श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर,Sri Yaganti Uma Maheshwar Mandir

श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर,Sri Yaganti Uma Maheshwar Mandir

उमा महेश्वर मंदिर

श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर या यागंती भारत के आंध्र प्रदेश राज्य के कुरनूल जिले में भगवान शिव का एक मंदिर है। यागंती भारत के आंध्र प्रदेश राज्य के कुरनूल जिले में, कुरनूल शहर से लगभग 100 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर बनगनपल्ले-पीपुली रोड पर बनगनपल्ले (मंडल मुख्यालय) से 14 किमी पश्चिम में है। भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप को समर्पित यह एक प्राचीन मंदिर है, जहां भगवान शिव की पूजा शिवलिंग के रूप में नहीं बल्कि पत्थर से बनी मूर्ति के रूप में की जाती है। ऐसा माना जाता है कि देवतुल्य ऋषि अगस्त्य द्वारा निर्मित इस मंदिर में स्थापित नंदी की मूर्ति लगातार बढ़ रही है और इस कारण मंदिर के कई खंभों को भी हटाना पड़ा।
Sri Yaganti Uma Maheshwar Mandir

उमा महेश्वर मंदिर के बारे में कुछ बातें

  • इस मंदिर में भगवान शिव की अर्धनारीश्वर प्रतिमा है. यह प्रतिमा एक ही पत्थर को तराश कर बनाई गई है.
  • मंदिर के पास दो गुफाएं हैं. एक गुफा अगस्त्य ऋषि को समर्पित है. दूसरी गुफा में भगवान वेंकटेश्वर की वही पहली प्रतिमा स्थापित है, जिसे अगस्त्य ऋषि यहाँ स्थापित करना चाहते थे.
  • मंदिर परिसर में एक पवित्र जलकुंड है, जिसका नाम पुष्करिणी है. इस कुंड में नंदी की एक छोटी सी मूर्ति से पानी बहता है. इस कुंड में स्नान करने के बाद भक्तों को भगवान शिव के दर्शन होते हैं. यह कुंड साल के 12 महीने पानी से भरा रहता है.
  • मंदिर परिसर में एक भी कौवा देखने को नहीं मिलेगा.
  • मंदिर में नंदी की मूर्ति का आकार रहस्यमयी तरीके से लगातार बढ़ता जा रहा है. पहले मंदिर में आने वाले भक्त नंदी की परिक्रमा बड़ी ही सहजता से कर लेते थे, लेकिन अब ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं हो पाता.

उमा महेश्वर मंदिर में 20 साल में 1 इंच बढ़ती है मूर्ति

इस मंदिर में इस नंदी की प्रतिमा के लगातार बढ़ते आकार के कारण 1-2 स्तंभ भी हटा दिए गए हैं।  इस यागंती उमा महेश्वर मंदिर में स्थापित नंदी की मूर्ति का आकार हर 20 साल में करीब एक इंच बढ़ जाता है। इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए पुरातत्व विभाग की और से शोध भी किया गया था। इस शोध के मुताबिक कहा जा रहा था कि इस मूर्ति को बनाने में जिस पत्थर का इस्तेमाल किया गया था, उस पत्थर की प्रकृति बढ़ने वाली है। इसी वजह से मूर्ति का आकार बढ़ रहा है।

Sri Yaganti Uma Maheshwar Mandir

उमा महेश्वर मंदिर में भक्त नहीं कर पाते हैं परिक्रमा

कहा जाता है कि इस यागंती उमा महेश्वर मंदिर में आने वाले भक्त पहले नंदी की परिक्रमा आसानी से कर लेते थे, लेकिन लगातार बढ़ते आकार के चलते अब यहां परिक्रमा करना संभव नहीं है। विशाल होते नंदी को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने वहां से एक पिलर को भी हटा दिया है।

उमा महेश्वर मंदिर से जुड़े कुछ रहस्य

श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर अपने कुछ ऐसे रहस्यों के लिए जाना जाता है, जो आज भी अनसुलझे हैं। दरअसल इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ स्थापित नंदी की प्रतिमा अपने लगातार बढ़ते हुए आकार के कारण जानी जाती है। कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित नंदी की मूल प्रतिमा काफी छोटी थी लेकिन उसका आकार लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके कारण नंदी की प्रतिमा के आसपास के एक या दो स्तंभ भी हटाए गए हैं। पुरातत्व विभाग यह मानता है कि संभवतः नंदी की प्रतिमा का निर्माण एक ऐसे पत्थर से किया गया है, जिसकी प्रवृत्ति विस्तार करने की होती है।
इसके अलावा मंदिर में कौवों का दिखाई न देना भी अपने आप में एक रहस्य है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अगस्त्य ऋषि जब अपनी तपस्या कर रहे थे, तब कौवों द्वारा उनकी तपस्या में लगातार विघ्न उत्पन्न किया गया। इसके कारण अगस्त्य ऋषि ने कौवों को श्राप दे दिया, जिसके कारण इस स्थान से कौवे गायब हो गए। मंदिर परिसर में स्थित एक पवित्र जल कुंड है जिसे पुष्करिणी कहा जाता है। पुष्करिणी कुंड में जल नंदी की एक छोटी सी प्रतिमा से निकलता है। इसी कुंड में स्नान करने के बाद भक्तगण भगवान शिव के दर्शन करते हैं। साल के 12 महीने इस कुंड में जल भरा रहता है, अर्थात इसे सूखा हुआ कभी नहीं देखा गया। हालाँकि यह भी एक रहस्य है कि इस छोटे से जल कुंड में जल कहाँ से आता है। इस कुंड के जल स्रोत का पता आज तक कोई भी नहीं लगा पाया।

Sri Yaganti Uma Maheshwar Mandir

उमा महेश्वर मंदिर का प्राचीन इतिहास

महर्षि अगस्त्य उनमें से एक हैं, जिनकी पूजा भगवान श्री राम भी करते हैं। अगस्त्य ऋषि ने कुरनूल में श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर की स्थापना की। दरअसल अगस्त्य ऋषि पहले इस स्थान पर भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर स्थापित करना चाहते थे लेकिन उनकी मूर्ति टूटने के कारण उन्हें यहां स्थापित नहीं किया जा सका। इसके बाद अगस्त्य ऋषि ने भगवान शिव की कृपा से अपने अर्धनारीश्वर रूप को समर्पित इस मंदिर की स्थापना की। इसके साथ ही हर शिव मंदिर की तरह इस मंदिर में भी उनकी प्रिय नंदी की मूर्ति स्थापित की गई थी। वर्तमान दृश्य मंदिर की स्थापना 15वीं शताब्दी के दौरान विजयनगर साम्राज्य के संगम वंश के राजा हरिहर-बुक्का द्वारा की गई थी। इस मंदिर में पल्लव, चोल, चालुक्य और विजयनगर मंदिर साम्राज्य की परम्परा देखने को मिलती है।
भारत भर में स्थित शिव मंदिरों में, भगवान शिव की पूजा शिवलिंग के रूप में की जाती है लेकिन श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप की पूजा की जाती है। यहां स्थित भगवान शिव की अर्धनारीश्वर मूर्ति एक ही पत्थर को तराश कर बनाई गई है। इसके अलावा मंदिर के पास दो गुफाएं हैं। ऋषि अगस्त्य को समर्पित एक गुफा है, जहां उन्होंने भगवान शिव की पूजा की थी। दूसरी गुफा में भगवान वेंकटेश्वर की वही पहली मूर्ति स्थापित है, जिसे अगस्त्य ऋषि यहां स्थापित करना चाहते थे। ऐसा कहा जाता है कि जब भक्त तिरुपति में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन नहीं कर पाते हैं, तो कलियुग में श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर के पास स्थित गुफा में विराजमान भगवान वेंकटेश्वर भक्तों का कल्याण करेंगे।

यागंती, उमा महेश्वर मंदिर दर्शन का समय

प्रकार - समय
सामान्य - सुबह 6 बजे से दोपहर 1 बजे तक
सामान्य - दोपहर 3 बजे से रात 8 बजे तक

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