रामेश्वरम मंदिर ,विष्णु के एक अवतार के रूप में पूजा जाता है

रामेश्वरम मंदिर ,विष्णु के एक अवतार के रूप में पूजा जाता है

 रामनाथस्वामी मंदिर, जिसे रामेश्वरम मंदिर भी कहते हैं, भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित है। यह मंदिर रामेश्वरम नामक द्वीप पर स्थित है, जो पेशवर और देवीपत्तिनम के बीच बयो बीच के एक छोटे द्वीप है। इसे दक्षिण भारत के चार धामों में से एक माना जाता है और हिंदू धर्म के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है।रामनाथस्वामी मंदिर भगवान श्री राम को समर्पित है, जिन्हें विष्णु के एक अवतार के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर तमिलनाडु के श्रेष्ठ श्री रामनाथस्वामी कोविल के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर का इतिहास प्राचीन है और इसे रामायण के काल में जिन्होंने रावण को मारा था, वे इस मंदिर को बनाने के लिए विद्वेष की पुन्य कार्य के रूप में निर्मित किया गया था।
रामनाथस्वामी मंदिर का शिखर 22 स्थानीय स्तम्भों (Gopurams) से घिरा हुआ है, जो मंदिर के प्राचीन संरचना की एक अद्भुत मिसाल हैं। मंदिर के अंदर संगम (confluence) नामक एक पवित्र स्थान है, जहां इंद्र कोणी और वायंगंगा नदीयों का संगम होता है।रामनाथस्वामी मंदिर के पास विभिन्न धार्मिक स्थल भी हैं, जैसे कुंडल (जैसे अग्नि कुंड), अग्नितीर्थ (एक पवित्र कुंड), गायत्री कुंड, बद्रीनाथ कुंड और सिताकुंड आदि।यह मंदिर हिंदू धर्म के दर्शनीय स्थलों में एक महत्वपूर्ण स्थान है और विश्व भर से लाखों श्रद्धालु यहां भगवान विष्णु को भक्ति और समर्पण के साथ पूजते हैं।
Rameshwaram Temple, worshiped as an avatar of Vishnu

रामानाथस्वामी मंदिर की प्रसिद्ध कथा

रामानाथस्वामी मंदिर की कथा महाभारत के वनवास कांड से संबंधित है। यह कथा रामायण के प्रसिद्ध पाठकों और भक्तों के बीच व्याप्त है। 

निम्नलिखित है रामानाथस्वामी मंदिर की प्रसिद्ध कथा:

कथा के अनुसार, भगवान राम और उनके भक्त हनुमान रावण के लंका दौरे के बाद राम को विजयी बना दिया था। रावण का वध कर उसके विजय के बाद, राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान वापस अयोध्या की ओर लौट रहे थे। लंका से वापसी में उन्होंने भगवान शिव का ध्यान किया और उन्हें आभार प्रकट किया कि उन्होंने उनके अधीन एक सफल और सुरक्षित यात्रा पूरी की है।भगवान राम और उनके साथी अपने अयोध्या लौट रहे थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यात्रा के बीच में विवेकानंद (भगवान विष्णु का अवतार) ने एक शिवलिंग भी स्थापित किया था। शिवलिंग के स्थापना के बाद, विवेकानंद ने भगवान शिव से यह वादा किया था कि यहां स्थापित शिवलिंग हमेशा के लिए भगवान राम के भक्त बन जाएगा और इस स्थान को भगवान राम के समर्पित एक मंदिर के रूप में विकसित किया जाएगा।
शिवलिंग की स्थापना के बाद भगवान राम ने यात्रा जारी रखी और अपने रास्ते में रामेश्वरम पहुंचे। वहां भगवान राम को शिवलिंग के नजदीक स्थान पर पूजा करने का आदेश मिला। लेकिन उन्हें एक स्थानीय लेबर की भट्टी (भट्टी ब्राह्मण) की सहायता की जरूरत पड़ी, क्योंकि वे पूर्वाचार्य नहीं थे और वे यह काम कैसे करेंगे, इसका उन्हें अनुभव नहीं था।भट्टी की सहायता से भगवान राम ने शिवलिंग की पूजा की और शिव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न अभिषेक करवाए। इसके बाद भगवान राम ने रामेश्वरम के स्थानीय लोगों को ब्रह्मविद्या और धर्म का ज्ञान दिया और उन्हें भगवान विष्णु के समर्पित एक मंदिर बनाने के लिए प्रेरित किया।इस प्रेरणा से रामेश्वरम में भगवान राम को समर्पित एक मंदिर बना दिया गया, जिसे रामनाथस्वामी
 मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम को समर्पित है और आज भी यह भारत में सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। इसके साथ ही रामानाथस्वामी मंदिर भारतीय संस्कृति और धरोहर का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है।

रामानाथस्वामी मंदिर के 10 महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में 

  1.  पौराणिक महत्व: रामानाथस्वामी मंदिर को भगवान विष्णु के एक अवतार भगवान राम को समर्पित किया गया है। यह मंदिर भारतीय पौराणिक ग्रंथों में उल्लेखित है और श्रद्धालु भक्तों के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
  2. चार धाम में से एक: रामानाथस्वामी मंदिर दक्षिण भारत के चार धामों में से एक है। भारतीय हिंदू धर्म में यह धार्मिक यात्रा के प्रमुख स्थलों में से एक माना जाता है।
  3. द्वीप के ऊपर स्थिति: रामानाथस्वामी मंदिर रामेश्वरम नामक द्वीप पर स्थित है, जो पेशवर और देवीपत्तिनम के बीच बयो बीच के एक छोटे द्वीप है।
  4. शिखर की विशेषता: मंदिर का शिखर 22 स्थानीय स्तम्भों (Gopurams) से घिरा हुआ है, जो मंदिर के प्राचीन संरचना की एक अद्भुत मिसाल हैं।
  5. संगम के पावनता स्थान: मंदिर के अंदर संगम (confluence) नामक एक पवित्र स्थान है, जहां इंद्र कोणी और वायंगंगा नदीयों का संगम होता है। यह स्थान पुण्य स्नान के लिए प्रसिद्ध है।
  6. अभिषेक की परंपरा: रामानाथस्वामी मंदिर में राजा रामदेव द्वितीय (Ramadoss) ने सन् 17 वीं शताब्दी में नवीनीकरण किया था। इससे पहले, यह मंदिर नागों द्वारा भगवान राम के पूजन के लिए जाना जाता था।
  7. अद्भुत कुंडल: मंदिर के पास विभिन्न धार्मिक स्थल भी हैं, जैसे कुंडल (जैसे अग्नि कुंड), अग्नितीर्थ (एक पवित्र कुंड), गायत्री कुंड, बद्रीनाथ कुंड और सिताकुंड आदि।
  8. विवेकानंद का भ्रमण: स्वामी विवेकानंद ने 1897 में रामानाथस्वामी मंदिर का दर्शन किया था। उन्होंने यहां शिवलिंग पूजा की और उसके बाद भक्तों को संत संगीत सुनाया था।
  9. श्रद्धा प्रदर्शनी: मंदिर में वर्ष भर में कई धार्मिक त्योहार और उत्सव मनाए जाते हैं। भक्त इस मंदिर के दर्शन के लिए पूरी दुनिया भर से यहां यात्रा करते हैं।
  10. मुक्ति पुरी: मंदिर के प्रांगण में स्थित मुक्ति पुरी नामक एक स्थान है, जिसे मुक्तिस्थल के रूप में जाना जाता है। यहां आने वाले भक्तों का कहा जाता है कि उन्हें अपने पापों से मुक्ति मिलती है।ये थे कुछ रामानाथस्वामी मंदिर के महत्वपूर्ण तथ्य। यह मंदिर भारतीय धरोहर का एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के लिए एक महान प्रतीक है।

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