bhagavan vishvakarma jayanti ki hardik shubhkamnayen /Best wishes to Lord Vishwakarma on his birth anniversary.

भगवान विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।


भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे प्रथम इंजीनियर और वास्तुकार कहा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस समस्त ब्रह्मांड की रचना भी विश्वकर्मा जी के हाथों से हुई है। ऋग्वेद के १० वें अध्याय के १२१ वें सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती, आकाश और जल की रचना की गई है।


विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की।

*भगवान विश्वकर्मा* परमपिता ब्रह्मा ने यदि सृष्टि की रचना की है तो उसे आकार आदि शिल्प भगवान विश्वकर्मा ने दिया है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार, सप्तपुरियों का निर्माण, देवताओं के अस्त्र-शस्त्र, आभूषण और महलों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया है। ऋग्वेद में उनके स्वरूप, निर्माणकार्यों का पूर्ण वर्णन किया गया है।

*भगवान विश्वकर्मा के स्वरूप* 

ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा के पांच स्वरूपों का वर्णन किया गया है। अंगिरावंशी विश्वकर्मा, विराट विश्वकर्मा, सुधन्वा विश्वकर्मा, धर्मवंशी विश्वकर्मा और भृगुवंशी विश्वकर्मा। भगवान विश्वकर्मा का जन्म देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन में हुआ था।  

*भगवान विश्वकर्मा की रचनाएं*

ऋग्वेद में विश्वकर्मा सूक्त के नाम से ११ ऋचाएं लिखी गईं हैं जिससे स्पष्ट है कि प्राचीन काल में सभी प्रमुख राजधानियां भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाई थीं ।

माना जाता है कि सतयुग का 'स्वर्ग लोक', त्रेता युग की 'लंका', द्वापर की 'द्वारिका' और कलयुग का 'हस्तिनापुर' आदि विश्वकर्मा द्वारा ही रचित हैं। इतना ही नहीं कर्ण का कुंडल,भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल और यमराज का कालदंड भी विश्वकर्मा ने ही बनाया है।


आज कोई यह कल्पना भी नहीं कर सकता कि कोई पिता अपने पुत्र के वध के लिए वज्र बनाएगा। लेकिन ऐसा ही विश्वकर्मा जी ने किया था। 
विश्वकर्मा जी का पुत्र वृत्र दुराचारी एवं आसुरी-स्वभाव का होने के कारण ' वृत्रासुर ' के नाम से लोक प्रसिद्ध हुआ। उसके अत्याचार से तंग आकर देवगण अपने गुरु बृहस्पति से उपाय पूछा। बृहस्पति जी ने कहा कि ऋषि दधीचि की अस्थि से बने वज्र से वृत्रासुर का वध संभव है लेकिन इसे केवल विश्वकर्मा जी ही बना सकते हैं।

देवगण विश्वकर्मा जी के पास पहुंचे और अपनी बात बताई , तो विश्वकर्मा जी सहर्ष तैयार हो गए। ऋषि दधीचि की अस्थि से उन्होंने ऐसा वज्रास्त्र बनाया , जिससे उसके पुत्र का वध हुआ। 
वर्तमान समय में राजनैतिक नेताओं को इससे शिक्षा लेनी चाहिए तथा अपने पुत्र-मोह से बचना चाहिए।

आइए! विश्वकर्मा-जयंती के पावन अवसर पर उनका स्मरण करें।

नमोस्तु विश्वरूपाय   विश्वरूपाय ते नमः।
नमो विश्वात्माभूताय विश्वकर्मा नमोस्तुते।। 

यो विश्व जगत् करोत्यत: स: विश्वकर्मा ।
अर्थात् जो संसार की रचना करता है , वह विश्वकर्मा है। 

ऋग्वेद के दशम मंडल में सूक्त ८१ एवं सूक्त ८२ के १४ मंत्रों को विश्वकर्मा सूक्त कहते हैं । ये मंत्र यजुर्वेद में भी मिलते हैं।
हिंदुओं के दो त्योहार संक्रांति में ही मनाई जाती हैं। पहला - खिचड़ी का त्योहार मकर संक्रांति को मनाया जाता है और दूसरा - विश्वकर्मा जयंती कन्या संक्रांति को मनाई जाती है।
भारतीय मजदूर संघ विश्वकर्मा जयंती को राष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में पालन करता है।

संस्कृत साहित्य में विश्वकर्मा शब्द के कई अर्थ हैं।
विश्वकर्मा का प्रथम अर्थ उस विराट शक्ति का बोधक है , जिसने सृष्टि की रचना की। इस दृष्टि से सृष्टिकर्ता , परमात्मा आदि अर्थ विश्वकर्मा के होते हैं 

दूसरा अर्थ अंगिरा वंश में उत्पन्न विश्वकर्मा नामक एक विभूति से जुड़ा हुआ है , जो विश्व के आदि शिल्पाचार्य का द्योतक है।
" विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र " ग्रंथ के रचयिता विश्वकर्मा माने जाते हैं। जगत का यह सर्वप्रथम ग्रंथ वास्तुकला को शास्त्र के रूप में प्रस्तुत करता है।
विश्वकर्मा जी ने इंद्र के लिए इंद्रलोक और सुतल नामक पाताल तथा दानवों के लिए लंका का निर्माण किया था।  भगवान श्रीकृष्ण के लिए द्वारिका और वृंदावन का तथा पांडवों के लिए हस्तिनापुर का निर्माण किया था ।
प्रसिद्ध पुष्पक विमान इन्होंने ही बनाए थे। इस विमान की यह विशेषता थी कि वह भूतल पर , जल में तथा आकाश में - तीनों मार्ग में भ्रमण कर सकता था।

तीसरा अर्थ है - ' विश्वकर्मा ' उपाधि अर्थात् विशिष्ट कार्यों में दक्ष होने के कारण अनेक व्यक्तियों को विश्वकर्मा उपाधि प्रदान की गई थी। आज भी भारत के स्वर्णकार (सोनार ) , लौहकार (लोहार) , कुंभकार (कुम्हार) आदि  स्वयं को विश्वकर्मा के वंशज मानते हैं और गौरव का अनुभव करते हैं। कई लोगों की उपाधि (टाइटल) आज भी विश्वकर्मा है।
मिथिलेश ओझा की ओर से सभी शिल्पकारों को नमन एवं वंदन।

जय भगवान विश्वकर्मा जी की🚩

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