जाने भगवान शिव के हाथो में डमरू कैसे आया

जाने भगवान शिव के हाथो में डमरू कैसे आया Know how Damru came into the hands of Lord Shiva

भगवान शिव के डमरू का उल्लेख वेदों, पुराणों और हिंदू धर्मग्रंथों में है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, डमरू का उद्भव एक रोमांचक कहानी से जुड़ा है:
कहानी के अनुसार, एक समय पर्वतराज हिमावत और मेना की पुत्री पार्वती ने तपस्या करते हुए भगवान शिव को प्राप्त करने का व्रत रखा था। वे बहुत ही गहरे ध्यान में थीं और उनकी तपस्या ने ब्रह्मा को भी परेशान कर दिया। ब्रह्मा ने उन्हें पार्वती को विशेष तरीके से प्रसन्न करने के लिए शिव की प्राप्ति के लिए कई सवार्थी तरीके सुझाए।
उनकी सलाह पर, एक दिन पार्वती ने भगवान शिव के दर्शन के लिए बहुत गहरे ध्यान में लगे हुए शिव जी की अविरल भक्ति की थी। वे अपनी अद्भुत तपस्या में लीन थीं और एक समय आया जब शिव जी को उनकी अद्भुत भक्ति पर खुशी हुई।
भगवान शिव ने उनकी इच्छा को पूरा करते हुए अपने हाथों में डमरू को उत्तारा। उन्होंने डमरू को अपने ध्यान और तांडव की ध्वनि का प्रतीक माना। इस प्रकार, डमरू भगवान शिव की शक्ति, ज्ञान और सृष्टि का प्रतीक बन गया।

एक पौराणिक कथा भगवान शिव के हाथों में डमरू का उद्भव 

भगवान शिव के हाथों में डमरू का उद्भव एक पौराणिक कथा के अनुसार बड़े ही रोमांचक तरीके से हुआ था।
कहानी के अनुसार, एक दिन भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच महत्त्वपूर्ण एक वाद था कि कौन सर्वोत्तम देवता है। इस विवाद को समाप्त करने के लिए उन्होंने महाशिवरात्रि पर यह निर्णय लिया कि जो देवता पहले वस्त्र देखेगा वही सर्वश्रेष्ठ देवता होगा।
विष्णु और ब्रह्मा ने तुरंत अपने वाहनों के साथ यात्रा शुरू की। ब्रह्मा गूंगे वंशी (हंस) पर सवार थे, जबकि विष्णु गढ़वाची (गढ़ेड़ा) पर चढ़े थे।
शिव जी ने यह सब देखा और वे भी एक परीक्षण करने का मौका पाने के लिए तैयार हुए। उन्होंने एक दिव्य आभूषणों से लदा गरीब ब्राह्मण के रूप में पहना। जैसे ही ब्रह्मा और विष्णु पहुंचे, वे दिव्य पुरुष को देखकर आश्चर्य चकित हो गए और उनसे प्रश्न पूछने लगे।
गरीब ब्राह्मण ने दोनों को गहरे ध्यान में लीन रखा और फिर अपनी आँखें बंद की। फिर उसने अपनी आंखें खोली और दोनों के सामने एक ज्यों की छोटी सी डमरू रखी।
भगवान शिव ने उन्हें उस डमरू को लेने की अनुमति दी, और उन्होंने अपने तांडव नृत्य की ध्वनि में उसे बजाया। उस डमरू की ध्वनि ने ब्रह्मा और विष्णु को चकित कर दिया और उन्हें दिव्य वास्त्रों से लदा उस गरीब ब्राह्मण को ही सबसे श्रेष्ठ देवता मानने पर ला दिया।
इस प्रकार, भगवान शिव ने अपने तांडव नृत्य की ध्वनि के माध्यम से डमरू को प्राप्त किया था। यह कथा हिंदू धर्म में प्रसिद्ध है और डमरू शिव की तांडव और ध्यान का प्रतीक माना जाता है। 

एक पौराणिक कथा के अनुसार

हिंदू पौराणिक कथाओं और वेदों के अनुसार, भगवान शिव के हाथों में डमरू का उल्लेख बहुत प्राचीन है। यह डमरू उनके ध्यान, ताण्डव नृत्य और ज्ञान की प्रतीक है।
एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक दिन भगवान शिव ध्यान में लीन थे और उन्होंने अपने ताण्डव नृत्य की शक्ति को समझने के लिए अपने डमरू की ध्वनि को सुनने के लिए उसे बजाना शुरू किया। उनके डमरू की ध्वनि से ब्रह्मांड की सृष्टि, संरक्षण और संहार की प्रक्रिया को निर्देशित किया जाता है। इसलिए, डमरू शिव की शक्ति, ज्ञान और सृष्टि का प्रतीक माना जाता है।
विभिन्न कथाओं और पौराणिक ग्रंथों में इस विषय पर अलग-अलग कहानियाँ हैं, लेकिन डमरू शिव के साथ जोड़ा जाता है और उसे उनके तांडव और ध्यान का प्रतीक माना जाता है।

शिव जी के डमरू के  कुछ लाभ

शिव जी के डमरू को हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्त्व दिया गया है। यहां कुछ लाभ बताए जा रहे हैं जिन्हें शिव और डमरू संबंधित मान्यताओं में माना जाता है:
  • ध्यान और आध्यात्मिक विकास:** शिव के डमरू के ध्वनि को ध्यान में लाने से आध्यात्मिक विकास होता है और मानसिक शांति मिलती है।
  • सृष्टि का संरचना:** डमरू के बजने से ब्रह्मांड की सृष्टि होती है, इसलिए इसे सृष्टिकर्ता का प्रतीक माना जाता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा:** डमरू के बजने से घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और नकारात्मकता को दूर किया जा सकता है।
  • शिव की कृपा:** शिव जी को ध्यान में रखने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति मिलती है।
  • कल्याण और समृद्धि:** शिव जी के डमरू को घर में रखने से व्यक्ति को कल्याण, समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है, यह माना जाता है।
ये सभी लाभ धार्मिक और आध्यात्मिक प्रांतियों पर आधारित हैं। यह विश्वास किया जाता है कि शिव और उनके डमरू की शक्तियों का सहारा लेकर व्यक्ति अपने जीवन में सुख, शांति, आनंद और समृद्धि प्राप्त कर सकता है।

कुछ प्रमुख शिव डमरू मंत्र

शिव जी के डमरू के संबंध में कई मंत्र हैं जो ध्यान और साधना में उपयोग किए जाते हैं। ये मंत्र शिव की पूजा, ध्यान, योग और आध्यात्मिक अभ्यास में उपयोग किए जाते हैं। ये मंत्र शिव के ध्यान, समर्पण और आध्यात्मिक साधना में मदद करते हैं। 
यहां कुछ प्रमुख शिव डमरू मंत्र हैं:
  1. ॐ नमः शिवाय (Om Namah Shivaya):** यह मंत्र शिव को समर्पित है और शिव भक्ति में उत्कृष्ट माना जाता है।
  2. ॐ नमो भगवते रुद्राय (Om Namo Bhagavate Rudraya):** यह मंत्र भी शिव को समर्पित है और शिव के गुणों की महिमा को याद करने में मदद करता है।
  3. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् (Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam):** यह मंत्र शिव के रोगनाशक रूप में जाना जाता है।
  4. ॐ नमो नारायणाय (Om Namo Narayanaya):** यह मंत्र शिव और उनकी शक्ति पर आशीर्वाद मांगने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  5. ॐ ह्रीं नमः शिवाय (Om Hreem Namah Shivaya):** यह मंत्र शिव के शक्ति को जागृत करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
ये मंत्र ध्यान, मन्त्र जाप, जाप और ध्यान के साथ उच्चारण किए जाते हैं, जो शिव के साथ आत्मिक संबंध बढ़ाने और आध्यात्मिक विकास के लिए किए जाते हैं।

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