Basant Panchami माँ सरस्वती का दिवस बसंत पंचमी महत्व रोचक तथ्य ,Basant Panchami Day of Mother Saraswati Basant Panchami Importance Interesting facts

माँ सरस्वती का दिवस बसंत पंचमी महत्व रोचक तथ्य

Basant Panchami माँ सरस्वती का दिवस

शास्त्रानुसार बसंत पंचमी को विद्या की देवी माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस है।विशेषकर विद्यार्थियों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि बसंत पंचमी पर्व के बाद या आसपास ही विद्यार्थियों की परीक्षाएँ शुरू हो जाती हैं।इस दिन विद्यार्थी माँ सरस्वती की विधि-विधान से पूजन कर सफलता के लिए माँ से आशीर्वाद माँगते है। विद्यार्थियों के लिए इस दिन से सारस्वत्य मंत्र का अनुष्ठान बहुत ही मंगलकारी होता है।सारस्वत्य मंत्र की दीक्षा समर्थ सद्गुरु से मिलती है।उस मंत्र का जप करने से विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति में गजब का लाभ होता है।मंत्र जप से बुद्धि कुशाग्र होती है।विद्यार्थियों का बहुआयामी विकास स्वतः होने लगता है। विशेष - मंत्र का अनुष्ठान करने से वह मंत्र सिद्ध हो जाता है, फिर मंत्र जप से सप्त केन्द्रों की सुषुप्त शक्तियां जाग्रत हो जाती है।और हर क्षेत्र में विद्यार्थी सफलता प्राप्त कर लेता है। इस दिन विद्यार्थी को सफेद वस्त्र पहनना चाहिए।माँ को सफेद फूल प्रिय हैं।माँ को चावल की खीर का भोग लगाकर फिर प्रसाद रूप में स्वयं ग्रहण करना चाहिए।इस दिन उपवास भी रख सकते हैं। अतः हमारे महान सनातन धर्म में बसंत पंचमी त्यौहार का सभी के लिए मत्त्वपूर्ण दिन है।विद्यार्थियों के लिए अपनी बल, बुद्धि, विद्या विकसित करने का विशेष दिन है। इस वर्ष यह पावन पर्व 14 फरवरी यानी 'मातृ-पितृ पूजन दिवस" के दिन ही आ रहा है, जिससे सभी बच्चे-बड़े माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ-साथ अपने माता-पिता का भी पूजन कर उनसे भी आशीर्वाद लेकर अपना भाग्योदय शीघ्रताशीघ्र उदय कर सकेंगे।

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बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है. बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती के अलावा भगवान विष्णु के साथ कामदेव की पूजा की जाती है. बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी, श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से जाना जाता है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सभी शुभ कार्यों के लिए बेहद शुभ है, इसलिए इस दिन नवीन विद्या प्राप्ति, गृह प्रवेश और अन्य कार्यों की शुरुआत बिना कोई मुहूर्त देखे किया जा सकता है. इस दिन लोग पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं वसंत पंचमी को माँ सरस्वती का जन्मदिवस भी कहा जाता है, इसलिये इसे  माँ सरस्वती के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाते है . इसके पीछे एक छोटी सी कहानी है- “हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी तब हर तरफ शांति व्याप्त थी कही कोई ध्वनि नहीं सुनाई पड़ रही थी. उस समय भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने अपने कमंडल से जल लेकर धरती पर छिड़का जिससे एक अदभुत शक्ति एवं चतुर्भुज हाथों वाली नारी का अवतार हुआ, जिनके हाथों में वीणा, माला, पुस्तक इत्यादि थी और जब उन्होंने ब्रह्माजी के कहने पर वीणा बजाई तो हर तरफ संसार मे ध्वनि फैल गई, तब ब्रह्माजी ने वीणा की देवी को सरस्वती के नाम से पुकारा जोकि ज्ञान और संगीत की भी देवी कहलाती है. इसी कारण इस दिन को माँ सरस्वती की उत्पत्ति के रूप मे मनाया जाता है.

बसंत पंचमी के रोचक तथ्य

  1. हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन बच्चों को रीति के अनुसार अक्षर ज्ञान दिया जाता है, जिसमें उन्हें पहला शब्द लिखना सिखाया जाता है। इसी तरह कामदेव को बसंत का दूत माना जाता है। कामदेव उल्लास और उमंग के प्रतीक हैं। माना जाता है कि जीवन में उत्साह और उमंग कामदेव ही भरते हैं और उन्हीं के आशीर्वाद से जीवन में सभी क्रियाक्लापों का संचालन होता है।
  2. इस दिन देवी सरस्वती और भगवान कामदेव की पूजा अर्चना होती है। मां सरस्वती की पूजा ज्ञान, संगीत और कला की देवी के रूप में किया जाता है। यही कारण है कि इस दिन लगभग सभी स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। माना जाता है कि आज ही के दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था।
  3. बसंत ऋतु की इन्हीं खूबियों के कारण कई कवियों ने इस पर अपनी रचनाएं लिखी है। सिनेमा जगत में कुछ गीत ऐसे भी हैं, जो बसंत पर लिखे गए और हमेशा के लिए अमर हो गए। इस ऋतू के बारे में गीता में भगवान कृष्ण ने कहा था- ऋतुओं में मैं बसंत हूं।
  4. किस्सा यहीं ख़त्म नहीं हुआ। उसके बाद जो होने वाला था, वो भारतीय इतिहास का सबसे गौरवमयी छन बनने वाला था। गौरी ने पृथ्वीराज की वो विद्या देखने की इच्छा जताई, जिसके बारे में उसने लोगों और अपने अधिकारीयों से सुना था। कार्यक्रम के अनुसार गौरी एक ऊंचे स्थान पर बैठा और उसने तवे पर चोट मारकर पृथ्वीराज को बाण चलाने की आज्ञा दी।

बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
यह देवी सरस्वती की पूजा के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी को मनाया जाएगा। बसंत पंचमी के शुभ दिन पर स्कूलों और कॉलेजों में सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सरस्वती ज्ञान, शिक्षा और सूचना की देवी हैं।

बसंत पंचमी में हम क्या करते हैं?
इस दिन को माघ पंचमी भी कहा जाता है. पूरे भारत में बसंत पंचमी का पर्व बहुत हर्ष-उल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है. साहित्य, शिक्षा, कला इत्यादि के क्षेत्र से जुड़े लोग बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा-आराधना करते हैं

बसंत पंचमी किसका त्योहार है?
बसंत पंचमी या श्री पंचमी हिन्दू त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करते हैं।

बसंत पंचमी 2024 पूजा विधि, अनुष्ठान और सामग्री:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पीले और सफेद रंग के कपड़े पहनें और मां सरस्वती की पूजा करें। देवी की मूर्ति या चित्र को गंगा जल से स्नान कराकर और पीले वस्त्र पहनाकर अपने पूजा स्थान पर स्थापित करें।

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