काली माता की आरती ! Kali Mata Ki Aarti ! अम्बे तू है जगदम्बे काली,Aarti of Kali Mata ! Ambe Too Hai Jagdambe Kali

काली माता की आरती ! Kali Mata Ki Aarti ! अम्बे तू है जगदम्बे काली

काली माता की आरती (Kali Mata Ki Aarti) को हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा घर की सुख – शांति को बनाएं रखने के लिए किया जाता है ! ऐसे तो काली माता की आरती (Kali Mata Ki Aarti) प्रत्येक दिन उनकी पूजा करने के बाद की जा सकती है !

काली माता की आरती करने के कई फ़ायदे माने जाते हैं:-

  • मां काली की पूजा करने से भक्तों के जीवन में सौभाग्य और भाग्य की प्रचुरता होती है !
  • मां काली भक्त को धन और समृद्धि प्रदान करती हैं !
  • मां काली की आरती का पाठ करने से भक्त को कष्ट, परेशानियां, नकारात्मकता और बुरी नज़रें नुकसान नहीं पहुंचातीं !
  • भक्त के जीवन में मानसिक और भावनात्मक स्थिरता के लिए मां काली की आरती का जाप किया जाता है !
  • वैवाहिक जीवन में स्थिरता और खुशहाली के लिए मां काली की आरती की जाती है !
  • मां काली की आरती का पाठ करने से भक्त को धैर्य की राह मिलती है !
  • रोज़ाना काली माता की आरती करने से बुराइयां दूर होती हैं और स्वस्थ, समृद्ध और शांतिपूर्ण जीवन प्राप्त होता है !
  • मां काली की पूजा से भय नाश, आरोग्य की प्राप्ति, स्वयं की रक्षा और शत्रुओं का नियंत्रण होता है!
  • मां काली की पूजा से तंत्र-मंत्र के सारे असर समाप्त हो जाते हैं!
  • मां काली की पूजा का उपयुक्त समय रात्रि काल होता है !

Aarti of Kali Mata ! Ambe Too Hai Jagdambe Kali

काली माता की आरती ! Kali Mata Ki Aarti

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारे, तेरी आरती ॥

तेरे भक्त जनो पर,
भीड़ पड़ी है भारी माँ ।
दानव दल पर टूट पडो,
माँ करके सिंह सवारी ।

सौ-सौ सिंहो से बलशाली,
अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टो को पलमे संहारती ।
ओ मैया हम सब उतारे, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारे, तेरी आरती ॥

माँ बेटे का है इस जग में,
बड़ा ही निर्मल नाता ।
पूत – कपूत सुने है पर न,
माता सुनी कुमाता ॥

सब पे करुणा दरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखडे निवारती ।
ओ मैया हम सब उतारे, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारे, तेरी आरती ॥

नहीं मांगते धन और दौलत,
न चांदी न सोना मां ।
हम तो मांगे मां तेरे मन में,
इक छोटा सा कोना ॥

सबकी बिगडी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती ।
ओ मैया हम सब उतारे, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारे, तेरी आरती ॥

चरण शरण मे खडे तुम्हारी,
ले पूजा की थाली ।
वरद हस्त सर पर रख दो,
मॉ संकट हरने वाली ।

मॉ भर दो भक्ति रस प्याली,
अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती ।
ओ मैया हम सब उतारे, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।

तेरे ही गुण गाए भारती,
ओ मैया हम सब उतारे, तेरी आरती ॥

काली माता आरती !  Kali Mata Ki Aarti

जय काली माता, मा जय महा काली माँ !
रतबीजा वध कारिणी माता !

सुरनर मुनि ध्याता, माँ जय महा काली माँ !!
दक्ष यज्ञ विदवंस करनी माँ शुभ निशूंभ हरलि !

मधु और कैितभा नासिनी माता !
महेशासुर मारदिनी…ओ माता जय महा काली माँ !!

हे हीमा गिरिकी नंदिनी प्रकृति रचा इत्ठि !
काल विनासिनी काली माता !

सुरंजना सूख दात्री हे माता !!
अननधम वस्तराँ दायनी माता आदि शक्ति अंबे !

कनकाना कना निवासिनी माता !
भगवती जगदंबे ओ माता जय महा काली माँ !!

दक्षिणा काली आध्या काली काली नामा रूपा !
तीनो लोक विचारिती माता धर्मा मोक्ष रूपा !!

!! जय महा काली माँ !!

आरती श्री काली माता की !  Kali Mata Ki Aarti

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ,
हाथ जोड तेरे द्वार खडे।
पान सुपारी ध्वजा नारियल 
ले ज्वाला तेरी भेट धरेसुन॥१॥

जगदम्बे न कर विलम्बे, 
संतन के भडांर भरे।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, 
जै काली कल्याण करे ॥२॥

बुद्धि विधाता तू जग माता ,
मेरा कारज सिद्व रे।
चरण कमल का लिया आसरा 
शरण तुम्हारी आन पडे॥३॥

जब जब भीड पडी भक्तन पर, 
तब तब आप सहाय करे।
गुरु के वार सकल जग मोहयो, 
तरूणी रूप अनूप धरेमाता॥४॥

होकर पुत्र खिलावे, कही भार्या 
भोग करेशुक्र सुखदाई सदा।
सहाई संत खडे जयकार करे ॥५॥

ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये भेट
 तेरे द्वार खडेअटल सिहांसन।
बैठी मेरी माता, सिर सोने का 
छत्र फिरेवार शनिचर॥६॥

कुकम बरणो, जब लकड पर हुकुम करे ।
खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिये, 
रक्त बीज को भस्म करे॥७॥

शुम्भ निशुम्भ को क्षण मे मारे ,
महिषासुर को पकड दले ।
आदित वारी आदि भवानी ,
जन अपने को कष्ट हरे ॥८॥

कुपित होकर दनव मारे, 
चण्डमुण्ड सब चूर करे।
जब तुम देखी दया रूप हो, 
पल मे सकंट दूर करे॥९॥

सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता ,
जन की अर्ज कबूल करे ।
सात बार की महिमा बरनी, 
सब गुण कौन बखान करे॥१०॥

सिंह पीठ पर चढी भवानी, 
अटल भवन मे राज्य करे।
दर्शन पावे मंगल गावे ,
सिद्ध साधक तेरी भेट धरे ॥११॥

ब्रह्मा वेद पढे तेरे द्वारे, 
शिव शंकर हरी ध्यान धरे।
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती, 
चॅवर कुबेर डुलाय रहे॥१२॥

जय जननी जय मातु भवानी , 
अटल भवन मे राज्य करे।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, 
मैया जै काली कल्याण करे॥१३॥ 

॥ इति आरती श्री कालीमाता सम्पूर्णम ॥

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