तुलसी प्रकृति के अनुकूल औषधि और तुलसी के लाभ ,Tulsi is nature friendly medicine and benefits of Tulsi.

तुलसी प्रकृति के अनुकूल औषधि और तुलसी के लाभ

तुलसी एक पवित्र पौधा है जिसमें औषधीय और आध्यात्मिक दोनों गुण हैं. आयुर्वेद में इसे "प्रकृति की मातृ औषधि" और "जड़ी-बूटियों की रानी" जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है. तुलसी में विटामिन सी और जिंक भरपूर मात्रा में होता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-फंगल गुण होते हैं. तुलसी के कुछ और फ़ायदे ये हैं:-

तुलसी के लाभ

  • प्राकृतिक प्रतिरक्षा उत्प्रेरक
  • बुखार कम कर देता है ( ज्वरनाशक ) और दर्द (दर्दनाशक)
  • सर्दी, खांसी और अन्य श्वसन संबंधी विकारों को कम करता है
  • तनाव और रक्तचाप को कम करता है
  • कैंसर रोधी गुण
  • हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा
  • मधुमेह रोगियों के लिए अच्छा
  • गुर्दे की पथरी और गठिया में उपयोगी

Tulsi is nature friendly medicine and benefits of Tulsi.

तुलसी प्रकृति के अनुकूल औषधि  क्या है जानिए

  • तुलसी की प्रकृति क्या है?
तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक द्विबीजपत्री तथा शाकीय, औषधीय पौधा है। यह झाड़ी के रूप में उगता है और १ से ३ फुट ऊँचा होता है। इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती हैं। पत्तियाँ १ से २ इंच लम्बी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं।
  • तुलसी एक अनुकूलन है?
एक शक्तिशाली एडाप्टोजेन के रूप में मानी जाने वाली तुलसी में औषधीय क्रियाओं का एक अनूठा संयोजन होता है जो भलाई और लचीलेपन को बढ़ावा देता है।
  • तुलसी के औषधीय उपयोग क्या है?
तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है। इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खॉसी, दंत रोग और श्वास सम्बंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। आज के समय में तनाव बड़ी समस्या बन गई है और इससे आराम पाने के लिए लोग कई तरह की थेरेपी अपनाते हैं। तुलसी पत्ते इस समस्या को कम करने में उपयोगी पाए गए हैं।

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तुलसी प्रकृति के अनुकूल औषधि इन ग्रंथों में तुलसी को तीक्ष्ण भी लिखा

यद्यपि इन ग्रंथों में तुलसी को तीक्ष्ण भी लिखा है, पर उसकी तीक्ष्णता केवल विशेष प्रकार की और छोटे कृमियों को दूर करने तक ही सीमित है। जिस प्रकार वर्तमान समय की कीटाणुनाशक और दुर्गंध मिटाने वाली औषधियाँ कुछ भी अधिक हो जाने से हानि भी हो सकती है, वैसी बात तुलसी में नहीं है। यह एक घरेलू वनस्पति है, जिसके प्रयोग में किसी प्रकार का खतरा नहीं रहता। इस दृष्टि से वह अन्यान्य डॉक्टरी और वैद्यक औषधियों से भी श्रेष्ठ सिद्ध होती है। तुलसी को प्रायः भगवान के प्रसाद, चरणामृत, पंचामृत आदि में मिलाकर सेवन किया जाता है, इसलिए वह एक प्रकार से भोजन का अंश बन जाती है जबकि अन्य औषधियों को तरह-तरह की रासायनिक प्रक्रियाएँ करके व्यवहार में लाया जाता है, जिससे उनके स्वाभाविक गुणों में बहुत अंतर पड़ जाता है। वहाँ तुलसी प्रायः ताजा और प्राकृतिक रूप से पाई जाती है, उससे शरीर में किसी प्रकार का दूषित विजातीय तत्त्व उत्पन्न होने की संभावना नहीं रहती। यदि कभी उसके साथ दो-चार अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं तो वे सौंठ, कालीमिर्च, अजबाइन, बेलगिरी, नीम की कौंपल, पीपल, इलायची, लौंग आदि ऐसी चीजें होती हैं जो प्रायः हर घर में रहती और नित्य व्यवहार में आया करती हैं। इसलिए औषधियों के रूप में सेवन करने पर भी तुलसी की कोई विपरीत प्रतिक्रिया नहीं होती, न उसके कारण शरीर में किसी प्रकार के दूषित तत्त्व एकत्रित होते हैं। तुलसी स्वाभाविक रूप से शारीरिक यंत्रों की क्रिया को सुधारती है और रोग को दूर करने में सहायता पहुँचाती है। डॉक्टरों के तीव्र इंजेक्शन जिनमें कई प्रकार के विष भी हुआ करते हैं और वैद्यों की भस्मों की तरह उससे किसी तरह के कुपरिणाम या प्रतिक्रिया की आशंका नहीं होती। वह तो एक बहुत सौम्य वनस्पति है, जिसके दस-पाँच पत्ते लोग चाहे जब चबा लेते हैं, पर उनसे किसी को हानि होते नहीं देखी गई।
  • तुलसी के 4 औषधीय उपयोग क्या हैं?
तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से जुकाम, सिर दर्द, बुखार आदि रोगों से लाभ मिलता है। तुलसी के पत्ते चबाकर ऊपर से पानी पीने से कैंसर से लाभ मिलता है। तुलसी के पत्तों के सेवन से रक्त चाप सामान्य होता है। खांसी, दमा, इओसिनोफिल आदि में तुलसी के 10 पत्ते, एक चम्मच बायबडिंग का काढ़ा बनाकर पीने से लाभ मिलता है।
  • तुलसी से कौन सी दवाई बनती है?
तुलसी के पत्तों का रस शहद और अदरक के साथ मिलाकर ब्रोंकाइटिस, दमा, इन्फ्लुएंजा, खांसी और सर्दी में असरदार होता है।
  • तुलसी किसे नहीं खाना चाहिए?
पवित्र तुलसी संभवतः अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है; हालाँकि, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं, जो महिलाएं गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं, और टाइप 2 मधुमेह, हाइपोथायरायडिज्म वाले लोगों और सर्जरी से गुजरने वाले लोगों को पवित्र तुलसी से बचना चाहिए।
  • तुलसी का पत्ता चबाना चाहिए या निगलना चाहिए?
यह पास्ता व्यंजन और सैंडविच में समान रूप से स्वाद जोड़ने के लिए जाना जाता है, लेकिन आपको कभी भी तुलसी नहीं चबानी चाहिए क्योंकि इससे कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। तुलसी के पत्तों को न चबाने के पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि इसमें पारा होता है जो आपके दांतों पर दाग लगा सकता है और आपके दांतों का रंग खराब कर सकता है।

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