शिव जी के डमरू

शिव जी के डमरू  Lord Shiva's Damru

डमरू शिव जी के विशेष आध्यात्मिक उपकरणों में से एक है। इसे माना जाता है कि जब शिव जी डमरू बजाते हैं, तो उनका ध्यान और तापमान बदलता है। डमरू के ध्वनि से सृष्टि की सृष्टि और संरचना का संकेत माना जाता है। साथ ही, इसे ध्यान की अवस्था में जाने का संकेत भी माना जाता है। इस ध्वनि के माध्यम से माना जाता है कि शिव जी संसार की सृष्टि और संरचना का निर्माण करते हैं।
डमरू की ध्वनि से बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है, क्योंकि शिव जी के डमरू से चमात्कारी मंत्रों का उच्चारण होता है। शिव जी के डमरू की ध्वनि में तनाव को कम करने की शक्ति होती है और साथ ही साथ मन को भी शांत करने का काम करती है।

शिव का डमरू किसका प्रतीक है

डमरू उस ब्रह्मांड का प्रतीक है जो हमेशा विस्तारित और ढह रहा है । विस्तार से पतन होता है और फिर पुनः विस्तार होता है, यही सृजन की प्रक्रिया है। अगर आप अपने दिल की धड़कन को देखें तो यह सिर्फ एक सीधी रेखा नहीं है बल्कि यह एक लय है जो ऊपर और नीचे होती रहती है।

शिव जी के डमरू के बजने से निम्नलिखित लाभ

हिंदू धर्म में शिव जी को डमरू (एक प्रकार का झलका जिसे वे अपने हाथ में लिए हुए होते हैं) चढ़ाने का एक विशेष महत्त्व होता है। इसे कई तरह के प्रयोगों में शामिल किया जाता है और इसे ध्यान और तापस्या के दौरान भी बजाया जाता है।
शिव जी के डमरू के बजने का मान्यता से निम्नलिखित लाभ होते हैं:
  • ध्यान में सहायता:** डमरू की ध्वनि को ध्यान के अवसरों में उपयोग किया जाता है। इस ध्वनि को सुनने से ध्यान में लीनता बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है।
  • सृष्टि और संहार का प्रतीक:** शिव जी का डमरू सृष्टि और संहार का प्रतीक माना जाता है। इसे बजाने से सृष्टि की उत्पत्ति और संहार होने की सृष्टि में सहायता मिलती है।
  • रवैया और आत्मा के साथ सम्बंध:** शिव जी के डमरू की ध्वनि को आत्मा के साथ जोड़ा गया है। इसे बजाने से आत्मा के साथ गहरा संबंध बनता है और मानवीय जीवन में सामंजस्य बढ़ता है।
  • शक्ति की उत्पत्ति:** कई मान्यताओं के अनुसार, शिव जी के डमरू की ध्वनि से ऊर्जा का संचार होता है और यह शक्ति की उत्पत्ति में मदद करती है।
यह सभी मान्यताएं धार्मिक और सांस्कृतिक संस्कृति के अनुसार हैं, और इन्हें सिद्ध करने के लिए व्यक्तिगत अनुभव भी महत्त्वपूर्ण होता है।

शिव के डमरू की उत्पत्ति

आपको बता दें कि जब सृष्टि में देवी सरस्वती पैदा हुई, तो उनकी वाणी से ध्वनि पैदा हुई, लेकिन ये ध्वनि सुर और संगीत विहीन थी। आवाज में संगीत पैदा करने के लिए भगवान शिवजी ने 14 बार डमरू बजाया और नृत्य किया। इससे ध्वनि व्याकरण और संगीत के ताल का जन्म हुआ। इस तरह भगवान शिवजी के डमरू की उत्पत्ति हुई।

शिव मंदिर में डमरू चढ़ाने से 

शिव मंदिर में डमरू चढ़ाने का प्रचलन बहुतायत तांत्रिक संस्कृति और पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। इसे ध्यान, ध्यान और पूजा के समय में उपयोग करने का माना जाता है। इसके माध्यम से ध्यान को शुद्ध किया जाता है और चित्त को एकाग्र किया जाता है। डमरू की ध्वनि को भगवान शिव की ध्यान में साथ लाने का काम किया जाता है, जो ध्यान और आध्यात्मिक अनुभव को बढ़ाने में मदद कर सकता है।
कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिवजी के डमरू की ध्वनि सृष्टि और सृष्टिकर्ता के रूप में मानी जाती है। डमरू के ध्वनि का तात्पर्य जीवन की उत्पत्ति और संसार के नियमों को दर्शाने में होता है। इसलिए, डमरू को शिव पूजा में शामिल किया जाता है ताकि ध्यान और अनुभव के माध्यम से व्यक्ति आत्मा के साथ संवाद कर सके।
अलग-अलग स्थानों और संस्कृतियों में डमरू के चढ़ाने की प्रक्रिया में विशेष रूप से आदतें और प्रथाएं हो सकती हैं, लेकिन सामान्यतः डमरू को शिव पूजा के समय में उपयोग किया जाता है जो ध्यान और आध्यात्मिक साधना में मदद कर सकता है।

शिव डमरू को घर में रखने से 

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक घर में डमरू रखना काफी शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि घर में शिव स्तुति के समय डमरू बजाने से घर में कभी अमंगल नहीं होता है और नकारात्मक ऊर्चा भी प्रवेश नहीं करती है। माना जाता है कि बच्चों के कमरे में डमरू रखने से उन पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
शिव डमरू को घर में रखने की प्रथा कुछ लोगों के अनुसार उनके आध्यात्मिक और ध्यान से जुड़ी होती है। कुछ लोग डमरू को शिव पूजा और ध्यान में उपयोग के लिए अपने घर में रखते हैं। इसे ध्यान और आध्यात्मिक साधना में सहायक माना जाता है।
यह एक आदत है और इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व होता है। डमरू को शिव के ध्यान और समाधि में सहायता देने का माना जाता है। इसे साधारणतः पूजा स्थल में रखा जाता है और पूजन के समय इसका उपयोग किया जाता है।
यह व्यक्तिगत धार्मिक विश्वासों और प्रथाओं पर निर्भर करता है, और संस्कृति और परंपरागत विश्वासों के अनुसार यह किसी घर में रखने की प्रक्रिया होती है।

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