जानिए 2024 के सभी माह की शुक्ल चतुर्थी तिथि

जानिए 2024 के सभी माह की शुक्ल चतुर्थी तिथि Know the Shukla Chaturthi date of all months of 2024

शुभ मुहूर्त

विनायक चतुर्थी के व्रत का मुहूर्त तथा पूजा का समय तारीख और समय के अनुसार निर्धारित किया जाता है। आपके दिए गए तारीखों के अनुसार, जनवरी 14, 2024, को सुबह 11 बजकर 03 मिनट से दोपहर 01 बजकर 11 मिनट तक विनायक चतुर्थी का पूजन मुहूर्त है। यह समय विनायक चतुर्थी के व्रत के लिए शुभ माना जाता है।
यहां ध्यान देने योग्य है कि मुहूर्त और समय क्षेत्रीय विविधताओं के आधार पर बदल सकते हैं, इसलिए आपको स्थानीय पंडित या पंडिताई से भी पुष्टि करनी चाहिए।

विनायक चतुर्थी 

विनायक चतुर्थी हिंदू धर्म में गणेश जी को समर्पित त्योहार है। यह त्योहार भारत और भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह चतुर्थी तिथि के चंद्रमा की कृत्रिम रूप से नकल करने वाले गणेश जी की पूजा और अर्चना के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग गणेश जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति से पूजा करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं, और प्रसाद का वितरण करते हैं। यह त्योहार सामाजिक रूप से भी महत्त्वपूर्ण है जो लोगों को साथ लाता है और उन्हें समर्थन और संगठन की भावना देता है।

17 जनवरी 2024 बुधवार गुरु गोविंद सिंह जयंती

विनायक चतुर्थी का महत्त्व

विनायक चतुर्थी हिंदू धर्म में गणेश जी को समर्पित एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इसे भारत और भारतीय संस्कृति में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। गणेश जी को सभी देवों के प्रमुख माना जाता है, जो विज्ञान, कला, शिक्षा, विद्या, और समृद्धि के देवता हैं। 
विनायक चतुर्थी के दिन, लोग गणेश जी की पूजा, अर्चना, मंत्रों का जाप, और व्रत रखते हैं। इस दिन गणेश जी को मोदक, लड्डू, फल, फूल आदि का भोग चढ़ाकर पूजा किया जाता है। 
यह त्योहार भी सामाजिक रूप से महत्त्वपूर्ण है। यह लोगों को एक साथ आने, मिलने और उत्सव की भावना को बढ़ावा देता है। इस दिन लोग एक दूसरे को विशेष प्रसाद वितरित करते हैं और खुशियों का आनंद लेते हैं। 
इस त्योहार के माध्यम से लोग नए कामों की शुरुआत करने, मंगल कार्यों के लिए आशीर्वाद मांगने और उन्हें सफलता प्राप्त करने की कामना करते हैं। विनायक चतुर्थी अपने धार्मिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक महत्त्व के कारण बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।

विनायक चतुर्थी का  पूजन से कई लाभ 

विनायक चतुर्थी का महत्त्व विविध होता है और इसके पूजन से कई लाभ हो सकते हैं। यहां कुछ मुख्य लाभ दिए जा रहे हैं:
  1. आशीर्वाद और सफलता: गणेश जी को पूजन से आपको सफलता, बुद्धि, और अच्छे निर्णयों की प्राप्ति हो सकती है।
  2. शुभकामनाएं: विनायक चतुर्थी के दिन लोग एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और एकता और समरसता की भावना को बढ़ावा देते हैं।
  3. कार्यों में सफलता: इस दिन किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त की जा सकती है और नए प्रोजेक्ट्स या कार्यों की शुरुआत की जा सकती है।
  4. धार्मिक और मानवीय उन्नति: विनायक चतुर्थी के पर्व का पालन करने से आपकी धार्मिक और मानवीय उन्नति हो सकती है।
  5. शांति और सुख: गणेश जी के पूजन से आपको शांति और सुख की प्राप्ति हो सकती है, और वे हर मुश्किल को दूर करने में सहायक हो सकते हैं।
यह त्योहार अपने धार्मिक, सामाजिक, और आत्मिक महत्व के कारण माना जाता है और इसके पूजन से व्यक्ति को अनेक तरह के लाभ प्राप्त हो सकते हैं।

विनायक चतुर्थी की पूजा विधि

विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है और यह हिन्दू धर्म में गणेश जी की पूजा का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन गणेश जी की पूजा की जाती है और कुछ आवश्यक चरण होते हैं जो निम्नलिखित हैं:
सामग्री:
गणेश जी की मूर्ति या चित्र

पूजन सामग्री जैसे कि दीपक, धूप, अगरबत्ती, पूजनीय सामग्री, फल, फूल, नैवेद्य (भोग), पान, सुपारी, इलायची, लौंग, कलश, गंगाजल, अच्छेर, गंध और कुम्भ आदि।
पूजन विधि:
पूजा करने से पहले, साफ-सुथरे होकर स्नान करें।

गणेश जी की मूर्ति को साफ पानी से धोकर पूजन स्थल पर स्थापित करें।
गणपति पूजा की शुरुआत गणेश मंत्रों और श्लोकों के उच्चारण से करें।
धूप, दीप, अगरबत्ती, फल, फूल, नैवेद्य, पान, सुपारी, इलायची, लौंग, गंध, कलश, गंगाजल आदि से गणेश जी की पूजा करें।
आरती गाकर और प्रसाद बाँटकर पूजा समाप्त करें।
यह सुनिश्चित करें कि आप शुद्ध बुद्धि और पवित्र भावना के साथ इस पूजा को कर रहे हैं। गणेश जी की पूजा में विधिवत और श्रद्धापूर्वक ली जाए तो यह आपको आनंद और शांति प्रदान कर सकती है।

विनायक चतुर्थी की कथा 

भारतीय पौराणिक कथाओं में बहुत ही प्रसिद्ध है। यह कथा गणेश जी के जन्म के बारे में है। इसका सर्वप्रसिद्ध रूप संस्कृत में 'गणेश पुराण' में मिलता है।
कथा के अनुसार, माता पार्वती ने गोलकुंड के सम्राट बलिकेतु को संतान प्राप्ति के लिए पूजा की थी। उन्होंने एक चित्रकार को भी बुलाया और उन्हें गणेश जी की मूर्ति बनाने के लिए कहा। माता पार्वती ने उस मूर्ति को प्राण-प्रतिष्ठा करने का आदेश दिया कि जब वह मूर्ति स्वयं से सम्मुख होगी, तब वह उसे अपने पास ले जाएगी।
इसके बाद चित्रकार ने बलिकेतु के अनुरोध पर गणेश जी की मूर्ति बनाई। जब उसने मूर्ति को प्राण-प्रतिष्ठा की, तो वह मूर्ति सम्मुख होने की स्थिति में नहीं आई। उसने उसे कई तरह की कोशिशों के बावजूद भी सम्मुख नहीं किया।
चित्रकार ने उस समय तक कई मूर्तियाँ बनाईं, लेकिन कोई भी उनमें प्राण-प्रतिष्ठा नहीं हो पाई। उसने अपने दोस्तों की सलाह ली और गणेश जी की मूर्ति के सिर पर गज की चादर डाली और उसे प्राण-प्रतिष्ठा की।
जैसे ही चित्रकार ने प्राण-प्रतिष्ठा की, गणेश जी की मूर्ति सम्मुख हो गई। माता पार्वती ने वहाँ आकर उसे अपने पास ले जाने का आदेश दिया। इसके बाद से ही विनायक चतुर्थी को गणेश जी की पूजा के रूप में मनाया जाने लगा।
यह कथा गणेश जी के जन्म की महत्त्वपूर्ण कथाओं में से एक है और इसे विनायक चतुर्थी के पावन दिन पर प्रस्तुत किया जाता है।
विनायक चतुर्थी  जनवरी   14 जनवरी 2024, (रविवार)
पौष, शुक्ल चतुर्दशी 
 विनायक चतुर्थी  फरवरी   13 फरवरी 2024, मंगलवार
 माघ, शुक्ल चतुर्थी 
 विनायक चतुर्थी मार्च    13 मार्च 2024, बुधवार
फाल्गुन, शुक्ल चतुर्थी
 विनायक चतुर्थी अप्रैल    12 अप्रैल, शुक्रवार
चैत्र, शुक्ल चतुर्थी
विनायक चतुर्थी मई 11 मई 2024, शनिवार
 वैशाख, शुक्ल चतुर्थी
विनायक चतुर्थी जून  10 जून 2024, सोमवार
ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी 
विनायक चतुर्थी जुलाई  9 जुलाई, मंगलवार
आषाढ़, शुक्ल चतुर्थी
विनायक चतुर्थी अगस्त  8 अगस्त 2024, बृहस्पतिवार
श्रावण, शुक्ल चतुर्थी
विनायक चतुर्थी सितंबर  7 सितंबर 2024, शनिवार 
भाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी 
विनायक चतुर्थी अक्टूबर  6 अक्टूबर 2024, रविवार  
आश्विन, शुक्ल चतुर्थी
विनायक चतुर्थी नवंबर  5 नवंबर 2024, मंगलवार
कार्तिक, शुक्ल चतुर्थी 
विनायक चतुर्थी दिसंबर  5 दिसंबर 2024, बृहस्पतिवार 
मार्गशीर्ष, शुक्ल चतुर्थी

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