उमानंदा मंदिर, असम, के बारे में जानिए /Know about Umananda Temple, Assam

 उमानंदा मंदिर, असम, के बारे में जानिए

 उमानंदा मंदिर असम, भारत में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे, गुवाहाटी शहर के पूर्वी भाग में स्थित है। यह मंदिर असम के प्राचीनतम और महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक माना जाता है और इसे असम की संस्कृति और धार्मिक ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक भी माना जाता है।इस मंदिर का निर्माण करीब 17वीं शताब्दी में किया गया था और यह काल्पनिक काल से भारतीय साहित्य में उल्लेखित है। उमानंदा मंदिर का शिखर गोलकार रूप से बना हुआ है और इसकी संरचना प्राचीन असमीय वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है।
मंदिर का नाम 'उमानंदा' उस माता उमा (देवी पार्वती) के नाम पर रखा गया है, जो भगवान शिव की पत्नी हैं। मंदिर का स्थान भगवान शिव के विराजमान रूप के रूप में माना जाता है और यहां के प्रतिमा द्वारा लोग उन्हें पूजते हैं।इस मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव की पूजा और उत्सव किया जाता है और इस अवसर पर यहां बहुत सारे शिव भक्त आकर्षित होते हैं। इसके अलावा, यह मंदिर प्रतिदिन भक्तों के द्वारा प्रार्थना और पूजा के लिए भी खुला रहता है।
उमानंदा मंदिर असम की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे असम के पर्यटन स्थलों में से एक रूप में भी माना जाता है। इसकी प्राचीनता, वास्तुकला, और आकर्षक स्थानीय माहौल इसे अनुभव करने के लिए यात्रियों को प्रशंसा प्राप्त करती हैं।

उमानंदा मंदिर की एक प्रसिद्ध कथा 

कथा: उमानंदा मंदिर की एक प्रसिद्ध कथा है जो असम की साहित्यिक धाराओं में व्याप्त है। यह कथा मंदिर की प्राचीनता और उसके महत्व को दर्शाती है।कहा जाता है कि बहुत समय पहले, जब असम एक शान्तिपूर्ण और धार्मिक समाज था, एक साधू ऋषिनामक योगी उमानंद वन विहार करने के लिए इस एकांत और प्राकृतिक स्थान पर आए। योगी उमानंद गहरे तपस्या और ध्यान में लगे रहते थे। उनके ध्यान और तपस्या के प्रभाव से वहां का माहौल धार्मिक और शांतिपूर्ण हो गया।योगी उमानंद की तपस्या के दौरान, उन्हेंभगवान शिव का दर्शन हुआ। भगवान शिव ने योगी को आदेश दिया कि वह एक मंदिर बनाएं, जिसमें भक्त उन्हें पूज सकें और उनकी कृपा प्राप्त कर सकें। भगवान शिव ने योगी को इसके लिए विशेष निर्देश भी दिए।+योगी उमानंद ने भगवान शिव के आदेशों का पालन करते हुए मंदिर का निर्माण किया। मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित है और उसकी सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व आकर्षित करते हैं। मंदिर की वास्तुकला असमीय विरासत का अद्भुत उदाहरण है और इसका निर्माण लाल पत्थर से हुआ है।यह कथा उमानंदा मंदिर की महत्वपूर्णता, धार्मिकता और इसके आध्यात्मिक माहौल को प्रकट करती है। इसे स्थानीय लोगों के बीच पास के पीढ़ीयों द्वारा गाते और सुनाए जाते हैं, जिससे यह मंदिर और उसकी कथा का प्रचार होता है।

रोचक तथ्य उमानंदा मंदिर, असम, के बारे में हैं:

1. उमानंदा मंदिर असम का प्राचीनतम मंदिर माना जाता है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में किया गया था।
2. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसे उमा (देवी पार्वती) के नाम पर भी जाना जाता है।
3. उमानंदा मंदिर का स्थान गुवाहाटी शहर के पूर्वी भाग में स्थित है। यह ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित है और वन विहारों के आसपास विकसित हुआ है।
4. मंदिर का शिखर गोलकार रूप में बना हुआ है और इसकी वास्तुकला प्राचीन असमीय वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है।
5. उमानंदा मंदिर का निर्माण लाल पत्थर से हुआ है। मंदिर की भव्यता और धार्मिक महत्व आकर्षकता का कारण है।
6. मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव की पूजा और उत्सव मनाए जाते हैं। इस अवसर पर बहुत सारे शिव भक्त मंदिर में आकर उनकी पूजा करते हैं।
7. उमानंदा मंदिर असम के पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है। इसकी प्राचीनता, वास्तुकला, और नदी किनारे स्थिति इसे दर्शनीय बनाती हैं।
ये तथ्य उमानंदा मंदिर के महत्व, स्थान और धार्मिक महिमा को दर्शाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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