हनुमान जी का आवाहन कैसे करें

हनुमान जी का आवाहन कैसे करें

हनुमान जी का आवाहन करना हिंदू धर्म में एक प्रतिमा, मूर्ति या धार्मिक संदर्भ में आधारित कार्य होता है। हनुमान जी को आवाहन करने के लिए आप निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं:
  • साफ़ संसाधित मन: सबसे पहले, एक साफ़ और शुद्ध मन से हनुमान जी का आवाहन करें। उन्हें भक्ति भाव से स्मरण करें और अपने मन में उनकी उपासना करें।
  • पूजा स्थल: हनुमान जी का आवाहन वहां करें जहां आपके लिए एक पूजा स्थल है। आप अपने मंदिर, पूजा कक्ष या किसी धार्मिक स्थल में उन्हें आमंत्रित कर सकते हैं।
  • ध्यान: हनुमान जी की मूर्ति या प्रतिमा को ध्यान से देखें और उनके सामने बैठें। अपने दिल में भक्ति भाव से उन्हें स्मरण करें।
  • मंत्र जाप: हनुमान चालीसा या हनुमान मंत्रों का जाप करें। "ॐ हनुमते नमः" और "ॐ अंजनेयाय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि, तन्नो हनुमान प्रचोदयात्।" जैसे मंत्र का जाप करने से आपका मन हनुमान जी के प्रति आकर्षित होगा।
  • आरती: हनुमान जी की आरती करें। आप आरती गाने के लिए "आरती कुछु अधार की, जाके बल से गिरिवर कांपे" आदि को चुन सकते हैं।
  • प्रसाद: हनुमान जी के आवाहन के बाद, उन्हें प्रसाद के रूप में मिठाई और फल चढ़ाएं।
याद रखें कि भक्ति और श्रद्धा के साथ आवाहन करना हनुमान जी के प्रति आपकी उपासना को प्रभावशाली बनाएगा। आप अपने अनुभव के अनुसार अन्य रिति-रिवाजों का भी पालन कर सकते हैं और अपने साधना को और सामर्थ बना सकते हैं।


हनुमान जी को आवाहन करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन कर सकते हैं

  • पवित्रता का ध्यान करें: सबसे पहले, आवाहन करने से पहले अपने मन को शुद्ध और पवित्र बनाएं। मेधावी और शांत मन से आवाहन करने से प्रभु हनुमान जी आपके पास आने की क़वायद रखते हैं।
  • पूजा स्थल की सजावट: हनुमान जी को आवाहन करने के लिए एक पवित्र स्थान चुनें जैसे कि मंदिर या पूजा घर। स्थान को सुंदर और साफ सुथरा बनाएं।
  • प्रतिमा, चित्र या यंत्र का उपयोग: आप हनुमान जी की मूर्ति, चित्र या यंत्र का उपयोग करके भी आवाहन कर सकते हैं।
  • धूप और दीप: हनुमान जी को आवाहन करने के लिए धूप और दीप जलाएं। धूप के आरोही से दीप दर्शन करवाना भी हनुमान जी को प्रसन्न कर सकता है।
  • रक्षा मंत्र जाप: हनुमान जी के विशेष रक्षा मंत्र 'ॐ हं हनुमते नमः' का जाप करें। इसे ध्यान से और श्रद्धापूर्वक जपें।
  • भजन और कीर्तन: हनुमान जी के भजन और कीर्तन का आनंद लें। उनकी कथा सुनें और उनकी गुणगान करें।
  • पूजा और प्रार्थना: हनुमान जी को समर्पित पूजा करें और उनसे अपनी मनोकामनाएं मांगें। श्रद्धा और भक्ति से उनसे प्रार्थना करें।
ध्यान रखें कि आवाहन करने के बाद, हनुमान जी से समर्पित रहें और उनके आदेशों का पालन करें। समय-समय पर उनकी पूजा और स्मरण करने से आपको भयभीत होने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है और आत्मविश्वास और उत्साह की वृद्धि होती है।

हनुमान जी का आवाहन करना हिंदू धर्म में एक प्रसिद्ध प्रक्रिया है

और इसे भक्ति और समर्पणा भाव से किया जाता है। हनुमान जी को भगवान श्री राम के दिव्य भक्त के रूप में पूजा जाता है और उन्हें बल, साहस, वीरता और विवेक के प्रतीक के रूप में माना जाता है। नीचे दिए गए आवाहन प्रक्रिया का अनुसरण करके आप हनुमान जी को आवाहित कर सकते हैं:
  • स्थान चयन: सबसे पहले, एक शुद्ध और शांत स्थान का चयन करें जहां आप हनुमान जी का आवाहन करना चाहते हैं। आप इसे मंदिर या पूजा स्थल के रूप में भी चुन सकते हैं।
  • पूजा सामग्री: हनुमान जी के आवाहन के लिए आपको कुछ पूजा सामग्री की जरूरत होगी, जैसे कि श्रीरामचरितमानस (रामायण) की पाठ, बंदरकामुक, रोली, अगरबत्ती, दीपक, पुष्प, नैवेद्य (मिठाई या फल), गंध, और पानी।
  • संकल्प: पूजा की शुरुआत में संकल्प करें। इसमें आप अपने मन से विचार करते हुए यह निश्चित करें कि आप हनुमान जी को पूजन कर रहे हैं और उनसे क्या प्राप्त करना चाहते हैं।
  • प्राण प्रतिष्ठा: पूजा स्थल में एक छोटा सा मूर्ति या फोटो रखें और उसे प्राण प्रतिष्ठा के लिए तैयार करें। इसके लिए श्री रामचरितमानस के दोहे या श्लोकों का पाठ कर सकते हैं।
  • आवाहन: प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति या फोटो को ध्यान में रखते हुए, हनुमान जी को आवाहित करें। इसके लिए उनके नाम लेते हुए एक आवाहन मंत्र का जाप करें। "श्री हनुमान जयंती महोत्सव की आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं। हम सभी लोग हनुमान जी की भक्ति करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।" 
  • भजन और पूजा: हनुमान जी को आवाहित करने के बाद, उनके भजन और भक्ति गाने या मंत्रों का जाप करें। आप श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
  • नैवेद्य: हनुमान जी को मिठाई, फल, और अन्य प्रिय भोग दें।
  • आरती: आरती करें और हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाएं।
  • प्रसाद: आरती के बाद प्रसाद बांटें और उसे सभी लोगों को खिलाएं।
  • विसर्जन: आवाहन के बाद, हनुमान जी को सभी श्रद्धा भाव से प्रसाद दें और उन्हें विदाई दें। 
उनके आशीर्वाद के साथ पूजा का समापन करें।ध्यान दें कि यह पूजा प्रक्रिया सावधानीपूर्वक और आदर से किया जाना चाहिए। हरियाली पथ, शुद्धता और नेक इंटेंशन के साथ आप इस पूजा को कर सकते हैं। हनुमान जी की कृपा से आपके जीवन में खुशियां और समृद्धि आएगी।

हनुमान जी का आवाहन भक्ति और समर्पण के साथ किया जाता है, 

  1. ध्यान करें: सबसे पहले, एक शांत और शुद्ध स्थान में बैठें और मन को शुद्ध करें। ध्यान करें कि यह आवाहन पवित्र एवं समर्पित भाव से हो रहा है।
  2. पूजा सामग्री की तैयारी: हनुमान जी के आवाहन के लिए पूजा के सामग्री की तैयारी करें। इसमें चौकी, कपूर, दीपक, धूप, फूल, पंचामृत (मिश्रित दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल), सिंदूर, रोली, अक्षता, गुड़, तांबूल आदि शामिल हो सकते हैं।
  3. पूजा स्थल की सजावट: पूजा स्थल को सुंदरता से सजाएं और हनुमान जी की मूर्ति या चित्र को पूजा स्थल पर रखें।
  4. मंत्र जाप: हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली, या अन्य हनुमान भक्ति मंत्रों का जाप करें। मन्त्र जाप करने से पहले मन को शुद्ध करें और पूर्ण भक्ति भाव से मंत्र उच्चारण करें।
  5. पूजा करें: हनुमान जी को पंचामृत से स्नान कराएं और सिंदूर और रोली से चिह्नित करें। उन्हें फूल, धूप, दीपक आदि से अर्चना करें।
  6. आरती: हनुमान जी की आरती गाएं और उन्हें प्रसाद के रूप में फल या मिठाई चढ़ाएं।
  7. समर्पण: अंत में, अपने सभी मनोकामनाएं हनुमान जी के पास रखें और उन्हें समर्पित करें। भक्ति और विश्वास के साथ आवाहन को पूरा करें।
यदि आपके पास हनुमान जी की मूर्ति नहीं है, तो आप उन्हें मन में साकार रूप में भी आवाहित कर सकते हैं। अपनी पूर्व भावना और विश्वास से हनुमान जी आपके पास आएंगे और आपकी समस्याओं को हल करने में सहायता करेंगे। कृपया ध्यान दें कि पूजा विधि और परंपरा विभिन्न संस्कृति और धर्मों में भिन्न-भिन्न हो सकती है, इसलिए यदि आपको किसी विशेष आवश्यकता या परंपरा के अनुसार करना हो तो उसे अपनाएं।

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