लिंगराज मंदिर ओडिशा हिंदू धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल

लिंगराज मंदिर ओडिशा हिंदू धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल 

लिंगराज मंदिर ओडिशा राज्य के भुवनेश्वर शहर में स्थित है। यह मंदिर हिंदू धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और ओडिशा के प्रमुख मंदिरों में से एक माना जाता है। लिंगराज मंदिर को जगन्नाथ मंदिर के बाद ओडिशा में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।यह मंदिर कालिंग मेश्वर माउंटन पर स्थित है और कैलाशनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव को लिंग के रूप में पूजा जाता है।


मंदिर का निर्माण कालजयी वंश के राजा ययाति के समय माना जाता है और बाद में इसे कैलाशनाथ मंदिर के रूप में पुनर्निर्माण किया गया। मंदिर का विस्तार कालिंग मेश्वर पहाड़ी पर करीब 250 एकड़ तक फैला हुआ है।लिंगराज मंदिर को एक संक्रान्ति के दौरान, जिसे खजुराहोली कहा जाता है, एक दूसरे मंदिरों से थोड़ा अलग तरीके से प्रवेश करना होता है। यहां पर पूजा विधि में अत्याधिक मजबूतता के कारण विभिन्न धार्मिक विचारधाराओं के लोग एकत्र होते हैं। लिंगराज मंदिर एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। मंदिर की सुंदर वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण, यह ओडिशा की संस्कृति और धर्म के प्रतीक माना जाता है।

लिंगराज मंदिर की कथा

लिंगराज मंदिर की कथा ओडिशा के पौराणिक और धार्मिक महत्व के साथ जुड़ी हुई है। यह मंदिर हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है और उसकी कथा इसके पीछे विशेष महत्व रखती है।
लिंगराज मंदिर की कथा के अनुसार, एक बार परिणय के दिन माता पार्वती ने अपने पति भगवान शिव को सवारी पर बुलाया। उन्होंने कहा कि उनकी सवारी के लिए एक स्थान चुनें जहां शिव शक्तियों के साथ एकीकृत होंगे। भगवान शिव ने उन्हें भुवनेश्वर नगर के एक पर्वत पर जाने का सुझाव दिया और कहा कि वहां उन्हें उनकी इच्छा पूरी होगी।माता पार्वती ने भगवान शिव की सलाह मानी और वे भुवनेश्वर नगर के उस पर्वत पर पहुंच गईं। वहां उन्होंने शिव के साथ विलय किया और अपने रूप को लिंग के रूप में प्रकट किया। यह घटना उस पर्वत के शिवालिंग की मूल आधारभूत है, जिसे बाद में लिंगराज मंदिर के रूप में जाना गया।लिंगराज मंदिर की कथा इसे एक शक्ति स्थल बनाती है, जहां भगवान शिव और पार्वती का एकत्व प्रतिष्ठित है। मंदिर के पास एक झरना है जिसे उमा नदी कहा जाता है और यहां पर यात्री अपने पापों को धो सकते हैं और शुद्धि प्राप्त कर सकते हैं।
लिंगराज मंदिर की कथा और महत्व ओडिशा के पौराणिक और धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखती है और लोग इस मंदिर को श्रद्धा और आस्था के साथ पूजते हैं।

रोचक तथ्य लिंगराज मंदिर, ओडिशा के बारे में हैं

  1. लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर का सबसे प्रमुख मंदिर है और ओडिशा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है.
  2. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और उनके लिंग के रूप में पूजा जाता है.
  3. लिंगराज मंदिर को कालिंग मेश्वर माउंटन पर स्थित है और इसका विस्तार कालिंग मेश्वर पहाड़ी पर करीब 250 एकड़ तक फैला हुआ है.
  4. मंदिर का निर्माण कालजयी वंश के राजा ययाति के समय माना जाता है और बाद में इसे कैलाशनाथ मंदिर के रूप में पुनर्निर्माण किया गया.
  5. लिंगराज मंदिर में प्रवेश करने के लिए सभी जातियों को अनुमति है, जो इसे ओडिशा में एक मात्र ऐसे मंदिर बनाता है जहां ऐसा होता है।
  6. यह मंदिर कालिंग मेश्वर मंदिर के साथ जुड़ा हुआ है, जिसे भी ओडिशा के मुख्य तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है।
  7. लिंगराज मंदिर के पास उमा नदी है, जो यात्रियों को पापों से मुक्ति प्रदान करने के लिए माना जाता है।
  8. मंदिर की वास्तुकला और शैली में ओडिशा की आदिकालीन और मध्यकालीन स्थापत्य कला का प्रभाव दिखाई देता है।
ये थे कुछ रोचक तथ्य लिंगराज मंदिर, ओडिशा के बारे में। यह मंदिर ओडिशा की संस्कृति, धर्म और परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

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