भगवान शिव कौन थे

भगवान शिव कौन थे "who was lord shiva

 कौन थे  शिव

भगवान शिव हिन्दू धर्म के त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, और महेश) में एक महत्त्वपूर्ण देवता हैं। वे सृष्टि, स्थिति और संहार के देवता माने जाते हैं। शिव का संसार में विभिन्न रूपों में पूजन होता है और उन्हें परम तत्वों, आत्मा के प्रतीक, और आध्यात्मिकता का प्रतिष्ठान दिया जाता है।
भगवान शिव को साधारणत: त्रिशूल, धारा, सर्प, गंगा, चंद्रमा, ध्यान और तप के साथ दिखाया जाता है। उन्हें भक्ति, तपस्या, ध्यान, और संसारिक जीवन के उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जाता है। उनके ध्यान और पूजन से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति का आशा रहती है।
शिव के विभिन्न अवतारों और कथाओं में उनका महत्त्व और धर्मिक उपलब्धि का वर्णन किया गया है। उनकी पूजा और उपासना महाशिवरात्रि जैसे महत्त्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर की जाती है।
पुराणों के अनुसार भगवान शिव के प्रारम्भिक शिष्य सप्तऋषि माने जाते हैं। मान्यता है कि सप्तऋषियों ने भगवान शिव के ज्ञान का प्रचार प्रसार पृथ्वी पर किया था जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। मान्यता है कि भगवान शिव ने ही गुरु शिष्य की परंपरा का आरंभ किया था। शिव के शिष्यों में बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेंद्र, प्राचेतस मनु, भारद्वाज शामिल थे।
हिन्दू धर्म में, भगवान शिव को 'सर्वोत्तम' माना जाता है, जिसका अर्थ है कि उनका कोई आदि नहीं है। वे समय के बेहद पहले से ही हैं और वे अनंत हैं। हिन्दू धर्म में शिव त्रिमूर्ति का एक हिस्सा हैं जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) शामिल हैं। त्रिमूर्ति के अनुसार, तीनों देवताओं का एक ही स्वरूप है जो सृष्टि, पालन और संहार के कार्यों को संभालते हैं। इसलिए, शिव का कोई आदि नहीं है, वे सदा से ही मौजूद रहे हैं।

भगवान शिव की उत्पत्ति 

हिंदू धर्म में, भगवान शिव की उत्पत्ति के बारे में कोई निश्चित जन्म कथा नहीं है। वे 'अनादि' और 'अनंत' माने जाते हैं, जिनकी शुरुआत और अंत नहीं होती। कई पुराणों और कथाओं में व्यक्तिगत रूप से उनकी उत्पत्ति की कहानियां हैं, जैसे कि उनके माता पिता, उनके जन्म के परिणामस्वरूप उनकी उत्पत्ति की कथाएं। लेकिन ये कथाएं बड़े ही प्राचीन और परंपरागत हैं और उनकी निष्कर्षता या ऐतिहासिकता की निश्चितता को लेकर संदेह रहता है।
भगवान शिव को सनातन परंपरा में सर्वोत्तम और सर्वशक्तिमान देवता के रूप में माना जाता है, जो सृष्टि, स्थिति, और संहार के साक्षात्कारी हैं। उनकी उत्पत्ति का ज्ञान सिर्फ आध्यात्मिक स्तर पर होता है, जो उनके अनन्तता और अद्वितीयता को दर्शाता है।
  1. भगवान शिव के धर्म
  2. शिव का अर्थ

शिव के बारे में कई रोचक और महत्त्वपूर्ण बातें हैं।

  1. त्रिमूर्ति का एक हिस्सा: शिव त्रिमूर्ति का एक हिस्सा हैं, जिनमें वे ब्रह्मा, विष्णु और अपने आप के रूपों में प्रकट होते हैं।
  2. अर्धनारीश्वर रूप: शिव का अर्धनारीश्वर रूप, जिसमें वे पुरुष और प्रकृति के संयोजन का प्रतीक होते हैं, जो सृष्टि की समर्पितता और समता को दर्शाता है।
  3. तपस्वी और ध्यान का प्रतीक: शिव तपस्वी और ध्यान का प्रतीक माने जाते हैं। उनकी ध्यानाधारित जीवनशैली को उनके भक्तों को मार्गदर्शन प्रदान करती है।
  4. नीलकंठ: भगवान शिव को 'नीलकंठ' भी कहा जाता है, जो उनके गले के नीले रंग के कारण है। यह उनके नेत्रों के शक्तिशाली गहरे नीले रंग को दर्शाता है।
  5. महादेव: शिव को 'महादेव' कहा जाता है, जो उनकी महानता और शक्ति को दर्शाता है।
  6. भक्ति और वैराग्य के प्रतीक: शिव की भक्ति और वैराग्य को माना जाता है जो उनके भक्तों को मार्गदर्शन करता है।
  7. महाशिवरात्रि: भगवान शिव की विशेष पूजा महाशिवरात्रि के दिन की जाती है, जो उनके महानता और भक्ति में शक्ति लाने का अवसर प्रदान करती है।
शिव के गुण, महानता, और धर्मिक महत्त्व को समझने के लिए, उनके भक्तों द्वारा मान्यताओं और कथाओं को महत्त्व देना बहुत महत्त्वपूर्ण है।
  1. जानें भगवान शिव के प्रथम शिष्य कौन थे और पहला भक्त कौन है
  2. जानें भगवान शिव के प्रथम शिष्य कौन थे

दिलचस्प घटना  भगवान शिव के और पार्वती के बीच

एक रोचक शिव कथा है जो भगवान शिव के और पार्वती के बीच हुई एक दिलचस्प घटना का वर्णन करती है।
कथा कहती है कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती बाजार में घूम रहे थे। शिवजी ने एक गुलाब के फूल को देखा और उसकी सुंदरता पर प्रशंसा की। पार्वती ने शिवजी से पूछा, "क्या आपको यकीन है कि यह फूल सबसे सुंदर है?"
शिवजी ने कहा, "हां, यकीन है।" परंतु पार्वती ने उन्हें परीक्षा में लेने का फैसला किया। उन्होंने कहा, "ठीक है, हम इस फूल को एक छोटे से बच्चे के पास ले जाते हैं और देखते हैं कि वह कौन सा फूल उन्हें सबसे सुंदर लगता है।"
शिवजी और पार्वती ने एक छोटे से बच्चे के पास जाकर उसे तीन फूलों का बोझ दिया। उन्होंने बच्चे से पूछा, "कौन सा फूल तुम्हें सबसे सुंदर लगता है?"
बच्चा देखते ही रह गया और फिर तीनों फूलों को देखकर एक पूरी तरह से खुश हो गया। फिर उसने उन्हें वापस दे दिया और कहा, "मुझे तो तीनों ही फूल बहुत ही सुंदर लगे हैं!"
इस कथा से सिखने को बहुत कुछ है। यह दिखाता है कि सुंदरता का अर्थ हर किसी के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है और हर व्यक्ति की प्राथमिकताएं और पसंद भिन्न हो सकती हैं।

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