सीता अष्टोत्तर-शतनाम-नामावली: ! Mata Sita Ashtottara-Shatnaam-Namavali !

सीता अष्टोत्तर-शतनाम-नामावली: ! Sita Ashtottara-Shatnaam-Namavali !

श्रीमद् आनंद रामायण अंतर्गत सीता अष्टोत्तर-शतनाम-नामावली:-

हिंदू धर्म की महान महिलाओं में से एक मां सीता को उनके विशेष महत्व को दर्शाने के लिए, 'सीता के 108 नाम' से सम्मानित किया जाता है. ये नाम सीता की विशेषताओं, गुणों, और शक्तियों को दर्शाते हैं !
मान्यता है कि वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को जगत जननी मां सीता का प्राकट्य हुआ था. इसलिए, हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता जयंती मनाई जाती है. इस दिन स्नान-ध्यान के बाद, भगवान श्रीराम और मां सीता की पूजा की जाती है. 
मान्यता है कि सीता नवमी के दिन मां जानकी के 108 नामों का मंत्र जप करने से बिगड़े काम बन जाते हैं. वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को सीता जयंती मनाई जाती है. इस दिन स्नान-ध्यान करने के बाद, भगवान राम और मां सीता की पूजा की जाती है. सीता मंत्र का जाप करने से कई फ़ायदे माने जाते हैं:-
  • मनपसंद जीवनसाथी मिलना
  • दाम्पत्य जीवन में प्रेम बढ़ना
  • जीवन में खुशहाली आना
  • जीवन के कष्ट खत्म होना
  • रुके हुए काम पूरे होना
  • धन-धान्य और संपत्ति में वृद्धि होना
  • आत्मविश्वास बढ़ना !
 Mata Sita Ashtottara-Shatnaam-Namavali !

सीता अष्टोत्तर-शतनाम-नामावली: ! Sita Ashtottara-Shatnaam-Namavali !

  1. ॐ सीतायै नमः।
  2. ॐ जानक्यै नमः।
  3. ॐ देव्यै नमः।
  4. ॐ वैदेह्यै नमः।
  5. ॐ राघवप्रियायै नमः।
  6. ॐ रमायै नमः।
  7. ॐ अवनिसुतायै नमः।
  8. ॐ रामायै नमः।
  9. ॐ राक्षसान्तप्रकारिण्यै नमः।
  10. ॐ रत्नगुप्तायै नमः॥ १० ॥
  11. ॐ मातुलिङ्ग्यै नमह्।
  12. ॐ मैथिल्यै नमः।
  13. ॐ भक्ततोषदायै नमः।
  14. ॐ पद्माक्षजायै नमः।
  15. ॐ कञ्जनेत्रायै नमः।
  16. ॐ स्मितास्यायै नमः।
  17. ॐ नूपुरस्वनायै नमः।
  18. ॐ वैकुण्ठनिलयायै नमः।
  19. ॐ मायै नमः।
  20. ॐ श्रियै नमः॥ २० ॥
  21. ॐ मुक्तिदायै नमः।
  22. ॐ कामपूरण्यै नमः।
  23. ॐ नृपात्मजायै नमः।
  24. ॐ हेमवर्णायै नमः।
  25. ॐ मृदुलाङ्ग्यै नमः।
  26. ॐ सुभाषिण्यै नमः।
  27. ॐ कुशाम्बिकायै नमः।
  28. ॐ दिव्यदायै नमः।
  29. ॐ लवमात्रे नमः।
  30. ॐ मनोहरायै नमः॥ ३० ॥
  31. ॐ हनुमद् वन्दितपदायै नमः।
  32. ॐ मुक्तायै नमः।
  33. ॐ केयूरधारिण्यै नमः।
  34. ॐ अशोकवनमध्यस्थायै नमः।
  35. ॐ रावणादिकमोहिण्यै नमः।
  36. ॐ विमानसंस्थितायै नमः।
  37. ॐ सुभृवे नमः।
  38. ॐ सुकेश्यै नमः ।
  39. ॐ रशनान्वितायै नमः ।
  40. ॐ रजोरूपायै नमः॥ ४० ॥
  41. ॐ सत्वरूपायै नमः ।
  42. ॐ तामस्यै नमः।
  43. ॐ वह्निवासिन्यै नमः।
  44. ॐ हेममृगासक्त चित्तयै नमः ।
  45. ॐ वाल्मीकाश्रम वासिन्यै नमः ।
  46. ॐ पतिव्रतायै नमः ।
  47. ॐ महामायायै नमः ।
  48. ॐ पीतकौशेय वासिन्यै नमः ।
  49. ॐ मृगनेत्रायै नमः।
  50. ॐ बिम्बोष्ठ्यै नमः॥ ५० ॥
  51. ॐ धनुर्विद्या विशारदायै नमः ।
  52. ॐ सौम्यरूपायै नमः
  53. ॐ दशरथस्तनुषाय नमः ।
  54. ॐ चामरवीजितायै नमः।
  55. ॐ सुमेधा दुहित्रे नमः।
  56. ॐ दिव्यरूपायै नमः।
  57. ॐ त्रैलोक्य पालिन्यै नमः।
  58. ॐ अन्नपूर्णायै नमः ।
  59. ॐ महाल्क्ष्म्यै नमः ।
  60. ॐ धिये नमः॥ ६० ॥
  61. ॐ लज्जायै नमः ।
  62. ॐ सरस्वत्यै नमः ।
  63. ॐ शान्त्यै नमः ।
  64. ॐ पुष्ट्यै नमः ।
  65. ॐ शमायै नमः ।
  66. ॐ गौर्यै नमः ।
  67. ॐ प्रभायै नमः ।
  68. ॐ अयोध्यानिवासिन्यै नमः ।
  69. ॐ वसन्तशीतलायै नमः ।
  70. ॐ गौर्यै नमः॥ ७० ॥
  71. ॐ स्नान सन्तुष्ट मानसायै नमः ।
  72. ॐ रमानाम भद्रसंस्थायै नमः ।
  73. ॐ हेमकुम्भपयोधरायै नमः ।
  74. ॐ सुरार्चितायै नमः ।
  75. ॐ धृत्यै नमः ।
  76. ॐ कान्त्यै नमः ।
  77. ॐ स्मृत्यै नमः ।
  78. ॐ मेधायै नमः ।
  79. ॐ विभावर्यै नमः ।
  80. ॐ लघूधरायै नमः॥ ८० ॥
  81. ॐ वारारोहायै नमः ।
  82. ॐ हेमकङ्कणमण्दितायै नमः ।
  83. ॐ द्विजपत्न्यर्पितनिजभूषायै नमः ।
  84. ॐ रघवतोषिण्यै नमः ।
  85. ॐ श्रीरामसेवनरतायै नमः ।
  86. ॐ रत्नताटङ्क धारिण्यै नमः ।
  87. ॐ रामवामाङ्कसंस्थायै नमः ।
  88. ॐ रामचन्द्रैक रञ्जिन्यै नमः ।
  89. ॐ सरयूजल सङ्क्रीडा कारिण्यै नमः ।
  90. ॐ राममोहिण्यै नमः॥ ९० ॥
  91. ॐ सुवर्ण तुलितायै नमः ।
  92. ॐ पुण्यायै नमः ।
  93. ॐ पुण्यकीर्तये नमः ।
  94. ॐ कलावत्यै नमः ।
  95. ॐ कलकण्ठायै नमः ।
  96. ॐ कम्बुकण्ठायै नमः ।
  97. ॐ रम्भोरवे नमः ।
  98. ॐ गजगामिन्यै नमः ।
  99. ॐ रामार्पितमनसे नमः ।
  100. ॐ रामवन्दितायै नमः॥ १०० ॥
  101. ॐ राम वल्लभायै नमः ।
  102. ॐ श्रीरामपद चिह्नाङ्गायै नमः ।
  103. ॐ राम रामेति भाषिण्यै नमः ।
  104. ॐ रामपर्यङ्कशयनायै नमः ।
  105. ॐ रामाङ्घ्रिक्षालिण्यै नमः ।
  106. ॐ वरायै नमः ।
  107. ॐ कामधेन्वन्नसन्तुष्टायै नमः ।
  108. ॐ मातुलिङ्गकराधृतायै नमः ।
  109. ॐ दिव्यचन्दन संस्थायै नमः ।
  110. ॐ श्रियै नमः।
  111. ॐ मूलकासुरमर्दिन्यै नमः॥ १११ ॥

॥ श्रीसीताष्टोत्तरशतनामावलिः समप्ता ॥

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