मां काली और भगवान शिव के बारे में जानिए -Know about Maa Kali and Lord Shiva

मां काली और भगवान शिव के बारे में जानिए

मां काली और भगवान शिव 

मां काली, भगवान शिव की चौथी पत्नी मानी जाती हैं. काली, काल (शिव का एक विशेषण) का स्त्री रूप है
कहा जाता है कि मां भगवती का अंश भगवान शिव के गले से अवतरित हुआ था. तब भोलेनाथ ने अपना तीसरा नेत्र खोला और मां ने भयंकर काली का रूप धारण कर लिया. मां काली के इस रूप को देखकर देवता और राक्षस वहां से भागने लगे !
मां काली की प्रतिमा में भगवान शिव, मां के चरणों तले लेटे दिखाई देते हैं. कहा जाता है कि मां काली के क्रोध को शांत करना भगवान शिव के लिए भी आसान नहीं था. इसलिए भगवान शिव, मां काली के मार्ग में लेट गए. क्रोधित मां काली ने जैसे ही भगवान शिव के ऊपर पांव रखा, वो झिझक कर ठहर गईं और उनका गुस्सा शांत हो गया !
मां काली, भगवती दुर्गा की दस महाविद्याओं में से एक हैं. मां काली के इस भयंकर रूप की उत्पत्ति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी. मां का यह रूप इस कदर भयंकर है कि जिससे स्वयं काल को भी डर लगता है !
Know about Maa Kali and Lord Shiva

मां काली

  • मां महाकाली, हिंदू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं. वे मृत्यु, काल और परिवर्तन की देवी हैं. काली, कालिका या महाकाली, सुंदर रूप वाली आदिशक्ति दुर्गा माता का काला, विकराल और भयप्रद रूप है
  • महाकाली, भगवती की दस महाविद्याओं में से एक हैं. इनके काले और डरावने रूप की उत्पत्ति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी. यह एकमात्र ऐसी शक्ति है जिनसे स्वयं काल भी भय खाता है
  • महाकाली का रूप दश मुख, भुजाओं और पैरों से युक्त है. काली जी माता पार्वती जी का ही रूप हैं. काली जी चतुर्भुजा हैं और इनका शांत रूप है. इनके मुख पर एक हल्की सी मुस्कान है
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महाकाली की उत्पत्ति कैसे हुई

राक्षसों ने कहा कि जहाँ पृथ्वी जल में डूबी न हो, वहीं हमारा वध करो तब भगवान ने तथास्तु कहकर दोनों राक्षसों के मस्तकों को अपनी जाँघ पर रख लिया और चक्र से काट डाला इस प्रकार देवी महामाया (महाकाली) ब्रह्माजी की स्तुति करने पर प्रकट हुई महाकाली की आराधना करने से जीवन के सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है.

भगवान शिव

शैव परंपरा में, भगवान शिव सर्वोच्च भगवान हैं. वे ब्रह्मांड की रचना, सुरक्षा, और परिवर्तन करते हैं. देवी-उन्मुख शाक्त परंपरा में, सर्वोच्च देवी (देवी) को ऊर्जा और रचनात्मक शक्ति (शक्ति) और शिव की समान पूरक भागीदार माना जाता है. 
  • भगवान शिव अनादि और सृष्टि प्रक्रिया के आदि स्रोत हैं. वे हमेशा लय और प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं. शिव सभी को समान दृष्टि से देखते हैं, इसलिए उन्हें महादेव कहा जाता है. 
  • भगवान शिव का त्रिशूल न सिर्फ़ शस्त्र है, बल्कि मानव शरीर में मौजूद नाड़ियों का सूचक माना जाता है. इसका हमारे जीवन से यह संबंध है कि जिसने भी सही ज्ञान अर्जित किया और उस ज्ञान का सांसारिक उन्नति के लिए प्रयोग किया उसमें भगवान शिव की ऊर्जा का स्रोत उत्पन्न हो चुका है. 
  • भगवान शिव अठारह नामों से पूजे जाते हैं. इनमें शिव, शम्भु, नीलकंठ, महेश्वर, नटराज आदि प्रमुख हैं. भगवान शिव अपने मस्तक पर आकाश गंगा को धारण करते हैं और उनके भाल पर चंद्रमा हैं. उनके पांच मुख माने जाते हैं जिनमें प्रत्येक मुख में तीन नेत्र हैं. भगवान शिव दस भुजाओं वाले त्रिशूलधारी हैं. 
  • भगवान शिव स्वयंभू हैं, लेकिन पुराणों में उनकी उत्पत्ति का विवरण मिलता है. विष्णु पुराण के अनुसार, जहां भगवान विष्णु ब्रह्माजी की नाभि से उत्पन्न हुए, वहीं शिव विष्णु जी के माथे के तेज से उत्पन्न हुए. विष्णु पुराण के अनुसार, माथे के तेज से उत्पन्न होने के कारण ही शिव-शंभू हमेशा योगमुद्रा में रहते हैं.
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भगवान शिव की उत्पत्ति कैसे हुई

हम सबके प्रिय भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है वे स्वयंभू हैं। लेकिन पुराणों में उनकी उत्पत्ति का विवरण मिलता है। विष्णु पुराण के अनुसार ब्रह्मा भगवान विष्णु की नाभि कमल से पैदा हुए जबकि शिव भगवान विष्णु के माथे के तेज से उत्पन्न हुए बताए गए हैं।

भगवान शिव की चौथी पत्नी मां काली को माना जाता है

काली ने भयानक दानवों का संहार किया था। वर्षों पहले एक ऐसा भी दानव हुआ जिसके रक्‍त की एक बूंद अगर धरती पर गिर जाए तो हजारों रक्तबीज पैदा हो जाते थे। इस दानव को खत्म करना किसी भी देवता के वश में नहीं था। तब मां काली ने इस भयानक दानव का संहार कर तीनों लोकों को बचाया था। रक्‍तबीज को मारने के बाद भी मां का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था, तब भगवान शंकर उनके चरणों में लेट गए गलती से मां काली का पैर भगवान शिव के सीने पर  पड़ गया। इसके बाद उनका गुस्सा शांत हुआ।मां काली को शिव पर पैर रखने का पश्चाताप हुआ और इस महापाप के कारण ही उन्हें वर्षों तक हिमालय में प्रायश्चित के लिए भटकना पड़ा था। व्यास नदी के किनारे जब माता काली ने भगवान शिव का ध्यान किया तो आखिरकार भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिए और इस तरह से मां काली को भूलवश हुए अपने महापाप से मुक्ति मिली। देवभूमि हिमाचल के कांगड़ा परागपुर में यह स्थान अब कालीनाथ कालेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
 
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मां काली के चरणों के नीचे मुस्कुराते हुए शिव

एक बार काली मां (महाकाली) बहुत ज्यादा क्रुद्ध अवस्था में थीं। उनके क्रोध की अग्नि इतनी प्रचंड थी, कि समस्त सृष्टि का नाश होने पर आ गई। कोई भी देव, राक्षस और मानव उन्हें रोकने में समर्थ नहीं था। तब सभी ने महाकाली को रोकने के लिए सामूहिक रूप से भगवान शिव का स्मरण किया। महाशक्ति जहां-जहां कदम रखतीं, वहां विनाश होना निश्चित था।
भगवान शिव ने भी यह अनुभव किया कि वह महाशक्ति को रोकने में समर्थ नहीं है। तब भगवान शिव ने भावनात्मक रास्ता चुना और उन्हें रोकने पहुंचे। भोलेनाथ महाकाली के रास्ते में लेट गए। जब मां काली वहां पहुंची तो उऩ्होंने ध्यान नहीं दिया कि भगवान शिव वहां लेटे हुए हैं और उन्होंने शिव की छाती पर पैर रख दिया। अभी तक महाशक्ति ने जहां-जहां कदम रखा था, वहां सब कुछ खत्म हो चुका था। लेकिन यहां अपवाद हुआ। मां काली ने जैसे ही देखा कि भगवान शिव की छाती पर उनका पैर है, उनका गुस्सा शांत हो गया और वह पश्चाताप करने लगीं। इस एक कहानी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। मायने नहीं रखता है कि हमारे पास कितने संसाधन हैं और हम कितने शक्तिशाली हैं, कई बार ऐसे मौके आते हैं जब हमें सोच समझकर परिस्थितियों को संभालना पड़ता है। हर मुश्किल का हल निकाला जा सकता है, अगर सूझबूझ से फैसला लिया जाए।

 मां काली और भगवान शिव के महत्वपूर्ण तथ्य

मां काली के बारे में कुछ और तथ्य:
  • मां काली, ब्रह्मांड की दिव्य स्त्री ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं.
  • मां काली बुराई का विनाश करती हैं और शक्तिशाली मानी जाती हैं.
  • मां काली, नश्वर हैं और राक्षसों और देवताओं द्वारा समान रूप से पूजनीय हैं.
  • मां काली की उत्पत्ति धर्म की रक्षा हेतु हुई व पापियों के सर्वनाश के करने के लिए हुई है.
  • मां काली 10 महाविद्याओं में से एक हैं और उन्हें देवी दुर्गा की महामाया कहा गया है.
  • मां काली की उपासना जीवन में सुख, शांति, शक्ति और विद्या देने वाली बताई गई है.
  • मां काली के लालट में तीसरा नेत्र और चंद्र रेखा थी.
  • मां काली के कंठ में कराल विष का चिन्ह था और हाथ में त्रिशूल व नाना प्रकार के आभूषण व वस्त्रों से वह सुशोभित थीं.
  • मां काली के केवल हुंकार मात्र से दारुक समेत, सभी असुर सेना जल कर भस्म हो गई.
  • मां काली को कालरात्रि माता भी कहा जाता है.
  • मां काली को शुभंकरी भी कहा जाता है.
  • भक्तों के द्वारा मां काली को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है

भगवान शिव के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • भगवान शिव को महादेव, नीलकंठ, शंकर, रुद्र, महेश, और त्रिपुरारी जैसे नामों से भी जाना जाता है.
  • भगवान शिव के तीसरे नेत्र में त्रिशूल बना होता है.
  • भगवान शिव के तिलक के तीन बिंदुओं को त्रिपुंड्र कहा जाता है.
  • भगवान शिव को स्वर्णमय कलश और वृषभ के साथ बैठे देखा जाता है.
  • भगवान शिव अनादि और सृष्टि प्रक्रिया के आदि स्रोत हैं.
  • भगवान शिव सभी को समान दृष्टि से देखते हैं, इसलिए उन्हें महादेव कहा जाता है.
  • भगवान शिव के सात शिष्य हैं, जिन्हें सप्तऋषि माना गया है.
  • भगवान शिव के गणों में भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, शृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय, और विजय प्रमुख हैं.
  • भगवान शिव की वेशभूषा ऐसी है कि हर धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक खोज सकते हैं.
  • भगवान शिव की माता श्री दुर्गा देवी (अष्टंगी देवी) और पिता सदाशिव यानी काल ब्रह्मा हैं.
  • भगवान शिव के गुरु उनके पिता आदि रुद्र भगवान महाकाल थे.
  • भगवान शिव को महाकाल कहा जाता है, जिसका अर्थ है समय.
  • शैव मत के अनुयायी भगवान शिव को सर्वोपरि मानते हैं

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