माता सीता की आरती ! Aarti of Mata Sita

माता सीता की आरती ! Aarti of Mata Sita

मान्यता है कि सीता माता की नित्या पूजा और आरती करने से मन प्रेम, स्नेह, दया, करुणा, त्याग, और आध्यात्म की भावनाओं से भर जाता है और मन को शांति मिलती है. सीता माता की पूजा करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं, धन की हानि नहीं होती, और वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याएं दूर हो जाती हैं. सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए सीता माता की पूजा करती हैं !
सीता माता को लक्ष्मी जी का अवतार भी माना जाता है. कहा जाता है कि जब भगवान राम ने विष्णु जी के अवतार के रूप में धरती पर अवतार लिया था, तब सीता माता ने लक्ष्मी के अवतार के रूप में जन्म लिया था. मान्यताओं के मुताबिक, जहां मां जानकी की सुबह-शाम पूजा-अर्चना की जाती है, वहां मां लक्ष्मी साक्षात विराजमान रहती हैं !

Aarti of Mata Sita

सीता माता को जनक नंदिनी, जानकी, जनकात्मजा, और जनकसुता जैसे नामों से भी जाना जाता है. शास्त्रों के मुताबिक, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मां जानकी राजा दशरथ के गोद में आई थीं. इस दिन को सीता जयंती के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन माता सीता की पूजा करने से हर दुख-दर्द से मुक्ति मिलती है. इस दिन गुजरात, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, और तमिलनाडु में बड़ी धूमधाम से सीता जयंती मनाई जाती है

माता सीता की आरती ! Aarti of Mata Sita

आरती श्री जनक दुलारी की।
सीता जी रघुवर प्यारी की॥

जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,

परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की॥

आरती श्री जनक दुलारी की।
सीता जी रघुवर प्यारी की॥

सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,

पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की॥

आरती श्री जनक दुलारी की।
सीता जी रघुवर प्यारी की॥

विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई,

सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की॥

आरती श्री जनक दुलारी की।
सीता जी रघुवर प्यारी की॥


सीता नवमी के दिन माता सीता की विधिवत पूजा करने से व्यक्ति को हर दुख-दर्द से निजात मिलती है और वैवाहिक जीवन की समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर माता सीता से अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं. सीता नवमी के दिन माता सीता के मंत्रों का जाप करने से जातकों के सौभाग्य में वृद्धि हो सकती है और सुख-सुविधाओं की भी प्राप्ति हो सकती है.
सीता नवमी के दिन माता सीता को प्रसन्न करने के लिए कई चीज़ें अर्पित की जाती हैं. इनमें से कुछ उपाय ये हैं:-
  • विवाह में देरी हो रही है, तो सीता नवमी के दिन हल्दी की पांच गांठ लें और इसे पीले कपड़े में बांध दें. मन में सुयोग्य पति की कामना लेकर उसे माता सीता के चरणों में अर्पित कर दें. इससे जल्द विवाह के योग बनेंगे.
  • सीता नवमी पर सीता चालीसा का पाठ करने से वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याएं हल हो जाती हैं.
  • सीता नवमी व्रत रखने से व्यक्ति को धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. महिलाओं को लंबा वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है और संतान की कामना पूरी होती है.

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