राघुनाथ मंदिर जम्मू के बारे में

राघुनाथ मंदिर जम्मू के बारे में About Raghunath Temple Jammu 

रघुनाथ मंदिर, जम्मू, जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थित एक प्रमुख हिन्दू मंदिर है। यह मंदिर भगवान राम के पुत्र लव और कुश को समर्पित है। यहाँ पर दिव्य दिगंबर, विशेष रूप से रामलीला के विभिन्न प्रसंगों को चित्रित करने वाली चित्रकारी मुर्तियाँ देखी जा सकती हैं। 
यहाँ के मंदिर के इतिहास का कहना है कि यह 1835 में महाराजा गुलाब सिंह नामक शासक द्वारा बनवाया गया था। यहाँ पर वर्ष में कई धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं जिन्हें स्थानीय लोग बड़े धूमधाम से मनाते हैं।
यहाँ की आर्किटेक्चर और स्थल की प्राकृतिक सुंदरता दर्शनीय हैं और यहाँ का भव्य महाद्वार, मंदिर के विभिन्न प्रांगण, और सजीव संस्कृति इसे एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बनाते हैं।

रघुनाथ मंदिर धार्मिक उत्सव 

रघुनाथ मंदिर, जम्मू में कई धार्मिक उत्सव मनाए जाते हैं, जो स्थानीय और आसपास के लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं।
  1. रामनवमी**: यह उत्सव भगवान राम के जन्मदिन पर मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और रामायण के पाठ का आयोजन किया जाता है।
  2. दीपावली**: राघवेन्द्र स्वरूप, भगवान राम, और देवी सीता के पराक्रम को याद करते हुए यह उत्सव मनाया जाता है। मंदिर को दीपों से सजाया जाता है और आरती की जाती है।
  3. नवरात्रि**: नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक नौ देवियों की पूजा की जाती है और इस अवसर पर समाज में आयोजित कई धार्मिक कार्यक्रम होते हैं।
  4. होली**: यह प्रसिद्ध हिंदू उत्सव है जो रंगों के साथ मनाया जाता है। मंदिर में भक्तगण होली के रंगों से खेलते हैं और इस अवसर पर मंदिर के आसपास जागरण आयोजित किया जाता है।
ये उत्सव मंदिर के प्रसादी धार्मिक आयोजनों में से कुछ हैं जो लोगों को साथ मिलकर धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ते हैं।

रघुनाथ मंदिर पूजा पाठ

रघुनाथ मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध है। इस मंदिर में विभिन्न प्रकार की पूजा-अर्चना और पाठ-पुजा की जाती है। रघुनाथ मंदिर में अनुयायी विभिन्न प्रकार के पाठ, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
यहां कुछ प्रमुख पूजा और पाठों का उल्लेख किया जा सकता है
  • हनुमान चालीसा पाठ:** रघुनाथ मंदिर में हनुमानजी को विशेष पसंद किया जाता है, इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ यहां विशेष रूप से किया जाता है।
  • रामायण पाठ:** रामायण का पाठ भी यहां किया जाता है। रघुनाथ मंदिर में भगवान राम को समर्पित किया गया है, तो रामायण का पाठ भक्तों द्वारा किया जाता है।
रामायण पाठ, हिंदू धर्म के एक प्रमुख धार्मिक ग्रंथ "रामायण" का पाठ करना है। रामायण महाकाव्य है जिसे महर्षि वाल्मीकि ने लिखा था। इसमें भगवान राम के जीवन की कथा, उनके धर्मपरायणता, सीता माता का अपहरण, लंकापुरी के नरकासुर का वध, रावण का वध, और राम-सीता का पुनर्मिलन जैसे घटनाक्रम शामिल हैं।
रामायण का पाठ करने से बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी को धार्मिक और मानवीय उपदेश मिलते हैं। यह ग्रंथ धर्म, नैतिकता, समरसता, और प्रेम की महत्ता को समझाता है।
रामायण का पाठ करते समय, ध्यान और श्रद्धा से ग्रंथ की प्रति समर्पित रहना चाहिए। यह ग्रंथ सनातन धर्म की एक महत्त्वपूर्ण धारणा है और बहुत से लोग इसे नियमित रूप से पढ़ते रहते हैं, विशेषकर धार्मिक अवसरों और त्योहारों पर।
  1. भजन संध्या:** धार्मिक भजनों की संध्या भी मंदिर में आयोजित की जाती है, जिसमें भक्त भगवान की प्रशंसा करते हैं।
  2. आरती:** नियमित रूप से भगवान की आरती की जाती है, जिसमें भक्त भगवान को अर्पण करते हैं और उनकी प्रशंसा करते हैं।
रघुनाथ मंदिर में ये सभी धार्मिक पाठ और पूजा के रूप में भक्तों का समर्थन किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान लोग भक्ति और श्रद्धा के साथ भगवान की अराधना करते हैं।

रघुनाथ मंदिर में पूजा के दौरान कुछ मंत्रों का जाप 

रघुनाथ मंदिर में पूजा के दौरान कुछ मंत्रों का जाप किया जाता है जो भगवान राम को समर्पित होते हैं। यहां कुछ मंत्रों का उल्लेख है जो पूजा के समय जाप किए जा सकते हैं:
  1. ॐ श्री रामाय नमः (Om Shri Ramaya Namah):** यह मंत्र भगवान राम की पूजा और आराधना में उपयोगी होता है। इसका जाप करने से भक्त का मन भगवान की ओर ध्यानित होता है।
  2. ॐ जय जगदीश हरे (Om Jai Jagdish Hare):** यह मंत्र भगवान की पूजा के दौरान आरती के समय जाप किया जाता है और इसे भक्त भगवान की प्रार्थना और स्तुति के रूप में करते हैं।
  3. ॐ श्री हनुमते नमः (Om Shri Hanumate Namah):** रघुनाथ मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति भी होती है, तो उनकी पूजा के लिए यह मंत्र भी जाप किया जा सकता है।
  4. राम राम जय राजा राम (Ram Ram Jai Raja Ram):** यह भी भगवान राम को स्मरण करने के लिए उपयुक्त मंत्र है।
मंदिरों में पूजा के समय जो मंत्र जाप किये जाते हैं, वे उस देवता को समर्पित होते हैं और भक्तों को भक्ति और श्रद्धा की अनुभूति कराते हैं। प्रत्येक मंदिर की पूजा विधि और मंत्रों में थोड़ी भिन्नता हो सकती है, इसलिए स्थानीय पूजा विधि का पालन करना उत्तम होता है।

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