शिव स्वरूप शिवमयसोमवार

 शिव स्वरूप शिवमयसोमवार 

शिव स्वरूप शिवमयसोमवार का अर्थ होता है
कि सोमवार (मंगलवार के बाद का पहला दिन) जो शिव के स्वरूप में होता है या शिव के संबंध में होता है। शिव पूजा और भक्ति के लिए सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है।शिवमयसोमवार का उल्लेख हिंदू धर्म में मिलता है, जहां भगवान शिव को सबसे प्रिय दिन माना जाता है। इस दिन शिव भक्ति करने और शिव मंदिर में पूजा आराधना करने का विशेष महत्व होता है। कई लोग सोमवार को शिव जी को अर्पित किए गए व्रत और पूजा के द्वारा मनाते हैं।शिवमयसोमवार पर शिव जी की पूजा, ध्यान, मंत्र जप और अर्चना की जाती है। इस दिन शिव जी के चालीसा, स्तोत्र और कथा का पाठ किया जाता है और भक्त उन्हें दूध, बेल पत्र, बिल्व पत्र, जल, धूप, दीप, फूल आदि से आराधना करते हैं। सोमवार को कांच के गंगाजल से शिवलिंग की स्नान कराना भी शिवमयसोमवार का एक महत्वपूर्ण अंग है।शिवमयसोमवार शिव भक्ति, शिव अनुभव, और आंतरिक सामर्थ्य को बढ़ाने का एक अच्छा अवसर होता है। यह दिन भक्तों को शिव जी के साथ अपना संबंध मजबूत करने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का एक विशेष अवसर प्रदान करता है।

भगवान शिव का रूप-स्वरूप जितना विचित्र है, उतना ही आकर्षक भी। शिव जो धारण करते हैं, उनके भी बड़े व्यापक अर्थ हैं :
  1. जटाएं -शिव की जटाएं अंतरिक्ष का प्रतीक हैं।
  2. चंद्र -चंद्रमा मन का प्रतीक है। शिव का मन चांद की तरह भोला, निर्मल, उज्ज्वल और जाग्रत है।
  3. त्रिनेत्र -शिव की तीन आंखें हैं। इसीलिए इन्हें त्रिलोचन भी कहते हैं। शिव की ये आंखें सत्व, रज, तम (तीन गुणों), भूत, वर्तमान, भविष्य (तीन कालों), स्वर्ग, मृत्यु पाताल (तीनों लोकों) का प्रतीक हैं।
  4. सर्पहार -सर्प जैसा हिंसक जीव शिव के अधीन है। सर्प तमोगुणी व संहारक जीव है, जिसे शिव ने अपने वश में कर रखा है।
  5. त्रिशूल -शिव के हाथ में एक मारक शस्त्र है। त्रिशूल भौतिक, दैविक, आध्यात्मिक इन तीनों तापों को नष्ट करता है।
  6. डमरू -शिव के एक हाथ में डमरू है, जिसे वह तांडव नृत्य करते समय बजाते हैं। डमरू का नाद ही ब्रह्मा रूप है।
  7. मुंडमाला -शिव के गले में मुंडमाला है, जो इस बात का प्रतीक है कि शिव ने मृत्यु को वश में किया हुआ है।
  8. छाल -शिव ने शरीर पर व्याघ्र चर्म यानी बाघ की खाल पहनी हुई है। व्याघ्र हिंसा और अहंकार का प्रतीक माना जाता है। इसका अर्थ है कि शिव ने हिंसा और अहंकार का दमन कर उसे अपने नीचे दबा लिया है।
  9. भस्म -शिव के शरीर पर भस्म लगी होती है। शिवलिंग का अभिषेक भी भस्म से किया जाता है। भस्म का लेप बताता है कि यह संसार नश्वर है।
  10. वृषभ -शिव का वाहन वृषभ यानी बैल है। वह हमेशा शिव के साथ रहता है। वृषभ धर्म का प्रतीक है। महादेव इस चार पैर वाले जानवर की सवारी करते हैं, जो बताता है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष उनकी कृपा से ही मिलते हैं।
इस तरह शिव-स्वरूप हमें बताता है कि उनका रूप विराट और अनंत है, महिमा अपरंपार है। उनमें ही सारी सृष्टि समाई हुई .

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