संतोषी मां व्रत कैसे करें /How to fast Santoshi Maa

संतोषी मां व्रत कैसे करें

"संतोषी मां" एक प्रसिद्ध हिन्दू देवी है जिन्हें व्रत के तहत पूजा जाता है। संतोषी मां के व्रत को संतोषी अष्टमी या संतोषी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाएं करती हैं और इसका उद्देश्य देवी संतोषी मां से आशीर्वाद प्राप्त करना होता है जो समृद्धि, खुशियाँ और समृद्धि की प्रतीक मानी जाती है।
संतोषी मां के व्रत को निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है:
1. **व्रत की तैयारी:** संतोषी मां के व्रत की तैयारी व्रत की शुरुआत से ही शुरू करें। व्रत के दिन के पूर्व रात्रि को नियमित ध्यान और पूजा के साथ शुरू करें।
2. **नियमित पूजा और आराधना:** संतोषी मां की पूजा के लिए एक विशेष पूजा स्थल तैयार करें। व्रत के दिन विशेष ध्यान और पूजा करें, जिसमें आरती, भजन और मंत्रों का उच्चारण शामिल हो।
3. **नियमित उपासना:** संतोषी मां के व्रत के दौरान, आपको नियमित उपासना करनी चाहिए, जैसे कि मन्त्र जप और ध्यान।
4. **नियमित व्रती भोजन:** व्रत के दिन में सिर्फ फल, सबुदाना, दूध, नींबू पानी, कटहल आदि खाएं और अन्य अन्न-विकल्प खाने से बचें। अन्न और नमक का सेवन नहीं करें।
5. **नियमित दान:** व्रत के दिन दान करने का आदान-प्रदान करें, जैसे कि गरीबों को खाने-पीने का सामान देना या दान देना।
6. **व्रत के बाद की पूजा और आरती:** व्रत के अंत में देवी संतोषी मां की पूजा और आरती करें और उन्हें प्रसाद के रूप में प्रस्तुत करें।
7. **मां की कथा सुनना:** संतोषी मां के व्रत के दिन, मां की कथा सुनने से आपका आशीर्वाद बढ़ सकता है।
संतोषी मां के व्रत को विधिवत रूप से करने से आपको आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है और आपकी आत्मा को शांति और सुख प्राप्त हो सकता है। कृपया ध्यान दें कि यह व्रत आपकी आस्था और धार्मिक विश्वासों पर निर्भर करता है, इसलिए आपको अपने गुरु या पूजा प्राधिकृत व्यक्तियों से सलाह लेनी चाहिए।

संतोषी मां के व्रत की तैयारी 

आपकी आस्था, श्रद्धा और संकल्प के साथ शुरू होती है। यहां कुछ कदम दिए गए हैं जो आपकी व्रत की तैयारी में मदद कर सकते हैं:
1. **आस्था और संकल्प:** व्रत की तैयारी व्रती की आस्था और संकल्प से शुरू होती है। मानसिक तैयारी में अपने मन को शुद्ध और सकारात्मक बनाने का प्रयास करें और आपके व्रत के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से समझें।
2. **पूजा सामग्री:** संतोषी मां की पूजा के लिए आपको विशेष पूजा सामग्री की तैयारी करनी होगी, जैसे कि मूर्ति, फूल, दीपक, आरती की थाली, सिन्दूर, चावल, सुपारी, कोइला, कुमकुम आदि।
3. **व्रती भोजन की तैयारी:** व्रत के दिन आपको व्रती भोजन की तैयारी करनी होगी जैसे कि सिंघाड़ा आता, साबूदाना, अनार, खजूर, नींबू पानी, दूध, कटहल, आदि।
4. **पूजा स्थल की तैयारी:** स्पेशल पूजा स्थल की तैयारी करें जहां आप पूजा करेंगे। यह स्थल पवित्रता और शांति का स्थान होना चाहिए।
5. **पूजा के प्रसाद की तैयारी:** पूजा के बाद देवी के बलि चढ़ाने के लिए प्रसाद तैयार करें। यह प्रसाद फल, मिष्ठान, चावल, कद्दू की सब्जी आदि हो सकता है।
6. **मंत्रों की तैयारी:** संतोषी मां की पूजा के दौरान विशेष मंत्रों का जाप करना महत्वपूर्ण होता है। आप इन मंत्रों का जाप करने की तैयारी कर सकते हैं।
7. **पूजा की विधि समझना:** व्रत के दिन पूजा की विधि को समझें और उसके अनुसार क्रियाएं करें।
8. **कथा और आरती:** संतोषी मां के व्रत के दिन उनकी कथा और आरती का पाठ करें। इससे आपके व्रत का महत्व बढ़ सकता है।
9. **ध्यान और स्थिरता:** व्रत के दिन आपको अपने मन को स्थिर और ध्यानित रखने की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ध्यान और स्थिरता को बनाए रखें।
व्रत की तैयारी आसानी से हो सकती है जब आपकी आस्था और उत्साह होता है। आपके व्रत की सफलता के लिए धैर्य और निष्ठा से काम करें।

संतोषी मां को व्रती भोजन को सावधानीपूर्वक तैयार करना 

 व्रती भोजन को सावधानीपूर्वक तैयार करना और उसमें नियमितता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। व्रती भोजन में आपको अनुशासन और सावधानी बरतनी चाहिए, जिससे आपके व्रत का महत्व बढ़ सके। यहां कुछ आहार आदिकारी दिए गए हैं जिन्हें व्रती भोजन में शामिल किया जा सकता है:
1. **सिंघाड़ा आटा:** सिंघाड़े का आटा व्रती भोजन के लिए महत्वपूर्ण होता है। इससे पूरी, खिचड़ी, पूरी आदि तैयार की जा सकती है।
2. **साबूदाना:** साबूदाना व्रती आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इससे खिचड़ी, खिचड़ी के बड़े, पापड़ी, आदि तैयार की जा सकती है।
3. **फल:** व्रत के दिन फल खाने से फायदा होता है। केला, अनार, अमरूद, सीताफल, आदि खाने में शामिल किए जा सकते हैं।
4. **अखरोट और मूंगफली:** ये व्रती आहार के रूप में सेवन किए जा सकते हैं, लेकिन इसका मात्रा में सेवन करें।
5. **दूध और दूध के उत्पाद:** दूध, दही, मक्खन, पनीर आदि को व्रती भोजन में शामिल कर सकते हैं।
6. **खजूर और किशमिश:** ये मिठास के रूप में सेवन किए जा सकते हैं और आपके व्रती भोजन को स्वादिष्ट बना सकते हैं।
7. **नींबू पानी:** व्रत के दिन नींबू पानी पीने से शरीर को आराम मिलता है और आपकी पेट की समस्याओं से बचाव होता है।
8. **कटहल:** व्रती भोजन में कटहल का सेवन किया जा सकता है, जो विभिन्न प्रकार की सब्जियों और मिठास में तैयार किया जा सकता है।
9. **तेल और मसाले:** अधिकांश व्रती आहार में तेल और मसाले का उपयोग नहीं किया जाता है, लेकिन आप नियमित आमदनीवित की जगह तेल का सेवन कर सकते हैं।
व्रती भोजन में उपरोक्त आहार विकल्पों को शामिल करने से आपके व्रत का अनुष्ठान आसान हो सकता है और आपको आवश्यक पोषण प्राप्त हो सकता है। कृपया ध्यान दें कि आपके व्रत के दिन में सख्तता से व्रती भोजन का पालन करना चाहिए और नियमितता बनाए रखनी चाहिए।

संतोषी मां के व्रत के दौरान नियमित दान देना एक महत्वपूर्ण प्रथा है।

 दान देने से आपके व्रत का महत्व और आपकी आस्था में वृद्धि हो सकती है। यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप व्रत के दिन नियमित दान दे सकते हैं:
1. **अन्नदान:** आप गरीबों या जरूरतमंदों को खाने के लिए अन्न दान कर सकते हैं।
2. **वस्त्र दान:** पुराने वस्त्रों को गरीबों को देने से आपके व्रत का महत्व और आस्था में वृद्धि हो सकती है।
3. **धन दान:** आप विभिन्न धर्मिक संगठनों को या आपके अरूपित दोस्तों या जरूरतमंदों को धन दान कर सकते हैं।
4. **शिक्षा दान:** आप गरीब बच्चों के शिक्षा की व्यवस्था करने वाले संगठनों को या उन बच्चों को या छात्रों को धन देने में मदद कर सकते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
5. **आयुर्वेदिक दान:** आप चिकित्सा संगठनों को या विभिन्न बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक दवाइयों की मदद के लिए धन देने में मदद कर सकते हैं।
6. **आश्रम या मंदिर में दान:** संतोषी मां के व्रत के दिन आप आश्रम, मंदिर या धार्मिक स्थलों में दान करने की प्रथा बना सकते हैं।
नियमित दान देने से आपके व्रत के महत्व में वृद्धि हो सकती है और आपके आस्था और धार्मिक विचारधारा को मजबूती मिल सकती है। ध्यान दें कि दान करने से पहले आपको आपकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के अनुसार सोचना चाहिए और सजग रहना चाहिए कि आपका दान सही स्थान पर पहुंचे।

संतोषी मां के व्रत के बाद की पूजा और आरती,

 व्रत के पूरे होने के बाद देवी संतोषी मां के समर्पित होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक उच्चारण रूप होता है। यह आपके व्रत के परिणाम को मिलने में मदद कर सकता है और आपकी आस्था को स्थायित कर सकता है। यहां एक साधारण प्रक्रिया दी गई है जिससे आप व्रत के बाद की पूजा और आरती कर सकते हैं:
1. **पूजा स्थल की तैयारी:** व्रत के पूरे होने के बाद, एक पूजा स्थल तैयार करें जहां आप पूजा करेंगे। इसमें आपको मूर्ति या पिताम्बर के सामने पूजा सामग्री जैसे कि दीपक, फूल, धूप, अगरबत्ती, पूजा की थाली आदि की तैयारी करनी होगी।
2. **पूजा विधि की समझी:** आपको पूजा विधि को समझने की आवश्यकता होगी जिसमें मंत्रों का उच्चारण, अष्टोत्तर शतनाम, आरती, आदि शामिल हो सकता है।
3. **पूजा आरंभ करें:** पूजा स्थल पर बैठकर, ध्यान और शांति के साथ पूजा आरंभ करें। आप मात्रों का जाप कर सकते हैं और उन्हें अर्पण कर सकते हैं।
4. **आरती:** पूजा के बाद आप आरती कर सकते हैं। आरती के दौरान आप दीपक की आरती उत्तार सकते हैं और आरती गान सकते हैं।
5. **प्रसाद अर्पण:** आप पूजा के परिणामस्वरूप बनाए गए प्रसाद को देवी की उपासना में अर्पण कर सकते हैं।
6. **आशीर्वाद प्राप्त करें:** आप पूजा के बाद देवी संतोषी मां से आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और उनके आशीर्वाद के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।
संतोषी मां के व्रत के बाद की पूजा और आरती आपके व्रत के पूरे होने का संकेत होता है और आपके आत्मा को शांति और सुख प्राप्त हो सकता है। यह पूजा और आरती का समय व्रत की विशेषताओं और आपके धार्मिक आदर्शों के अनुसार अनुकूलित कर सकते हैं।

संतोषी मां की कथा सुनना एक प्रसिद्ध प्रक्रिया है

 जिससे आप उनके विशेष महत्व और आशीर्वाद को समझ सकते हैं। कथा के द्वारा आपको उनके जीवन और कार्यों के बारे में जानकारी मिलती है और आपकी आस्था को मजबूती मिलती है। यहां एक सामान्य प्रक्रिया दी गई है जिससे आप संतोषी मां की कथा सुन सकते हैं:
1. **तैयारी करें:** संतोषी मां की कथा सुनने से पहले आपको मानसिक तैयारी करनी चाहिए। आप ध्यान और शांति में रहने का प्रयास करें और अपने मन को खाली करने का प्रयास करें।
2. **पूजा स्थल का तैयारी:** आप एक पूजा स्थल तैयार कर सकते हैं जहां आप कथा सुनेंगे। इसमें आपको मूर्ति, दीपक, धूप, अगरबत्ती, पूजा की थाली आदि की तैयारी करनी होगी।
3. **कथा का पाठ:** आप आपके धार्मिक ग्रंथों से संतोषी मां की कथा का पाठ कर सकते हैं। यह कथा आपके ग्रंथों में उपलब्ध हो सकती है या आपके पुजारी या आदर्श पर्याय के पास से भी प्राप्त की जा सकती है।
4. **कथा का अनुचरण:** आप कथा का अनुचरण कर सकते हैं जिससे आपको उसकी महत्वपूर्ण घटनाओं और संदेशों की जानकारी मिल सके।
5. **विवादों की टालना:** आपको कथा सुनते समय विवादों को टालने का प्रयास करना चाहिए और उसकी उपयुक्तता और संदेशों को समझने का प्रयास करना चाहिए।
6. **स्मरण करना:** कथा सुनते समय आपको संतोषी
 मां के आदर्शों और कार्यों को स्मरण करने का प्रयास करना चाहिए ताकि आपकी आस्था में वृद्धि हो सके।
7. **पूजा और प्रार्थना:** कथा के पाठ के बाद, आप देवी संतोषी मां की पूजा और प्रार्थना कर सकते हैं। आप उनके सामने आरती उत्तार सकते हैं और आपकी प्रार्थना के लिए ध्यान और शांति में बैठ सकते हैं।
संतोषी मां की कथा सुनकर आप उनके शिक्षाओं, कार्यों और महत्व को समझ सकते हैं और आपकी आस्था को स्थायित कर सकते हैं। यह एक ध्यानयोग का रूप होता है जिससे आप आत्मा की शांति प्राप्त कर सकते हैं और आपके धार्मिक संग्रहण को बढ़ावा मिल सकता है।

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