मां दुर्गा के सप्तम रूपों में से एक है देवी कालरात्रि के बारे / About Goddess Kalratri, one of the seventh forms of Maa Durga

मां दुर्गा के सप्तम रूपों में से एक है देवी कालरात्रि के बारे 

सातवी देवी कालरात्रि, भारतीय हिंदू धर्म में मां दुर्गा के सप्तम रूपों में से एक है। इसका उपासना नवरात्रि के सातवें दिन, यानी दुर्गाष्टमी के नवरात्रि महोत्सव के आठवें दिन मनाया जाता है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा विशेष भक्ति भाव से की जाती है।
देवी कालरात्रि का नाम उनके भयंकर और अंबरीक रंग के रूप के कारण पड़ा है। इनके हाथ में कटारी होती है और वे भक्तों की रक्षा करती हैं। मां कालरात्रि के उपासकों को भयभीत नहीं होना चाहिए, क्योंकि वे सच्ची भक्ति और श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं, उन्हें सभी भयानक स्थितियों से बचा लेती हैं।
कालरात्रि के उपासना में विशेष रूप से घी का दीप जलाना, रंग-रंगी मल्लिका, कपूर और धूप चढ़ाना आदि रस्में की जाती है। मां कालरात्रि के दर्शन से भक्तों के भय और दुःख दूर होते हैं और उन्हें सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है।नवरात्रि के इस दौरान मां दुर्गा के सात रूपों की पूजा का महत्व बहुत अधिक होता है और लाखों भक्त उनकी आराधना और भजन-कीर्तन के माध्यम से उन्हें श्रद्धा भाव से याद करते हैं।




सातवी देवी कालरात्रि कथा,

 मां दुर्गा के सातवे रूप के बारे में एक महत्वपूर्ण कथा है। यह कथा नवरात्रि के दुर्गाष्टमी दिन भक्तों द्वारा पढ़ी जाती है और उन्हें मां कालरात्रि की आराधना के महत्व को समझने में मदद करती है। निम्नलिखित है सातवी देवी कालरात्रि कथा का संक्षेपित रूप:
एक समय की बात है, एक सुशील राजा राज्य में शांति और समृद्धि के साथ शासन कर रहा था। उनकी रानी का नाम चंद्रावती था, जो एक धर्मनिष्ठ और सामर्थ्यशाली रानी थी। राजा-रानी की यशस्वी राजसत्ता का जग में ख्याति थी।एक दिन राजमहल में एक ऋषि आये, जिनका नाम कालिन्दी था। वह ऋषि भविष्यदृष्टि रहस्यों में प्रवीण थे और उन्होंने राजकुमारी चंद्रावती को उसके भविष्य के बारे में बताया। ऋषि ने कहा कि चंद्रावती के गर्भ से एक बहुत शक्तिशाली बालिका का जन्म होगा, जो समस्त दुष्ट शक्तियों का संहार करेगी और भक्तों को सुरक्षा प्रदान करेगी।
श्रद्धा और आश्वासन से भरी हुई रानी ने उस बालिका को पालकर उसका नाम कालरात्रि रखा। कालरात्रि बहुत ही सुंदर और प्रभावशाली थीं, जो बचपन से ही शस्त्रों का निपुण उपयोग करना सीख रही थीं।
एक दिन, राजमहल में एक दुष्ट राक्षस घुस आया, जिसका नाम रक्तबीज था। वह राजमहल को विनाश के रास्ते में आने की कोशिश कर रहा था। कालरात्रि ने उस राक्षस के साथ युद्ध किया और उसे समाप्त कर दिया।
इसके बाद, एक और दुष्ट राक्षस रक्तवीज के साथ आया, जो अपनी शक्ति के कारण अभिमानी था। उसने कालरात्रि के सामने चुनौती दी, परन्तु कालरात्रि ने उसे भी परास्त कर दिया।
कालरात्रि के वीरगति के बाद, धरती पर सम्पूर्ण शांति और शुभकामनाएं आईं और राजमहल की सर्वश्रेष्ठ स्थिति स्थापित हुई। चंद्रावती और राजा अपनी अनन्त भक्ति और श्रद्धा से कालरात्रि का पूजन करते रहे और उनके आशीर्वाद से उन्हें सफलता और समृद्धि प्राप्त हुई।
यही है सातवी देवी कालरात्रि कथा, जो मां कालरात्रि के भक्तों के बीच प्रसिद्ध है और उन्हें शक्ति और उत्साह देती है। इस कथा को सुनकर भक्त उनके शक्तिशाली रूप की महिमा का आनंद लेते हैं और उन्हें उनकी आराधना में और भक्ति भाव भरने के लिए प्रेरित करते हैं।

 देवी कालरात्रि के 10 महत्वपूर्ण तथ्य

1. सातवी देवी कालरात्रि दुर्गा के सात रूपों में से एक है, जिन्हें नवरात्रि में भक्तों द्वारा पूजा जाता है। उन्हें अंबे, भवानी, दुर्गा, जगदंबा, शकंभरी, अम्बिका, चंद्रकांता भी कहा जाता है।
2. मां कालरात्रि का नाम भयानक रंग के रूप के कारण पड़ा है, जो अंबरीक रंग का होता है। उनके हाथ में खट्वांजी होती है, जिससे भक्तों की रक्षा की जाती है।
3. भगवान शिव के शंकर रूप की भवानी वा उमा से उत्पन्न हुईं थीं, जिन्होंने दुष्ट राक्षस रक्तबीज का वध किया था।
4. कालरात्रि देवी का ध्यान मनुष्य को अहंकार, काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंबुध्यादि दुर्भावनाओं से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।
5. मां कालरात्रि का वाहन सिंह होता है, जो दुर्गा माता के वाहन के रूप में भी जाना जाता है।
6. उनका विशेष मंत्र है, "ओं देवी कालरात्र्यै नमः" जो उनके उपासना में जपा जाता है।
7. सातवी देवी कालरात्रि को मृत्यु के भयंकर रूप में भी जाना जाता है, और उनकी पूजा से भक्तों के जीवन से सभी नकारात्मकता और अंधकार दूर होते हैं।
8. मां कालरात्रि के पूजा दिन भक्त उन्हें शंख, घंटी, खट्वांजी, ताल, डमरू, छड़ी आदि से प्रसाद में देते हैं।
9. कालरात्रि की पूजा और अर्चना से भक्तों को शक्ति, तेजस्वी और वीरता मिलती है, जो उन्हें सभी दुःखों से बचाने में मदद करता है।
10. वेद, पुराण और तंत्र में सातवी देवी कालरात्रि की महिमा का वर्णन किया गया है और उन्हें भक्तों के द्वारा भक्ति और समर्पण के साथ पूजा जाता है।

देवी कालरात्रि का मंत्र है - 

"ओं देवी कालरात्र्यै नमः"।

इस मंत्र का अर्थ है:

- "ओं" एक प्राणवायुः बीजमंत्र है, जो समस्त शक्तियों को सम्मिलित करता है। यह शक्ति और उत्तेजना का प्रतीक है।
- "देवी" शब्द का अर्थ है दिव्य, दिव्यता, शक्तिशाली और परमात्मा की आराध्या।
- "कालरात्र्यै" शब्द का अर्थ है कालरात्रि को सलामी देने के लिए। यह मंत्र मां कालरात्रि की प्रशंसा करता है।
- "नमः" शब्द भक्ति और समर्पण का प्रतीक है, जिससे भक्त दिव्य शक्तियों की आराधना और समर्पण करता है।
इस प्रकार, "ओं देवी कालरात्र्यै नमः" मंत्र के जाप से भक्त मां कालरात्रि की आराधना करता है और उन्हें अनंत शक्ति, तेजस्वीता, साहस और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करता है। यह मंत्र भक्तों को सभी बुराईयों से बचाने और उन्हें सुरक्षित रखने में सहायक होता है।

 देवी कालरात्रि की आराधना के अनेक लाभ

1. रक्षा और सुरक्षा: मां कालरात्रि की कृपा से भक्तों को भय, भीति, दुश्मनों और बुराईयों से बचाने की शक्ति मिलती है। उनकी आराधना से भक्त को सुरक्षित महसूस करने में मदद मिलती है।
2. शक्ति और साहस: मां कालरात्रि की आराधना से भक्त को शक्ति, साहस, और उत्साह की प्राप्ति होती है। वे अधिक सक्रिय बनते हैं और अपने जीवन में सभी कठिनाइयों का सामना करने के लिए तैयार होते हैं।
3. उत्पत्ति का समर्थन: मां कालरात्रि के आशीर्वाद से भक्तों को संतान सुख का लाभ होता है। उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है और पुत्र-पुत्री के प्रति आनंद मिलता है।
4. समृद्धि: मां कालरात्रि के उपासना से भक्त को समृद्धि और वित्तीय सम्पत्ति की प्राप्ति होती है। उनके जीवन में आर्थिक सुख आता है और व्यापार और कारोबार में उन्हें सफलता मिलती है।
5. दुखों से मुक्ति: मां कालरात्रि की आराधना से भक्तों को मानसिक और शारीरिक दुखों से मुक्ति मिलती है। उन्हें स्वस्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
6. दुर्भावनाओं का संहार: भक्त मां कालरात्रि की आराधना करके अपने दिल में स्नेह, दया, धैर्य, और शांति के गुण विकसित करते हैं, जो उन्हें दुर्भावनाओं को संहार करने में मदद करते हैं।
7. मोक्ष की प्राप्ति: मां कालरात्रि की पूजा से भक्त भवसागर से पार कर मोक्ष की प्राप्ति की ओर अग्रसर होते हैं।
ये थे सातवी देवी कालरात्रि के आराधना के कुछ महत्वपूर्ण लाभ, जिन्हें भक्तों को इस माँ की कृपा से प्राप्त होते हैं। यह आराधना शक्ति, समृद्धि, सुख, और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होती है।

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