राम जी का बीज मंत्र क्या है?/ What is the seed mantra of Ram ji?

राम जी का बीज मंत्र क्या है?

राम जी का बीज मंत्र है "ॐ रामाय नमः" (Om Ramaya Namah)।
इस मंत्र को राम जी की उपासना और ध्यान के लिए प्रयोग किया जाता है। "ॐ" एक प्राणवाचक ब्रह्माक्षर है, जो परमात्मा का प्रतीक है। "रामाय" शब्द का ध्वनि रूप है, जिसे राम जी के नाम का जाप करते समय प्रयोग किया जाता है। "नमः" यह बीजाक्षर भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण का अनुभव कराता है, जिससे व्यक्ति भगवान के पास अपने मन और आत्मा को समर्पित करता है।यह मंत्र रामायण और विष्णु पुराण में विभिन्न कथाओं में उल्लेखित है और राम जी की उपासना में विशेष महत्व रखा जाता है। इस मंत्र का जाप करने से भक्ति, ध्यान, शांति, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति होती है। राम जी के इस बीज मंत्र के नियमित जाप से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति अध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है

राम जी का बीज मंत्र का अर्थ निम्नलिखित है:

ॐ रामाय नमः" (Om Ramaya Namah)
- "ॐ" एक प्राणवाचक ब्रह्माक्षर है, जो परमात्मा का प्रतीक है।
- "रां" एक विशेष बीजाक्षर है, जिसे राम जी के नाम का अभिवादन के रूप में उपयोग किया जाता है। यह बीजाक्षर भगवान राम के संबंध में उनके गुणों और दिव्यता को दर्शाता है।
- "रामाय" इसमें "राम" शब्द का ध्वनि रूप है जो भगवान राम के नाम का जाप करते समय प्रयोग किया जाता है।
- "नमः" यह बीजाक्षर भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण का अनुभव कराता है, जिससे व्यक्ति भगवान के पास अपने मन और आत्मा को समर्पित करता है।
यह मंत्र भगवान राम की उपासना और ध्यान के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके जाप से भक्ति, ध्यान, शांति, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति होती है। राम जी के इस बीज मंत्र का नियमित जाप करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और व्यक्ति अध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।

 मंत्र भगवान श्री राम को समर्पित है। इस मंत्र का अर्थ निम्नलिखित है:

"ॐ आपदामपहर्तारम् दातारं सर्वसम्पदाम्,
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयोभूयो नामाम्यहम्॥"

विशेषार्थ:

- "ॐ" एक प्राणवाचक ब्रह्माक्षर है, जो परमात्मा का प्रतीक है।
- "आपदामपहर्तारम्" भगवान राम को आपदाओं से रक्षा करने वाले व उन्हें नष्ट करने वाले समस्त कष्टों को हरने वाले के रूप में समर्थ बताता है।
- "दातारं सर्वसम्पदाम्" वे सम्पूर्ण संपदाओं के दाता हैं और धन, समृद्धि, सुख, शांति, धैर्य आदि सभी प्रकार की सम्पदा उनसे प्राप्त होती है।
- "लोकाभिरामं" वे सभी लोकों को प्रिय हैं और लोगों को आकर्षित करते हैं।
- "श्रीरामं" श्रीराम, जो श्री के साथ सम्पन्न हैं। श्री भगवान की पूजा और उपासना के लिए श्री राम नाम का प्रयोग किया जाता है।
- "भूयोभूयो नामाम्यहम्" ध्यान करते हुए मैं बार-बार भगवान राम के नाम का जाप करता हूँ।
यह मंत्र भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए जप किया जा सकता है।

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