बसंत पंचमी सरस्वती माता की व्रत कथा मां सरस्वती का स्वरूप, Basant Panchami fast story of Saraswati Mata Nature of Mother Saraswati

बसंत पंचमी सरस्वती माता की व्रत कथा मां सरस्वती का स्वरूप  

सरस्वती माता की व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार,-एक बार की बात है, सुकेता नाम का एक राजा रहता था। वह एक अच्छा इंसान और धर्म का अनुयायी था। उसने धर्म के नियमों के अनुसार राज्य पर शासन किया। राजा अपने राज्य के नागरिकों की बहुत अच्छी देखभाल करता था। उसकी सुवेदी नाम की एक बहुत ही सुंदर पत्नी थी। एक बार सुकेता के राज्य पर आक्रमण हुआ और सुकेता को अपने शत्रुओं से युद्ध करने को विवश होना पड़ा। दुश्मन मजबूत थे और सुकेता अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं था और अपनी जान बचाने के लिए युद्ध के मैदान से भाग गया। उसके साथ उसकी पत्नी भी भाग गई। वे दोनों अपनी जान बचाकर भाग गए और समय रहते एक जंगल में पहुंच गए। जब वे जंगल में पहुंचे, वे थक चुके थे और भूखे थे।

 Basant Panchami fast story of Saraswati Mata Nature of Mother Saraswati

उन्हें जो कुछ भी मिला उसे वे खा रहे थे लेकिन फिर भी उनकी भूख शांत नहीं हो रही थी ल्यूंकि उनको जो कुछ भी खाने को मिला था वह काफी कम था। भूख ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था और राजा एक समय चल भी नहीं पा रहा था। राजा नीचे गिर गया और रानी अपनी जाँघ को राजा के लिए तकिये के रूप में बनाकर उसे शांत करने की कोशिश कर रही थी।
वह बहुत चिंतित थी और उसने भगवान से कुछ मदद की प्रार्थना की जिससे उनको चिंताओं और दर्द से छुटकारा मिल सके। संयोग से ऋषि अंगिरस उस रास्ते से जा रहे थे और उन्होंने राजा और रानी को देखा। उन्होंने रानी से पूछा कि वह कौन है और वे जंगल में कैसे आए हैं। रानी ने ऋषि को अपनी कहानी सुनाई। ऋषि को पता चल गया कि वे राजा और रानी है। फिर उन्होंने रानी से कहा कि पास में ही पंचवटी तालाब के पास 'दुर्गा क्षेत्र' नामक एक जगह है। उन्होंने रानी को पूरी भक्ति के साथ देवी की पूजा करने की सलाह दी। ऋषि ने रानी और राजा को साथ में चलने के लिए कहा। वे दोनों ऋषि के साथ उस स्थान पर चले गए। ऋषि ने राजा और रानी से पवित्र तालाब में स्नान करने को कहा। राजा और रानी स्नान करके लौटे। ऋषि ने उन्हें देवी दुर्गा और सरस्वती की पूजा करवाई। उन्होंने उनसे षोडशोपचार पूजा करवाई, जो 16 विभिन्न प्रकार की पूजा या सेवा करके देवी को प्रसन्न करती है। यह पूजा 9 दिनों तक तक चली।बसंत पंचमी की
दूसरी कथा: एक बार देवी सरस्वती ने भगवान श्रीकृष्ण को देखा और वे उन पर मोहित हो गई थी। वह उन्हें पति के रूप में पाना चाहती थी, लेकिन भगवान कृष्ण ने उन्हें बताया कि वे केवल राधारानी के प्रति समर्पित हैं। लेकिन मां सरस्वती को मनाने के लिए भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि आज से माघ के शुक्ल पक्ष की पंचमी को समस्त विश्व तुम्हारी विद्या व ज्ञान की देवी के रुप में पूजा करेगा। कहते हैं उसी समय भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले देवी सरस्वती की पूजा की तब से ही बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा लोग करते आ रहे हैं।

वसंत पंचमी के उपायों से पाएं सफलता

  • वसंत पंचमी के दिन आप मां सरस्वती को बूंदी, बेसन के लड्डू, केसर भात, पीले चावल, मालपुआ आादि भोग लगा सकते हैं. इससे देवी सरस्वती प्रसन्न होती हैं और भक्तों को शिक्षा, प्रतियोगिता, कला और संगीत के क्षेत्र में सफलता प्रदान करती हैं.
  • वसंत पंचमी को सरस्वती पूजा करते समय देवी शारदा के चरणों में पेन, कॉपी, पेंसिल आदि रखना चाहिए. इससे कुंडली में बुध ग्रह दोष दूर होगा. बुध के मजबूत होने से आपकी बुद्धि और निर्णय क्षमता बेहतर होगी.
  • यदि आपके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, वह एकाग्र होकर नहीं पढ़ता है तो आप वसंत पंचमी को माता सरस्वती को हरे रंगवाले फल और पीले फूल बच्चे को अर्पित करने को कहें. इससे बुध ग्रह सही होगा. समस्या दूर होगी.
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मां सरस्वती का स्वरूप

माता सरस्वती को पीला और सफेद रंग बहुत ही प्रिय होता है। सफेद रंग पवित्रता और पीला रंग सकारात्मकता का प्रतीक होत है। मां सरस्वती हंस और मोर की सवारी करती हैं। मोर और हंस सुंदरता व नृत्य को दर्शाता है। इस कारण से माता सरस्वती को हंसवाहिनी कहा जाता है। मां सरस्वती को नदी के किनारे बैठा हुआ दिखाई देता है। नदी जीवन का अस्तित्व है। देव सरस्वती हमेशा कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। शास्त्रों मे कमल का फूल ज्ञान और पवित्रता को दर्शाता है। इसके अलावा माता के हाथों में वीणा और वेद सुशोभित होती है। वीणा और वेद, विद्या, ज्ञान, संगीत, नृत्य और कला को प्रदर्शित करते हैं। 

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