चामुंडेश्वरी मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन / History of Chamundeshwari Temple is very ancient

चामुंडेश्वरी मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन

मैसूर, कर्नाटक में स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन है। यह मंदिर मैसूर सिटी से लगभग 13 किलोमीटर दूर चामुंडी पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर महाराष्ट्र वंश के राजा वडायर द्वारा निर्मित किया गया था।
इस मंदिर का निर्माण महाराजा चामराजेंद्र वडायर ने 1827 ईसा पूर्व में करवाया था। महाराजा चामराजेंद्र वडायर ने मंदिर का निर्माण चामुंडी पहाड़ी के शिखर पर श्री चामुंडेश्वरी माता के पूजा-अर्चना के लिए किया था। इससे पहले, यह मंदिर एक छोटे स्तर पर था, लेकिन बाद में महाराजा ने इसे बढ़ावा देने के लिए सुधार किए और इसे विस्तृत बनवाया गया।मंदिर में माता चामुंडेश्वरी के प्रतीक विराजमान हैं और इसे भक्ति और पूजा के लिए समर्पित किया गया है। इसके अलावा, मंदिर में अनेक अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं, जो भक्तों द्वारा पूजी जाती हैं।
चामुंडेश्वरी मंदिर के निकटवर्ती क्षेत्र में बहुत सारी प्राकृतिक सुंदरता है, और इसे अपनी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी प्रसिद्ध किया जाता है।मंदिर में सालाना महोत्सवों और त्योहारों का आयोजन किया जाता है, जो भक्तों और पर्यटकों को खींचते हैं। इन अवसरों पर, लोग धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ मंदिर के दर्शन करने आते हैं और अपनी भक्ति भाव से माता चामुंडेश्वरी की पूजा करते हैं।चामुंडेश्वरी मंदिर, मैसूर, कर्नाटक धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोन से एक महत्वपूर्ण स्थल है जो स्थानीय लोगों के लिए आदर्श धार्मिक स्थल है और पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।

चामुंडेश्वरी मंदिर के पीछे एक महत्वपूर्ण कथा है, 

जो हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लेखित है। इस कथा के अनुसार, माता चामुंडेश्वरी देवी की विजय कथा है, जिसका मुख्य कथायी भाग निम्नलिखित है:किसी समय की बात है, दुर्गा देवी के रूप में पूजी जाने वाली माता चामुंडेश्वरी के लिए एक शक्तिशाली राक्षस नाम हिरण्याक्ष उसे हरने के लिए निश्चित संकल्प करता है। हिरण्याक्ष अधर्मी और अत्याचारी था, और उसका लक्ष्य था धरती का शासक बनना और स्वर्ग में भगवान विष्णु को भी परास्त करना। उसने स्वर्ग के राजा इंद्र को भी विजयी बना दिया और देवता जयकारों में भी मग्न हो गया।
दुर्गा माता ने देखा कि हिरण्याक्ष ने धरती को अधर्म से भर दिया है और लोगों को अत्याचार सहन करना पड़ रहा है। इसके कारण माता ने अपनी शक्ति का उपयोग करके उसे धरती से सम्हार निकालने का संकल्प किया।
माता चामुंडेश्वरी ने शक्ति का एक विशेष रूप धारण किया और हिरण्याक्ष के सामने प्रकट हो गई। वह उसे विभीषिका के समीप ले गई और उसके सामने आग्नेयी दिव्य स्वरूप अपना भयंकर रूप प्रकट किया।
भयंकर रूप में चामुंडेश्वरी ने खड़ा होकर हिरण्याक्ष के सामने लड़ाई शुरू कर दी। दोनों में भयानक युद्ध हुआ, जिसमें चामुंडेश्वरी ने अपनी अद्भुत शक्ति दिखाई और हिरण्याक्ष को परास्त कर दिया। धरती की सुरक्षा के लिए इस विजयी लड़ाई में माता चामुंडेश्वरी ने हिरण्याक्ष को वध कर दिया।
इस विजयी लड़ाई के बाद, देवी चामुंडेश्वरी की पूजा विशेष रूप से करी गई, और उन्हें चामुंडेश्वरी देवी या माता चामुंडेश्वरी के नाम से पूजा जाने लगा। माता चामुंडेश्वरी की कथा उनके महान शक्तिशाली रूप और धर्म की रक्षा के लिए भक्तों के मन में भावना भर देती है। इसलिए चामुंडेश्वरी मंदिर में उन्हें भक्ति भाव से पूजा जाता है।

चामुंडेश्वरी मंदिर की पूजा विधि निम्नलिखित रूप से 

चामुंडेश्वरी मंदिर की पूजा विधि हिंदू धर्म के अनुसार निम्नलिखित रूप से की जाती है। पूजा की विधि भक्त के साधना और अनुभव के आधार पर थोड़ी भिन्नता भी हो सकती है, लेकिन निम्नलिखित आम विधि का पालन किया जा सकता है:
1. शुभ मुहूर्त चयन: पूजा का अच्छा मुहूर्त चुनें। यह अमावस्या, पूर्णिमा, नवरात्रि, दुर्गाष्टमी, नवमी, एवं दिवाली जैसे पर्व अवसरों पर विशेष रूप से की जा सकती है।
2. स्नान: पूजा के लिए शुरू करने से पहले स्नान करें और पवित्र हों।
3. पूजा स्थल: पूजा के लिए एक पवित्र और शांत स्थान चुनें।
4. पूजा सामग्री: माता चामुंडेश्वरी के पूजा के लिए आप शस्त्रों, फूलों, अगरबत्ती, दीप, धूप, सुगंधित धूप धरोहर, पंचामृत (दूध, दही, घी, मधु, शहद), फल, मिश्री, नारियल, कलश, सिंदूर, रोली, चावल, सफेद वस्त्र आदि का उपयोग कर सकते हैं।
5. पूजा अर्चना: माता चामुंडेश्वरी को मन, वचन, और कर्म से समर्पित करते हुए पूजा अर्चना करें। मंत्रों का जाप करें और ध्यान में रहकर माँ को भक्ति भाव से पूजें।
6. आरती: अखंड दिये के सामने आरती करें।
7. प्रसाद: आरती के बाद पूजा सामग्री से तैयार किया हुआ प्रसाद बनाएं और उसे माँ को समर्पित करें।
यह पूजा की सामान्य विधि है, लेकिन ध्यान दें कि आपके स्थानीय आदर्शों और परंपराओं के अनुसार पूजा में थोड़े बदलाव हो सकते हैं। पूजा करते समय माँ को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धा भाव से करें।

चामुंडेश्वरी मंदिर,के बारे में कुछ रोचक तथ्य 

चामुंडेश्वरी मंदिर, मैसूर, कर्नाटक एक प्रमुख धार्मिक स्थल है और इसके बारे में कुछ रोचक तथ्य निम्नलिखित हैं:
1. प्राचीनता: चामुंडेश्वरी मंदिर का निर्माण विजयनगर वंश के शासकों के समय में हुआ था और इसलिए इसकी प्राचीनता करीब 300 से 400 वर्ष पुरानी होती है।
2. पर्वतीय स्थान: मंदिर चामुंडी पहाड़ी पर स्थित है, जो मैसूर सिटी से लगभग 13 किलोमीटर दूर है। पहाड़ी के शिखर से आप मैसूर नगरी का एक सुंदर नजारा देख सकते हैं।
3. माँ चामुंडेश्वरी: मंदिर में माँ चामुंडेश्वरी के एक विशेष रूप की प्रतिमा है, जिसे भक्ति भाव से पूजा जाता है। वे माता दुर्गा के रूप में भी पूजी जाती हैं।
4. दुर्गा पूजा: नवरात्रि के समय मंदिर में भव्य रूप से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
5. गणेश धाम: मंदिर के समीप एक और मंदिर है जो भगवान गणेश को समर्पित है। भगवान गणेश की मूर्ति को भी भक्ति भाव से पूजा जाता है।
6. रथ यात्रा: विशेष धार्मिक अवसरों पर, जैसे नवरात्रि और दशहरा, मंदिर में रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है।
7. प्राकृतिक सौंदर्य: मंदिर के निकटवर्ती क्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्य विशेष रूप से नजर आता है। वहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहां के प्राकृतिक चार्मधारी वन्यजीवन का आनंद लेते हैं।
8. पर्वतारोहण: धार्मिक भक्तों के लिए चामुंडी पहाड़ी की ऊँचाइयों को पर्वतारोहण करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य है। माँ चामुंडेश्वरी के दर्शन के लिए यात्री यहां तीर्थ यात्रा पर आते हैं।
ये थे कुछ रोचक तथ्य चामुंडेश्वरी मंदिर, मैसूर, कर्नाटक के बारे में। यह मंदिर धार्मिक, ऐतिहासिक, और प्राकृतिक दृष्टिकोन से एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो श्रद्धालु और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

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