त्रिप्रयार श्री राम मंदिर में मंत्रों का पाठ

त्रिप्रयार श्री राम मंदिर में मंत्रों का पाठ Recitation of mantras in Triprayar Shri Ram Temple

त्रिप्रयार श्री राम मंदिर में अनेक प्रकार के मंत्रों का पाठ किया जाता है, जो भक्तों को ध्यान, शांति और आध्यात्मिकता में सहायता प्रदान करते हैं। ये मंत्र भगवान की प्रार्थना, स्तुति और समर्पण में सहायता करते हैं।
कुछ प्रमुख मंत्रों में श्री राम मंदिर में पाठ किये जाते हैं:
  • श्री राम मंत्र:** "ॐ श्री रामाय नमः" - यह मंत्र भगवान श्री राम की प्रार्थना और उनकी स्तुति में पाठ किया जाता है। यह भगवान की कृपा और आशीर्वाद के लिए मान्यता रखता है।
  • हनुमान चालीसा:** यह चालीसा हनुमानजी की महिमा और उनकी पूजा में पढ़ी जाती है, जोकि श्री राम के अत्यंत भक्त थे।
  • राम रक्षा स्तोत्र:** यह स्तोत्र भगवान श्री राम की रक्षा और सुरक्षा के लिए पाठ किया जाता है। इसे भगवान की कृपा और सुरक्षा के लिए माना जाता है।
  • आरती:** आरती के समय मंदिर में विशेष मंत्रों का पाठ किया जाता है, जो भगवान की प्रार्थना और स्तुति में समर्पित होते हैं।
ये मंत्र और चालीसाएं भक्तों को ध्यान, आशीर्वाद, और आत्मिक शक्ति प्रदान करते हैं और उन्हें आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।

ॐ श्री रामाय नमः" मंत्र का अर्थ

"ॐ श्री रामाय नमः" मंत्र का अर्थ है भगवान श्री राम को नमस्कार। 
  1. "ॐ" एक प्रमुख ब्रह्मांडीय ध्वनि है, जो ब्रह्म को प्रकट करती है और सबकी उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय का प्रतीक है। यह शब्द आत्मा को नमस्कार करने के रूप में भी माना जाता है।
  2. "श्री रामाय" इसमें "श्री" एक प्रशंसा और सम्मान का शब्द है जो भगवान की महिमा को दर्शाता है और "रामाय" भगवान श्री राम के नाम का सम्मान करता है।
  3. "नमः" शब्द नमस्कार और समर्पण का अर्थ है। इसमें भक्ति और श्रद्धा का अर्थ आता है, जिससे भक्त भगवान की शरण में जाते हैं और उन्हें समर्पित होते हैं।
इस मंत्र का पाठ करने से भक्त भगवान श्री राम की प्राप्ति, कृपा, और आशीर्वाद की कामना करते हैं और अपने जीवन में शांति, सुख, और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

हनुमानजी की महिमा, महत्त्व

हनुमान चालीसा हनुमानजी की महिमा, महत्त्व, और कृपा को स्तुति करने वाला एक प्रमुख धार्मिक स्तोत्र है। यह चालीसा चौपाई रूप में है जिसमें 40 श्लोक होते हैं, जो भगवान हनुमान की महिमा और शक्ति को गाते हैं। 
इस चालीसा का पाठ करने से लोग भगवान हनुमान की कृपा और आशीर्वाद की कामना करते हैं और जीवन में सफलता, सुरक्षा और शांति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
यहां मैं हनुमान चालीसा का एक श्लोक दे रहा हूँ जो इसका प्रमुख भाग है:
"श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥"

इस श्लोक में, चालीसा की शुरुआत गुरु की प्रार्थना के साथ होती है, जिसे हनुमानजी की आराधना में समर्पित किया गया है। इसमें भगवान हनुमान की प्रशंसा, महिमा, और उनकी कृपा का वर्णन है।
हनुमान चालीसा का पाठ करने से भक्तों को शांति, सुरक्षा, और आशीर्वाद मिलता है, और उन्हें अध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर ले जाता है।

राम रक्षा स्तोत्र 

राम रक्षा स्तोत्र भगवान श्री राम की सुरक्षा के लिए पढ़ा जाने वाला प्रसिद्ध स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान श्री राम की कृपा, सुरक्षा, और सदैव आशीर्वाद के लिए पढ़ा जाता है।
इस स्तोत्र में रामायण के महत्त्वपूर्ण कुछ श्लोक होते हैं, जो मान्यता से हैं कि इनके पाठ से भगवान श्री राम की कृपा प्राप्त होती है और उनकी सुरक्षा में वृद्धि होती है।
राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से भक्त भगवान श्री राम की कृपा, शक्ति, और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं। यह स्तोत्र भक्ति और आशीर्वाद के साथ ही शांति और सुरक्षा का भी प्रतीक है।
राम रक्षा स्तोत्र में कुछ श्लोकों की उपस्थिति होती है, जो भगवान श्री राम की प्रार्थना और उनकी स्तुति में होते हैं, जिन्हें पाठ करके भक्त उनकी कृपा और आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं।

आरती के समय

आरती एक प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान होता है जो भगवान की प्रशंसा और स्तुति के लिए की जाती है। यह एक परम्परागत धार्मिक प्रथा है जिसमें प्रशंसा गीतों, धुनों, और वंदना के शब्दों का संगीतिक रूप होता है।
आरती के दौरान, भक्त भगवान की पूजा और स्तुति करते हैं। प्राचीन विधि के अनुसार, इसमें दीपकों की ज्योति, प्रदीप, फूल, धूप, और प्रसाद की वितरण की जाती है। आरती के दौरान भक्त भगवान की प्रार्थना करते हैं और उनकी कृपा और आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक संस्कृति में, आरती को भगवान के दिव्य स्वरूप की प्रसन्नता के रूप में माना जाता है और यह भक्तों के आत्मा को शुद्ध और प्रकाशित करने के लिए एक अद्वितीय अनुष्ठान माना जाता है। यह समय-समय पर विभिन्न धार्मिक स्थलों पर आयोजित की जाती है और भक्तों को धार्मिक और आध्यात्मिक साथीकरण में मदद करती है।

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