के साथ लंका को जला दिया और माता सीता को बचा लिया, जिससे भगवान् राम की सेना उन्हें मिलने में सफल हुई। इस कथा से हनुमान जी की महानता और भक्ति का संदेश मिलता है।

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