सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्त्वपूर्ण और धार्मिक कथा /Important and religious story of Somnath Jyotirlinga

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्त्वपूर्णऔरधार्मिक कथा

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

 सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga) भारत के गुजरात राज्य में स्थित है। यह भारतीय धर्म के एक प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है और भगवान शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से भी एक है। यह स्थान गुजरात के सौराष्ट्रा क्षेत्र में सोमनाथ पट्टण (Somnath Pattan) के पास स्थित है।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का निर्माण मान्यता के अनुसार महाभारत काल में राजा सोमेश्वर द्वारा किया गया था। इसके बाद यह ज्योतिर्लिंग अनेक बार नष्ट हो गया और पुनः स्थापित किया गया। सोमनाथ मंदिर कई बार विनाशपूर्वक तबाह हो चुका है, अंतिम बार 17वीं शताब्दी में गजनासेन के आक्रमण के समय हुआ था।सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के समय वर्ष 1951 से 1951 के बीच शुरू हुआ था। यह नया मंदिर भगवान सोमनाथ के महत्त्वपूर्ण स्थान पर बनाया गया है और इसे अत्यंत सुंदरता से सजाया गया है। इसके निकट समुद्र तट पर स्थित होने के कारण यह मंदिर पर्यटन स्थल के रूप में भी मशहूर है।सोमनाथ मंदिर का मुख्य गोपुरम एक उच्च पत्थर का निर्माण है और यह मंदिर प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है। मंदिर के अंदर ज्योतिर्लिंग की मूर्ति स्थापित है, जिसे पूजा और अर्चना के लिए उपयोग किया जाता है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का दर्शन और पूजा सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा किए जाते हैं, खासकर सोमवार के दिन।सोमनाथ ज्योतिर्लिंग एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल है जो भारतीय इतिहास और संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह तीर्थस्थल भगवान शिव के भक्तों के लिए महत्त्वपूर्ण स्थान है और विश्वभर में आने वाले यात्रियों का धार्मिक प्रमुख केंद्र है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga) कथा, 

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga) कथा, जो महाभारत काल से जुड़ी हुई है, बहुत रोमांचकारी और धार्मिक है। यहां मैं आपको इसकी संक्षेप में कथा सुना रहा हूँ:
कुलक्षेत्र के राजा शृंगी ने अपने राज्य को सुखी और समृद्ध करने के लिए सोमनाथ मंदिर का निर्माण करने का निर्णय लिया। उन्होंने इस कठिन कार्य को पूर्ण करने के लिए अनेक विशेषज्ञ शिल्पकारों, कला और विज्ञान के पंडितों को बुलवाया। मंदिर की नींव का निर्माण भगवान शिव के भक्त नागकन्या प्रियदर्शिनी ने उनके आदेशानुसार किया।मंदिर के निर्माण के बाद, राजा शृंगी ने महाभिषेक के दौरान महाभारत के युद्ध में रणभूमि में शिवजी की आराधना की और अपनी सभी सम्पत्तियों को शिवजी को समर्पित कर दिया।कुलक्षेत्र के युद्ध में, राजा शृंगी ने भयानक रणक्षेत्र में अपनी वीरता दिखाई और उन्होंने अपने प्रजा को अपने प्राणों के बदले सुरक्षा दी। मगर, शुक्राचार्य (शुक्राचार्य वैतालिक जी के रूप में जाने जाते हैं) ने राजा शृंगी को ग्रह दोष के कारण मरण के लिए प्रतिबद्ध कर दिया।मरण की घड़ी में, राजा शृंगी ने सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव की प्रार्थना की और भक्ति के साथ उन्हें अपने प्राणों का बलिदान किया। इस पर भगवान शिव ने अपनी कृपा दिखाई और राजा शृंगी को पुनर्जीवित किया।
कथा के अनुसार, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। यहां भक्तों को अपने पापों के क्षमाप्राप्त होने और शिव के आशीर्वाद से ग्रहण करने का अवसर मिलता है।
यहां सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga) के बारे में सात महत्वपूर्ण तथ्य हैं:
1. प्राचीनता: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत का सबसे पुराना ज्योतिर्लिंग माना जाता है। इसका निर्माण महाभारत काल में हुआ था और यह काफी प्राचीनतम तीर्थस्थलों में से एक है।
2. धार्मिक महत्त्व: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारतीय धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। यह शिव भक्तों के लिए पवित्र स्थान है और उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्रदान करता है।
3. स्थान: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात राज्य के सौराष्ट्रा क्षेत्र में सोमनाथ पट्टण (Somnath Pattan) के पास स्थित है। यह समुद्र तट पर स्थित होने के कारण भी प्रसिद्ध है।
4. मंदिर: सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के समर्पित है और यह नया मंदिर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बनाया गया था। इसका निर्माण पत्थर से हुआ है और इसका आर्किटेक्चरल डिजाइन भारतीय स्थापत्य कला का एक प्रमुख उदाहरण है।
5. प्रकाश स्थल: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को "प्रकाश स्थल" के रूप में भी जाना जाता है। इसे ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसकी पूजा करते समय इसे प्रकाशित किया जाता है।
6. गिरिराज: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को "गिरिराज" भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है "पर्वत का राजा"। यह शीतलता और शांति के प्रतीक के रूप में माना जाता है और इसे विभिन्न कालों में कई राजा और महाराजा ने संरक्षित किया है।
7. दर्शन और महाप्रसाद: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में शिव की पूजा और अर्चना के बाद, श्रद्धालु अपने प्रभु के दर्शन कर सकते हैं। यहां दर्शन करने के बाद भक्तों को महाप्रसाद भी प्रदान किया जाता है, जो उनके आध्यात्मिक और शारीरिक उन्नति को संकेत करता है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का मंत्र या मन्त्र (mantar) निम्नलिखित है:

ॐ सोमनाथाय नमः।
इस मंत्र का अर्थ है "ओँ सोमनाथ को मेरा नमन है"। यह मंत्र सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा और आराधना के दौरान जप किया जाता है। इस मंत्र के जप से भक्त शिव की कृपा को प्राप्त करने, अधिक आध्यात्मिक उन्नति को प्राप्त करने और अन्तरंग शांति को प्राप्त करने की कामना करते हैं। यह मंत्र शिव के शक्तिशाली और पवित्र रूप को स्मरण करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है और भक्तों को उनके आध्यात्मिक और मानसिक संघर्षों से मुक्ति प्रदान करने में सहायता करता है।

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