राम और शांता कथा

राम और शांता कथा Ram and Shanta story

राम की बहन शांता का पति ऋषि श्रृंग था, जैसा कि आपने बताया है। ऋषि श्रृंग ने राजा दशरथ के यहां पुत्रेष्टि यज्ञ किया था, जिसके फलस्वरूप राम और उनके तीन भाइयों का जन्म हुआ था। यह कथा हिंदू धर्म के महाकाव्य रामायण में वर्णित है और ऋषि श्रृंग और उनकी पत्नी शांता को बड़ा ही महत्त्व दिया गया है।

ऋषि श्रृंग (ऋषि शृंगी) की कथा बहुत प्राचीन

ऋषि श्रृंग (ऋषि शृंगी) की कथा बहुत प्राचीन है और हिंदू धर्म में महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। कथा के अनुसार, ऋषि श्रृंग के पिता विभंधक एक महान ऋषि थे जिन्होंने ब्रह्माजी का अपमान किया था। इसके परिणामस्वरूप, विभंधक को श्राप दिया गया कि वह तथा उसका पुत्र भी संतानहीन रहेंगे। इस पर विभंधक ने दुःख और पश्चाताप के साथ अपने पुत्र को ब्रह्मद्वारका नामक तीर्थ स्थान पर ध्यान की प्रक्रिया के द्वारा उत्तम ऋषि बनाया। यहां तक की ऋषि श्रृंग को भी वही विभंधक का श्राप लग गया था। उनकी माता ने उन्हें अपने वन में मातृ रूप में पाला था और उन्होंने भगवान शिव की पूजा और तपस्या की थी।  एक दिन, किसी कारणवश, वह राजा दशरथ के राज्य में गये और वहां रुके। दशरथ ने ऋषि श्रृंग के आतिथ्य का सम्मान किया और उन्हें अपने घर में आमंत्रित किया। इस दौरान, श्रृंगी ऋषि ने राजा दशरथ को वर दिया कि उनकी पत्नी को संतान प्राप्ति होगी। ऋषि श्रृंग के इस वरदान के प्रभाव से राजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी, जिनमें राम भी थे।  यह कथा रामायण महाकाव्य में महत्त्वपूर्ण है और ऋषि श्रृंग का नाम इसलिए प्रमुख है क्योंकि उन्होंने राम के जन्म को संभाला था।

शांता की कथा

भगवान राम की बहन शांता का जन्म राजा दशरथ और माता कौशल्या की बेटी के रूप में हुआ था। वाल्मीकि रामायण में इनका वर्णन नहीं है, लेकिन कुछ अन्य रामायण की पुस्तकों में इनका उल्लेख मिलता है। शांता राजा दशरथ और माता कौशल्या की पहली संतान थी, जो भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की सबसे बड़ी बहन थी। शांता राजकुमारी के रूप में अंगदेश के राजा को गोद दी गई थी। उनका वर्णन वाल्मीकि रचित रामायण में नहीं है, लेकिन दक्षिण पुराण में उनका इतिहास मिलता है। शांता का जन्म राजा दशरथ और माता कौशल्या की बेटी के रूप में हुआ था। वे संगीत और कला में निपुण थीं, और वेदों की अच्छी ज्ञाता थीं। उनके कारण ही उनके चारों भाइयों का जन्म हुआ था। शांता की कथा रामायण में नहीं दिखाई गई, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण और अद्भुत कथा है

भगवान राम की कथा

रामायण, भारतीय साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है जो भगवान राम की जीवनी को वर्णित करता है। यह कथा महाकाव्य के रूप में मानी जाती है और भगवान राम के जीवन, उनके धर्म, नैतिकता, और मानवीय मूल्यों को उजागर करती है। रामायण का प्रमुख कथासूत्र यह है कि भगवान विष्णु का साकार अवतार भगवान राम हैं। उनका जन्म अयोध्या में हुआ था। रामायण की कथा में उनके जीवन के विभिन्न पहलु, उनके पत्नी सीता, उनके भाई लक्ष्मण, हनुमान, रावण जैसे प्रमुख चरित्रों के संग्रह और उनके जीवन के विभिन्न महत्त्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन होता है। रामायण कई भाषाओं में उपलब्ध है और यह हिंदू धर्म के एक महत्त्वपूर्ण प्रमाण के रूप में मानी जाती है। इसकी विविध रूपों में कई कवियों और लेखकों ने इसे प्रस्तुत किया है, जिससे इसकी अनेक रूपरेखाएं बनी हैं।

शांता और ऋषि श्रृंग का विवाह कथा

शांता और ऋषि श्रृंग का विवाह कथाओं में मान्यताओं और लोककथाओं में व्यापक रूप से प्रस्तुत है। इस कथा के अनुसार: ऋषि श्रृंग का पिता विभंधक एक महान ऋषि थे, जिन्होंने ब्रह्माजी का अपमान किया था। इसके परिणामस्वरूप, विभंधक को श्राप दिया गया कि वह तथा उसका पुत्र भी संतानहीन रहेंगे। इस श्राप को छूने के लिए विभंधक ने अपने पुत्र को ध्यान और तपस्या से उत्तम ऋषि बनाने के लिए ध्यान दिया। जब ऋषि श्रृंग बड़े हो गए, तो विभंधक ने उन्हें राजा दशरथ के दरबार में बुलाया। दशरथ ने ऋषि श्रृंग को अतिथि सत्कार किया और उनका ध्यान और तपस्या में विशेष रूप से मान्य किया। ऋषि श्रृंग के द्वारा दिये गए श्राप को हल करने के लिए, राजा दशरथ ने ऋषि श्रृंग को अपनी पत्नी को संतान प्राप्ति का वर देने का निर्णय किया। इसके परिणामस्वरूप, ऋषि श्रृंग की पत्नी शांता को संतान प्राप्ति हुई।  यही कथा शांता और ऋषि श्रृंग के विवाह का संक्षेपित रूप है, जो प्राचीन कथाओं में व्यापक रूप से प्रस्तुत होती है।

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