शिव का डमरू महत्त्व आध्यात्मिक अस्त्र

शिव का डमरू महत्त्व आध्यात्मिक अस्त्र  Shiva's Damru Significance Spiritual Weapon

शिव के डमरू की उत्पत्ति का माना जाता है कि वह प्राचीन समय में शिव के तांडव नृत्य के दौरान उत्पन्न हुआ था। एक पौराणिक कथा के अनुसार, शिव जब अपने तांडव नृत्य के लिए उत्तेजित हुए तो उन्होंने अपने डमरू को बजाना शुरू किया। डमरू की ध्वनि में एक विशेष तांता और ध्वनि का निर्माण हुआ, जो सृष्टि के साथ होने वाले सर्वनाश को दर्शाता है। इसके बाद, शिव के डमरू की ध्वनि से सृष्टि का सृष्टिकर्ता और विनाशकर्ता का एक संगम होता है।
आपको बता दें कि जब सृष्टि में देवी सरस्वती पैदा हुई, तो उनकी वाणी से ध्वनि पैदा हुई, लेकिन ये ध्वनि सुर और संगीत विहीन थी। आवाज में संगीत पैदा करने के लिए भगवान शिवजी ने 14 बार डमरू बजाया और नृत्य किया। इससे ध्वनि व्याकरण और संगीत के ताल का जन्म हुआ। इस तरह भगवान शिवजी के डमरू की उत्पत्ति हुई।

शिव की डमरू कथाएँ

शिव के डमरू की कई कहानियाँ हैं जो हिंदू पौराणिक ग्रंथों में मिलती हैं। यह कहानियाँ शिव के डमरू की शक्ति, महत्त्व, और उसकी भूमिका को दर्शाती हैं।
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, शिव डमरू को बजाते समय सृष्टि के ध्वनि को सृष्टि करते हैं। डमरू की ध्वनि के माध्यम से वे सृष्टि की उत्पत्ति, संरचना और संहार का प्रबंधन करते हैं। डमरू के ध्वनि में सृष्टि की आदि और अंत का रहस्य छिपा होता है।
एक और कथा कहती है कि जब शिव नाचते हैं और डमरू बजाते हैं, तो उनकी ध्वनि से तांडव नृत्य शुरू होता है, जो सृष्टि के संसार की उत्पत्ति और संहार का प्रतीक है। इस नृत्य के दौरान भगवान शिव की डमरू की ध्वनि से संसार का संचालन होता है।
शिव के डमरू की कथाएँ भगवान शिव की अनंत शक्ति, सृष्टि और संरचना को संकेतित करती हैं, जो संसार की धारा को चलाने और संरक्षित करने में समर्थ हैं।

शिव और डमरू

शिव के डमरू को हिंदू धर्म में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है
शिव के डमरू एक प्रमुख धार्मिक संकेत है जो हिंदू धर्म में पाया जाता है। यह डमरू एक छोटे ताकतवर ढोलक की तरह होता है, जिसमें दो तारों द्वारा बांधी गई मेम्ब्रेन होती है जो दोनों ओर से ढकी होती है। शिव के डमरू के एक तारे संसार की सृष्टि को और दूसरे तारे संसार का संहार करते हैं, जो सृष्टि और प्रलय की सृष्टि को सिद्ध करते हैं।
शिव के डमरू की ध्वनि को शिव के तांडव नृत्य के समय में बजाने से संसार का सृष्टि, संरक्षण और संहार होता है, जो सृष्टि की प्रक्रिया को प्रतिनिधित करता है। इसके अलावा, शिव के डमरू को बजाने से सभी दुःखों का नाश होता है और सत्ता और शांति की प्राप्ति होती है।
इसके अतिरिक्त, शिव के डमरू को अक्षर माना जाता है जो ब्रह्मांड की नाद संसार की अनंतता को प्रतिनिधित करता है। इसे शिव के संसार के सम्पूर्ण विस्तार का प्रतीक माना जाता है।
शिव के डमरू का एक तारा प्रकृति को, और दूसरा तारा पुरुष को प्रतिनिधित करता है, जो सृष्टि और प्रलय की व्यापक प्रक्रिया को दर्शाता है। यह संकेत है कि संसार का संरक्षण और संसार का नाश भगवान शिव के हाथ में होता है।
यह हिंदू धर्म में शिव के प्रतीक के रूप में महत्त्वपूर्ण माना जाता है और इसे सृष्टि की प्रक्रिया का प्रतीक माना जाता है।

भगवान शिव के डमरू की महत्त्वपूर्ण तथ्य 

शिव के डमरू को हिंदू धर्म में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह त्रिशूल के साथ भगवान शिव के चिन्ह के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य इस डमरू के बारे में हैं:
  1. डमरू की ध्वनि:** शिव के डमरू की ध्वनि मानवीय श्रवण के लिए अद्भुत होती है। यह ध्वनि सृष्टि के प्रक्रिया को प्रतिनिधित करती है और इसे अनंत शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
  2. तांडव नृत्य:** शिव की तांडव नृत्य के समय डमरू की ध्वनि बजती है, जो सृष्टि, संरचना और संहार के प्रतीक के रूप में स्थान पाती है।
  3. डमरू की ताराओं का प्रतिनिधित्व:** डमरू की ताराओं का कहना है कि वे सृष्टि के ब्रह्मांड की आध्यात्मिक सृष्टि को प्रतिनिधित करती हैं।
  4. डमरू के दो भाग:** शिव के डमरू के दो भाग होते हैं, जो सृष्टि और संहार की प्रक्रिया को प्रतिनिधित करते हैं।
  5. सिरशास्त्र में उल्लेख:** कई पुराणों और तांत्रिक ग्रंथों में डमरू के महत्त्व का वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ शिव के महत्त्वपूर्ण चिन्हों में से एक है।
शिव के डमरू को सृष्टि के सम्पूर्ण प्रक्रियाओं का प्रतीक माना जाता है और यह उनकी अनंत शक्ति और संसार के संरचनात्मक प्रक्रियाओं को प्रतिनिधित करता है।

कुछ प्रमुख शिव के डमरू मंत्र

शिव के डमरू के मंत्र शिव भक्ति और ध्यान के लिए उपयोगी होते हैं। ये मंत्र शिव की पूजा, ध्यान, तापस्या या मेधावी गुणों की प्राप्ति के लिए उच्चारित किए जाते हैं।
कुछ प्रमुख शिव के डमरू मंत्र हैं:
  • ॐ नमः शिवाय (Om Namah Shivaya): यह शिव का प्रसिद्ध मंत्र है, जो उनकी पूजा और ध्यान के लिए बहुत प्रचलित है। यह मंत्र शिव की आराधना और उनके गुणों को स्मरण करने में मदद करता है।
  • ॐ नमो भगवते रुद्राय (Om Namo Bhagavate Rudraya): यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और उनकी आराधना में प्रयोग होता है।
  • ॐ ह्रीं नमः शिवाय (Om Hreem Namah Shivaya): यह भी एक प्रसिद्ध मंत्र है जो शिव की पूजा और भक्ति में उपयोग किया जाता है।
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्। (Om Tatpurushaya Vidmahe Mahadevaya Dhimahi Tanno Rudrah Prachodayat): यह मंत्र भगवान शिव की महात्म्य का स्मरण करता है और उनके गुणों की स्तुति करता है।
ये मंत्र शिव के भक्ति मार्ग को अनुयायियों के लिए और भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद के लिए उच्चारित किए जाते हैं। ध्यान और भक्ति के साथ इन मंत्रों का उच्चारण करने से शिव के अनुग्रह और संगति मिल सकती है।

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