हनुमान ज्ञान गुण सागर! भगवान हनुमान अमर हैं

जय श्री राम! हनुमान ज्ञान गुण सागर!

भगवान हनुमान अमर हैं

हिंदू ग्रंथों में आठ चिरंजीवियों का उल्लेख है और भगवान हनुमान उनमें से एक हैं। ऐसा कहा जाता है कि वह कलयुग के अंत तक श्री राम के नाम और कहानियों का जाप करते हुए इस धरती पर चलेंगे। हनुमान जी को इस युग में भी पूजनीय माना जाता है और उन्हें अमर मानते हुए ही उनकी पूजा की जाती है। वास्तव में भगवान हनुमान के जीवन से जुड़े ये कुछ ऐसे रहस्य हैं जिनसे आप सभी शायद अंजान होंगे। 

भगवान हनुमान के पांच भाई थे

ब्रह्माण्ड पुराण श्लोक 223 - 227 में कहा गया है कि अंजना और केसरी के कुल पांच पुत्र थे जिनमें से हनुमान सबसे बड़े थे। भगवान हनुमान के भाई-बहनों के जन्म के क्रम में उनके नाम मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान और द्र्टिमान हैं। महाभारत काल में पांडु और कुंती पुत्र भीम को भी हनुमान जी का भाई कहा गया है।

 हनुमान ज्ञान गुण सागर

ह शब्द संबोधन भगवान राम और हनुमान के प्रति भक्ति और आदर्शता को दर्शाता है। "जय श्री राम" भगवान राम को समर्थन और आशीर्वाद का संकेत करता है, जिन्हें हिंदू धर्म में दशरथपुत्र रामचन्द्र के नाम से जाना जाता है। वे आध्यात्मिकता, धर्मयुद्ध, सत्य, न्याय और प्रेम के प्रतीक हैं।
और "हनुमान ज्ञान गुण सागर" भगवान हनुमान की प्रशंसा करता है, जिन्हें हिंदू धर्म में वानर देवता और भगवान शिव के भक्त के रूप में जाना जाता है। हनुमानजी भगवान राम के वचनस्वरूपी दस्ता हैं और उन्होंने भगवान राम के लिए अपनी वीरता, विशालकाय रूप, बुद्धिमानी, और भक्ति के साथ संसार के लिए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। "ज्ञान गुण सागर" कहने से उनके विशाल ज्ञान और गुणों का गहरा संबंध समझा जाता है। इस शब्द संबोधन का उपयोग भक्तिभाव से रामायण और भारतीय संस्कृति में किया जाता है, और लोग इसका जाप, प्रशंसा, और ध्यान करके भगवान राम और हनुमान की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

जय श्री राम हनुमान ज्ञान गुण सागर कथा।

भगवान राम और हनुमान जी की कथा हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध कथा है। यह कथा भगवान राम के अवतार के विषय में है, जो धर्मयुद्ध में असुर रावण से समर्थ होकर धरती को रक्षा करने के लिए आए थे। हनुमानजी भगवान राम के शक्तिशाली भक्त थे, जो उनके साथ जुड़कर विभिन्न चरित्र, कठिनाइयों का सामना करते हुए, उन्हें सफलता प्रदान करते थे। हनुमान जी की कथा में, उनके बाल्यकाल से लेकर भक्ति और निष्ठा के प्रती उनकी दृढ़ता, उनके लीला और अद्भुत शक्तियों का वर्णन होता है। उनके शरीर का रंग सुनहरा होता था और उनके पवनपुत्र और मारुति के नाम से भी विख्यात थे। वे भगवान राम के सेवक, दास, भक्त और साक्षात् हनुमान थे।
कथा में हनुमान जी के वीरता, बुद्धिमानी, शक्ति, और विनम्रता का वर्णन होता है, जो उन्हें भगवान राम के प्रिय भक्त बनाते हैं। उनके वीरता के प्रसंग में, लंका को जलाकर सीता माता का उद्धार, संग्राम में भगवान राम के साथ सेवा करना और रावण के वध की कथा होती है। हनुमान जी के प्रति भक्ति और विश्वास को दर्शाने वाली इस कथा को सुनकर लोग उन्हें प्रणाम करते हैं और उनसे शक्ति, बुद्धि और प्रेरणा प्राप्त करते हैं। यह कथा धर्म और भक्ति के संदेश को समझाने के लिए एक अच्छा साधन है और लोग इसे भक्ति और भावना के साथ सुनते हैं।

हनुमान जी की मूर्ति का रंग लाल या नारंगी क्यों होता है

इसकी एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान हनुमान ने सीता जी को माथे पर सिंदूर लगाते हुए देखा और पूछा कि यह उनके दैनिक अनुष्ठानों का हिस्सा क्यों है। तब सीता ने हनुमान को समझाया कि सिंदूर श्रीराम की लंबी उम्र, उनके पति के प्रति उनके प्रेम और सम्मान का प्रतिनिधि है। श्री राम के प्रति निष्ठावान भक्ति की वजह से हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर को इस सिंदूर से लेपने का निर्णय लिया और हनुमान जी को सिंदूर से रंगा देखकर उनकी भक्ति से प्रभावित होकर भगवान श्री राम ने वरदान दिया कि जो लोग भविष्य में सिंदूर से हनुमान जी की पूजा करेंगे, उनकी सारी कठिनाइयां दूर हो जाएंगी और यही कारण है कि मंदिर में आज भी हनुमान जी की मूर्ति सिंदूर से रंगी होती है।

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