श्री ओंकारेश्वर मंदिर उत्तराखंड के बारे में जानिए /Know about Shri Omkareshwar Temple Uttarakhand

 श्री ओंकारेश्वर मंदिर उत्तराखंड के बारे में जानिए

 श्री ओंकारेश्वर मंदिर उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल जिले में स्थित है। यह मंदिर गंगोत्री यात्रा मार्ग पर बसा हुआ है और उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है।श्री ओंकारेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां की प्रमुख मूर्ति माँ पार्वती के साथ शिवलिंग है। मंदिर भारतीय संस्कृति और धार्मिक तत्वों की एक मशहूर और महत्वपूर्ण स्थली है।मंदिर का स्थापना और निर्माण पाण्डवों के द्वापर युग में किया गया था। इसे महाभारत काल के महानायक अर्जुन ने बनवाया था। मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल से ही मौजूद है
और सदियों से लोग यहां शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कर रहे हैं।मंदिर की सुंदर मूर्तियां और मनोहारी वातावरण इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनाते हैं। मंदिर के पास एक सुंदर सागर है जिसे कान्याकुमारी ताल के नाम से भी जाना जाता है। यहां के मंदिर का दृश्य गंगोत्री दरबार के साथ बहुत ही आकर्षक होता है।श्री ओंकारेश्वर मंदिर धार्मिक तथा सांस्कृतिक आयाम के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले महाशिवरात्रि मेले के दौरान बहुत सारे पर्यटक यहां आते हैं और मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।
अगर आप श्री ओंकारेश्वर मंदिर के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं, तो आप उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित स्थानीय पर्यटन कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

श्री ओंकारेश्वर मंदिर के बारे में कथा 

श्री ओंकारेश्वर मंदिर के बारे में कथा विभिन्न प्रकार की हो सकती है। यहां मैं एक प्रसिद्ध कथा का उल्लेख कर रहा हूं जो इस मंदिर के बारे में प्रसिद्ध है। यह कथा अपनी भक्ति और श्रद्धा के लिए प्रसिद्ध है:-
कथा का नाम: "अर्जुन का व्रत"कथा का सारांश:एक समय की बात है, महाभारत के द्वापर युग में अर्जुन ने वृषभ रूप में भगवान शिव की पूजा की थी। अर्जुन ने इस व्रत का आयोजन श्रवण मास (भाद्रपद/आषाढ़) की शिवरात्रि के दिन किया था। व्रत के दौरान उन्होंने शिवलिंग की पूजा की और मन से भगवान शिव की आराधना की।उनकी भक्ति और श्रद्धा ने भगवान शिव को प्रसन्न किया। भगवान शिव अपने विशेषाधिकार से अर्जुन के सामने प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। उन्होंने अर्जुन को वीरता, योग्यता और विजय के गुण दिए। भगवान शिव ने उन्हें दिया कि वे पूरे युद्ध काल में अस्त्र-शस्त्र के विशेषज्ञ होंगे और अनदृश्य रूप से उनकी सहायता करेंगे।इस प्रकार, अर्जुन का व्रत भगवान शिव के आशीर्वाद से संपन्न हुआ और अर्जुन महाभारत युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हुआ।
यह कथा श्री ओंकारेश्वर मंदिर के प्रसिद्धता और भगवान शिव की महिमा को दर्शाने के लिए प्रस्तुत की जाती है। इस तरह की कथाएं भक्तों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्वपूर्ण सन्देश प्रदान करती हैं।

 महत्वपूर्ण तथ्य श्री ओंकारेश्वर मंदिर के बारे में 

1. स्थान: श्री ओंकारेश्वर मंदिर उत्तराखंड राज्य के गढवाल जिले में स्थित है। यह मंदिर गंगोत्री यात्रा मार्ग पर स्थित है।
2. महत्व: श्री ओंकारेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है।
3. ऐतिहासिक महत्व: मान्यता है कि श्री ओंकारेश्वर मंदिर का स्थापना और निर्माण महाभारत के द्वापर युग में पांडवों के द्वारा किया गया था।
4. पूजा विधि: मंदिर में मूर्ति के साथ माँ पार्वती की भी मूर्ति और शिवलिंग होता है। परंपरागत रूप से, भक्त शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं और विभिन्न पूजा विधियों का पालन करते हैं।
5. पर्यटन स्थल: श्री ओंकारेश्वर मंदिर की सुंदर मूर्तियां और प्राकृतिक वातावरण इसे पर्यटन स्थल बनाते हैं। यहां के पास कान्याकुमारी ताल नामक एक सागर भी है जो दर्शकों को आकर्षित करता है।
6. महाशिवरात्रि मेला: हर साल महाशिवरात्रि के दिन यहां पर्यटकों के बीहड़ लग जाते हैं। मंदिर के चारों ओर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और भक्तगण शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं।
ये थे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य श्री ओंकारेश्वर मंदिर के बारे में। यदि आपको इसके अलावा और किसी विशेष विषय पर जानकारी चाहिए, तो आप स्थानीय पर्यटन विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

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