हनुमान जी के मंत्र संस्कृत / mantras of hanuman ji sanskrit

हनुमान जी के मंत्र संस्कृत 

श्री हनुमान जी के कई मंत्र हैं जो उनके भक्तों द्वारा जाप किए जाते हैं। ये मंत्र भक्तों को शक्ति, सुरक्षा, धैर्य, बुद्धि, और सफलता की प्राप्ति में सहायक होते हैं। नीचे कुछ प्रमुख हनुमान जी के संस्कृत मंत्र दिए गए हैं:


1. हनुमान मंत्र (बजरंग बाण):
मनोजवं मारुततुल्यवेगं।
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं।
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
2. आञ्जनेयाय विद्महे:
वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमान प्रचोदयात्॥
3. हनुमान बीज मंत्र:
ॐ हं हनुमते नमः॥
4. हनुमान गायत्री मंत्र:
ॐ अंजनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमान प्रचोदयात्॥
5. हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली:
अन्जनासूनो वायुपुत्रो महाबलः पराक्रमः।
संजीवननदीसुतः वायुनन्दनो वानरः॥
महाकायो द्वीपनक्षः पीनाकवनवासनः।
सिंहिकासूरसम्हारी लङ्काद्वीपङ्कजोद्भवः॥
सीताशोकविनाशाय लङ्कायां रवणान्तकः।
आञ्जनेयस्य वीर्याय श्रीरामाय धीमहि॥
हनुमान जी के ये मंत्र उनके भक्तों द्वारा नियमित जप किए जाते हैं और उन्हें सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति देने में मदद करते हैं। यह मंत्र संध्या वेला या ब्रह्ममुहूर्त में जपने से और अधिक शक्तिशाली होते हैं। जाप के समय ध्यान और भावना से इसे जपना चाहिए।

हनुमान जी ये आठ सिद्धियां निम्नलिखित हैं

1. अणिमा: हनुमान जी की पहली सिद्धि अणिमा है, जिसमें वे अपना आकार छोटा करके छोटे वस्त्र, पत्तियां या किसी भी रूप में परिवर्तित हो सकते हैं।
2. महिमा: हनुमान जी की दूसरी सिद्धि महिमा है, जिसमें वे अपने विशाल रूप को दिखा सकते हैं और अपनी भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
3. गरिमा: इस सिद्धि में, हनुमान जी अपना भार बढ़ा सकते हैं और भूमि पर असीमित वजन को उठा सकते हैं।
4. लघिमा: इस सिद्धि के माध्यम से, हनुमान जी अपने शरीर को बहुत हलका बना सकते हैं और विभूति (योगिक शक्ति) को प्राप्त कर सकते हैं।
5. प्राप्ति: हनुमान जी की पांचवीं सिद्धि प्राप्ति है, जिससे वे सभी वस्तुएं अथवा बयारियां उपलब्ध कर सकते हैं, चाहे वे अस्त्र, शस्त्र, रत्न, या भविष्यवाणी हों।
6. प्राकाम्या: इस सिद्धि के अंतर्गत, हनुमान जी सभी कामनाओं को पूरा कर सकते हैं, और भक्तों की इच्छाओं को प्राप्त कर सकते हैं।
7. ईशित्वरत्वा: यह सिद्धि हनुमान जी को विश्व के समस्त देवताओं के मुख्य मुखिया बना देती है, और वे सभी को अपने आदेशों के अनुसार कार्य करवा सकते हैं।
8. वशित्वा: इस सिद्धि के अंतर्गत, हनुमान जी अन्य जीवों को अपने वश में कर सकते हैं और उन्हें अपने इच्छानुसार कार्य करवा सकते हैं।
ये सिद्धियां हनुमान जी के अद्भुत शक्तियों का प्रमुख उदाहरण हैं और उन्हें भक्तों के साथ उदारता से साझा करते हैं।

हनुमान जी क्षमा मंत्र:

हनुमान जी के क्षमा मंत्र का उच्चारण उनके भक्तों को भगवान् हनुमान के पापों से मुक्ति प्रदान करने में सहायक होता है। यह मंत्र उनकी कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए जप किया जाता है।हनुमान जी क्षमा मंत्र:
क्षमास्व राम रामेति प्रणतिभिर्विमुखेन वा।
यः श्रुत्वा पथि नो राजन्सर्वान्पापान्प्रणश्यति॥
(Transliteration)
Kshamāsva Rāma Rāmeti Pranatibhirvimukhena vā।
Yaḥ śrutvā pathi no rājan sarvān pāpān praṇaśyati॥
इस मंत्र का अर्थ है:
"भगवान् राम, मुझ पात्र से क्षमा करें, चाहे मैं आपके प्रति नम्र हो या अनम्र हो। राजन, इस मंत्र को सुनने से सभी पाप मिट जाते हैं।"हनुमान जी के क्षमा मंत्र का नियमित जप करने से भक्त अपने अशुभ कर्मों को क्षमा प्राप्त कर सकते हैं और धर्मपरायणता की प्राप्ति करते हैं। इस मंत्र को भक्त श्रद्धा भाव से जपते हैं तो हनुमान जी उन्हें अपनी कृपा से आशीर्वादित करते हैं।

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