हनुमान जी का ऋण कांड (Rina Kand) या ऋणहरण कांड /Hanuman ji's loan scandal (Rina Kand)

 हनुमान जी का ऋण कांड (Rina Kand) या ऋणहरण कांड 

हनुमान चालीसा में वर्णित है, जिसमें बताया गया है कि कैसे हनुमान जी ने माता सीता के पावन प्रतीक्षा और प्रेम का ऋण सम्पन्न किया था।
ऋण कांड के अनुसार, हनुमान जी श्री राम और माता सीता की भक्ति करते थे और उनके दर्शन के लिए उनमें एक अथाह लालसा थी। एक दिन, जब भगवान राम, माता सीता, और लक्ष्मण चित्रकूट पर्वत के पास रह रहे थे, तो हनुमान ने अपनी बाहुओं का विस्तार करके उन्हें संदेश पहुंचाया कि वह भी उनके समीप आना चाहते हैं।
हनुमान को जानकर माता सीता ने उनसे एक विशेष कारण बताया कि वे उनके दर्शन नहीं कर सकते। माता सीता ने कहा कि जब उन्हें रावण ने लंका में अपहरण किया था, तो उनकी प्रतीक्षा में हनुमान ने उन्हें संदेश पहुंचाने का काम किया था। इसलिए वे अभी उनसे मिलने के योग्य नहीं हैं, क्योंकि ऋण का समय अभी बाकी है।
वैसे ही, हनुमान जी ने आत्मसंयम बनाए रखकर कहा कि जब तक वे भगवान राम की सेवा के ऋण से मुक्त नहीं होते, तब तक वे माता सीता के दर्शन के योग्य नहीं हैं।
यह कथा हनुमान जी के विशेष विश्वास, समर्पण और सेवा भाव को दर्शाती है और इसे हनुमान चालीसा में प्रस्तुत किया गया है। हनुमान जी की इस ऋणहरण कांड के जरिए वे माता सी
ता के प्रति अपने प्रेम और निष्ठा का प्रदर्शन करते हैं।


हनुमान जी का ऋण कथा 

भगवान राम और माता सीता के संबंध में एक महत्वपूर्ण पौराणिक कथा है। यह कथा हनुमान चालीसा में प्रस्तुत किया गया है और भगवान हनुमान की भक्ति और सेवा का प्रतीक है।
कथा के अनुसार, जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान अयोध्या नगरी को त्यागकर चित्रकूट पर्वत पर रह रहे थे, तो हनुमान जी को भगवान राम की भक्ति में एक अथाह लालसा थी। उन्हे भगवान राम के दिव्य स्वरूप का दर्शन करने की ख़्वाहिश थी।
एक दिन, माता सीता ने हनुमान जी से उनके प्रभु राम के सम्मुख उनकी वयस्कता और संस्कार के कारण वे माता सीता के दर्शन के योग्य नहीं हैं, जबतक वे रावण द्वारा अपहरण होने के दुःख से मुक्त नहीं होते। इससे प्रेरित होकर, हनुमान जी ने आत्मसंयम बनाए रखकर यह व्रत स्वीकार किया और भगवान राम की सेवा के ऋण मुक्त होने तक उनके दर्शन के लिए प्रतीक्षा करने का संकल्प लिया।
ऋण कांड के अंत में, भगवान राम ने हनुमान जी की भक्ति और सेवा को ध्यान में रखते हुए उनके समीप आने और उन्हें आशीर्वाद देने का समय आया और उन्हें अपनी आँखों से दर्शन दिया। हनुमान जी का ऋण उस समय पूरा हुआ और उन्हें भगवान राम की कृपा मिली।
यह कथा हनुमान जी की भक्ति, समर्पण और सेवा की प्रशंसा करती है और भक्तों को उनके समीप आने के लिए आत्मसंयम और धैर्य की महत्वपूर्ण शिक्षा देती है। हनुमान जी की इस ऋणहरण कांड को समझकर उन्हें भगवान राम के चरणों में अपना जीवन समर्पित करने की प्रेरणा मिलती है।

 हनुमान जी के बारे में 15 रोचक तथ्य 

1. हनुमान जी के असली नाम "मारुति" था।
2. उनके पिता का नाम "केसरी" था और माता का नाम "अंजना" था।
3. हनुमान जी को "बजरंगबली" और "महावीर" भी कहा जाता है।
4. उनकी जन्म तिथि चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जिसे हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है।
5. हनुमान जी को संवत्सर और चतुर्युगी भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
6. हनुमान जी का अवधी में "सुंदरकांड" में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
7. उनके प्रभु राम के साथ संबंध बहुत गहरे थे और उन्हें श्री राम के निष्ठावान भक्त माना जाता है।
8. हनुमान जी अपने बलिदानी और वीरता के लिए प्रसिद्ध हैं।
9. उन्हें चीर हरण लीला में भी महत्वपूर्ण भूमिका मिली थी।
10. हनुमान जी के मंदिर विभिन्न भारतीय राज्यों में व्यापक रूप से प्रसिद्ध हैं, जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, और हिमाचल प्रदेश।
11. उन्हें मंगलवार का दिन बहुत शुभ माना जाता है और उनकी पूजा और व्रत करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
12. हनुमान जी के भगवान राम के चरणों में आने पर उन्हें आशीर्वाद मिलता है, और उनके कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं।
13. उनके वज्रायुध और भक्ति से भरे भाव उन्हें महाकाय (विशाल शरीर) और वज्रांगबली (वज्र की तरह शक्तिशाली) कहा जाता है।
14. उनके पूजन से बुराईयों का नाश होता है और भक्तों की रक्षा करते हुए वे मारुती नंदन और देवदूत (देवताओं के दूत) भी हैं।
15. हनुमान जी के भजन और कथाओं को सुनकर भक्ति भाव से भर जाते हैं और उनके चरणों में आने से संसार के सभी दुःख और संकट दूर हो जाते हैं।
ये थे कुछ हनुमान जी के रोचक तथ्य हिंदी में। हनुमान जी एक प्रिय भगवान हैं जिनके भक्ति और सेवा का अद्भुत महत्व है। उनके भजन गाने और उनकी कथाओं का सुनना भक्तों के लिए आत्मानंद का स्रोत बनता है।

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