सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु एक महत्वपूर्ण भूमिका

 सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु एक महत्वपूर्ण भूमिका

हिंदू धर्म के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भगवान विष्णु सृष्टि, स्थिति और संहार के त्रिमूर्ति में से एक रूप में प्रस्तुत होते हैं। उन्हें जगत के पालक और संरक्षक के रूप में जाना जाता है।
सृष्टि के आरंभ के संबंध में, वेदों में विष्णु को समुद्र के मध्य स्थित आदित्य से उत्पन्न होने वाले पुरुष रूप में वर्णित किया गया है। उन्हें नारायण, पुरुष और विश्वकर्मा के रूप में भी पुकारा जाता है। इन वेदिक वर्णनों के अनुसार, भगवान विष्णु जगत के सृजनहार और संरक्षक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उन्होंने ब्रह्मांड की सृष्टि का आरंभ किया और उसका पालन-पोषण करते हैं।भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों के माध्यम से, वे सृष्टि को संरक्षण करते हैं और धर्म की स्थापना के लिए प्रतिष्ठित होते हैं। उनके अवतारों में राम और कृष्ण दो महत्वपूर्ण अवतार हैं जिन्होंने धर्म की संस्थापना और अधर्म के नाश के लिए संघर्ष किया। इसलिए, सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु को सृष्टि के पालक और संरक्षक के रूप में माना जाता है जो धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए अवतार लेते हैं।

सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु  प्रमुख कथा


सृष्टि के आरंभ के संबंध में भगवान विष्णु को संदर्भित कई कथाएं हैं। इनमें से एक प्रमुख कथा है "विष्णु पुराण" में वर्णित कथा है जो सृष्टि के आरंभ के समय का वर्णन करती है। निम्नलिखित है उस कथा का संक्षेपित सार:
कृतयुग में भगवान विष्णु की नींव समुद्र के मध्य स्थित आदित्य से उत्पन्न हुई। वे ब्रह्मा जी के पुरुष स्वरूप थे और उन्होंने सृष्टि का आरंभ किया। उन्होंने विचार किया कि कैसे सृष्टि का प्रारंभ करना चाहिए, और उन्होंने ब्रह्मांड के अभ्यांतरिक्ष को अद्भुत तापमान से भर दिया। उस समय अभ्यांतरिक्ष को 'अग्नि' से भर दिया गया था। इससे ब्रह्माजी ने अभ्यांतरिक्ष को शांत करने के लिए वायु तत्व का उत्पादन किया। फिर अभ्यांतरिक्ष को जल से भर दिया गया। उसके बाद उन्होंने आकाश तत्व का उत्पादन किया। विष्णु जी ने उस आकाश तत्व से सूर्य, चन्द्र, तारे, ग्रह, नक्षत्र आदि का उत्पादन किया। इसके बाद उन्होंने ब्रह्मांड की समुद्र में जल तत्व का उत्पादन किया, जिससे जल के संचय हो गए। उस जल से उन्होंने अप्सराएं, गंधर्व, नाग, देव, मानव, पशु आदि को उत्पन्न किया।
तत्पश्चात, विष्णु जी ने पृथ्वी तत्व का उत्पादन किया, जिससे पृथ्वी और उसके ऊपर के प्लैन्ट्स, जलजीवियों और भूत-प्रेत आदि का उत्पन्न हुआ। इससे जगत की नींव रखी गई। इस प्रकार, भगवान विष्णु ने सृष्टि की आरंभ की और सृष्टि के विभिन्न तत्वों का उत्पादन किया। वे सृष्टि के निर्माता, पालक और संरक्षक के रूप में जाने जाते हैं। इस कथा के द्वारा उनके सृष्टि में महत्वपूर्ण भूमिका का प्रत्यायाशा किया जाता है।

सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु के संबंध रोचक तथ्य 

  1. विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु ब्रह्मांड के उत्पत्ति के समय आदित्य से उत्पन्न हुए थे। उन्होंने आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी के तत्वों का निर्माण किया।
  2. भगवान विष्णु का आधारस्थान शेषनाग है, जिसे सप्तद्वीप और सप्तसमुद्र का धरातल कहा जाता है। वे शेषनाग पर विराजमान होते हैं।
  3. विष्णु पुराण में वर्णित है कि भगवान विष्णु के चार हाथ होते हैं। उन्हें शंख, चक्र, गदा, और पद्म के साथ दिखाया जाता है।
  4. भगवान विष्णु के दस अवतार होते हैं, जिन्हें दशावतार कहा जाता है। इनमें राम और कृष्ण अवतार सबसे प्रसिद्ध हैं।
  5. विष्णु भगवान का पारिवारिक संबंध भगवती लक्ष्मी (भगवान की पत्नी) और उनके चार अवतार विष्णुपुत्र (कुमार, अयन, धर्मार्थ) के साथ है।
  6. विष्णु भगवान को चतुर्भुज (चार हाथ) और शंख-चक्र-गदा-पद्म धारी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  7. भगवान विष्णु के धार्मिक संदेश विशेष रूप से धर्म, सत्य, न्याय, और सार्वभौमिक शांति की प्रोत्साहना के लिए हैं।
  8. भगवान विष्णु का आराधना कई तरीकों से किया जाता है, जैसे कि पूजा, भजन, व्रत, और यज्ञ।
  9. विष्णु भगवान के दर्शन के लिए भगवत विष्णु के मंदिर और टेंपल्स भारत और विश्व के विभिन्न स्थानों पर मौजूद हैं।
  10. विष्णु पुराण में विष्णु भगवान की कई कथाएं और लीलाएं दर्शाई गई हैं, जो उनके अवतारों, भक्तों के साथ और दैत्यों के विनाश के बारे में हैं।रोचक तथ्य भगवान विष्णु के संबंध में। ध्यान देने योग्य है कि ये तथ्य हिंदू धर्म की प्रतिष्ठित परंपरा, पुराणों, और श्रुति के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं।

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