हनुमान जी ने सूर्य को क्यों निगला /Why did Hanuman ji swallow the sun

हनुमान जी ने सूर्य को क्यों निगला

भगवान् शिव के अंश के संबंध में, हिंदू धर्म में हनुमान जी को मारुती या अंजनी पुत्र भी कहा जाता है, जिन्हें भगवान् पवनपुत्र भी कहते हैं। उन्हें भगवान शिव और भगवती पार्वती का वर दिया गया था, जिससे उन्हें अपार ऊर्जा और शक्ति मिली थी। हनुमान जी को असीमित बल, दृढ़ भक्ति, और दैवीय शक्तियों का प्रतीक माना जाता है, जो उन्हें सूर्य के व्यास वाले विकराल रूप में सूर्य को खाने की शक्ति देते हैं।
हनुमान जी की कथाएं और उनके महान बल के विषय में अनेक पुराण और ग्रंथ हैं, जो हिंदू धर्म के भक्तों के बीच प्रचलित हैं। उनकी पूजा और उपासना समाज में विशेष महत्व रखती है।
सुमेरु नाम के स्वर्ण पर्वत पर वानरराज केसरी राज्य करते थे। माता अंजनी और केसरी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से शिव उपासना की तथा भगवान शंकर की आज्ञा अनुसार पवनदेव ने शिव प्रसाद के रूप में माता अंजना के गर्भ में हनुमान जी की स्थापना की। हनुमान जी रुद्रावतार थे। जब उन्होंने जन्म लिया तब प्रभात का उगता हुआ सूर्यबिम्ब दर्शित हो रहा था। उन्होंने उगते हुए सूर्य को देखा मानो वो जैसे कोई बूंदी लड्डू का लड्डू यां मीठा फल जान पड़ता हो और उसे पकड़ने के लिए छलांग लगा दी।
जुग सहस्त्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
अर्थात जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है कि उस पर पहुंचने के लिए हजारों युग लगते हैं। उस हजारों योजन दूरी पर स्थित सूर्य को हनुमान जी ने एक मीठा फल (बूंदी का लड्डू) समझकर निगल लिया था। कुछ कवियों और लेखकों ने इस विषय पर अनेक रुपक लिखे हैं।
कुछ लेखकों का कहना है की: फल सोचकर ही सहज स्वभाव के अनुसार हनुमान जी कुदे थे।
कवि भारवि द्वारा संस्कृत में रचित महाकाव्य किरातार्जुनीयम् अनुसार ये छंद कुछ यही प्रमाणित करते है।

"किमपेक्ष्य फलं परोधरान् ध्वनत: प्रार्थयते मृगाधिप:। प्रति: खलु सा महियसां सहते नान्यसमुन्नतिं यया।।"

अर्थात बादलों की गड़़गडाहट सुनकर सिंह गुफा के बाहर आता है और ऊपर देखता है कि उससे बड़ा कौन है? बडे लोग जन्म से ही शौर्यवान और कतृ‍र्त्ववान होते हैं। हनुमान जी ने इसलिए ही सूर्यबिम्ब देखते ही छलांग मारी दी थी।
सूर्यग्रास का आध्यात्मिक रहस्य: इस विषय से संबंधित पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान के छलांग मारते ही सूर्य को बचाने के लिए इंद्रदेव ने हनुमान पर वज्रप्रहार किया, जिसके फलस्वरुप हनुमान जी मुर्छित हो गए। अपने सुत को मूर्छित देख पवनदेव को क्रोध आ जाता है। जीवन अन्न और जल के बिना तो फिर भी कुछ दिन चल सकता है परन्तु प्राण वायु बिना कैसे चल सकता है। पवन देव ने क्रोध में आकार संसार से प्राण वायु ही विलुप्त कर दी थी तदुपरांत इंद्र देव ने वायु देव को मनाया और हनुमान जी को शक्ति प्रदान की गई। सूर्य ने अपने अंश का तेज हनुमान जी को प्रदान किया जिससे वे प्रखर बुद्धिमान हुए यम, वरुण इत्यादि प्रत्येक देवता ने कुछ न कुछ दिया। इस प्रकार सबके पास दिव्य बातें लेकर शक्ति संपन्न और बुद्धि संपन्न हो जाने वाली विभूति कहलाए हनुमान जी

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