भगवान शिव के दर्शन करने के लिएआप निम्नलिखित तरीकों का अनुसरण कर सकते हैं /You can follow the following methods to have darshan of Lord Shiva

भगवान शिव के दर्शन करने के लिएआप निम्नलिखित तरीकों का अनुसरण कर सकते हैं:-

1. मंदिर या शिवालय में जाएं: शिव के दर्शन के लिए आप मंदिर या शिवालय में जा सकते हैं। वहां आप शिव मूर्ति के सामने बैठकर पूजा और ध्यान कर सकते हैं। ध्यान के दौरान आप शिव को समर्पित मंत्रों का जाप कर सकते हैं।एक मंदिर या शिवालय में जाकर शिव के दर्शन करें। अपने स्थानीय क्षेत्र में शिवालयों की जानकारी लें और एक पवित्र स्थान पर जाएं जहां शिव मूर्ति स्थापित होती है। मंदिर में पूजा का हिस्सा बनें और अपनी भक्ति व्यक्त करें।

2. ज्योतिर्लिंग मंदिरों का दौरा करें: भारत भर में कई ज्योतिर्लिंग मंदिर हैं जहां आप शिव के दर्शन कर सकते हैं। केदारनाथ, बाबा वैद्यनाथ, सोमनाथ, रामेश्वरम, काशी विश्वनाथ, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आदि कुछ प्रमुख ज्योतिर्लिंग मंदिर हैं।

3. व्रत और पूजा करें:
मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर शिव के व्रत और पूजा करने से आप उनके दर्शन कर सकते हैं। इन अवसरों पर आप शिव के नाम के जाप, अर्चना और आरती कर सकते हैं।
शिव जी के व्रत और पूजा करके आप उनके दर्शन कर सकते हैं। मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर शिव के व्रत और पूजा करें। शिव जी को बेल पत्र, धूप, दीप, पुष्प, जल, दूध, बिल्वपत्र, धातु के वस्त्र आदि से अर्चना करें।

4. शिव के ध्यान में रहें: शिव के दर्शन के लिए आप उनके ध्यान में रह सकते हैं। आप शिव मूर्ति की एक तस्वीर को ध्यान मंत्र के साथ देख सकते हैं और उनके ध्यान में जाकर उनसे संवाद कर सकते हैं। ध्यान में रहने के दौरान आप पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ शिव की आराधना करें।
एक शांत और चित्तशुद्धि स्थापित करें और अपने मन को शिव की ओर मोड़ें। अपने आंतरिक दृष्टि से उनकी अद्भुतता और महिमा को अनुभव करें। ध्यान में रहते हुए, आप शिव के नाम का जाप कर सकते हैं या शिव स्तोत्र पढ़ सकते हैं।

5. शिव के मंत्रों का जाप करें:
शिव के नाम के मंत्रों का जाप करने से आप उनके साथ अधिक समर्पण और जुड़ाव महसूस कर सकते हैं। "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्" जैसे मंत्रों का जाप करें।
ध्यान देने या शिव के दर्शन करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप शिव की पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और आदर्शों के साथ आराधना करें। इसके लिए आप अपनी भक्ति और आस्था को स्थापित रखें और प्रतिदिन शिव के नाम का जाप और पूजा करें।

6. शिव चालीसा और आरती का पाठ करें: शिव चालीसा और शिवारात्रि की आरती का पाठ करने से आप शिव के दर्शन कर सकते हैं। इन पाठों को स्वर्णिम आवाज़ में पढ़ें और शिव की महिमा का गान करें।

7. भजन और कीर्तन करें: शिव के नाम के भजन और कीर्तन करके आप उनके दर्शन कर सकते हैं। शिव के गुणों, लीलाओं और महिमा की स्तुति करने वाले भजन गाएं और कीर्तन करें। यह आपको उनके साथ अधिक संबंधित करेगा और एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा।

इन तरीकों का पालन करते हुए शिव के दर्शन करने पर आप उनके प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को व्यक्त करेंगे। यदि आपके पास कोई शिव मंदिर या शिवालय नहीं है, तो आप अपने घर में शिव की मूर्ति स्थापित करके उनकी पूजा कर सकते हैं और अपने मन में उनके दर्शन कर सकते हैं।

भगवान शिव के दर्शन के लिए निम्नलिखित मंत्रों का जाप किया जा सकता है:-


1. "ॐ नमः शिवाय" (Om Namah Shivaya):-यह मंत्र शिव के सबसे प्रमुख और प्रिय मंत्रों में से एक है। इसका जाप करने से शिव के आद्यात्मिक संयोग होता है और उनके आभास को महसूस किया जा सकता है।
2. "ॐ नमः शिवाय शान्ताय" (Om Namah Shivaya Shantaya):- यह मंत्र शिव की शांति और आनंद के लिए जाप किया जाता है। इसके द्वारा शिव के अंतर्मन को प्रसन्न करके उनके दर्शन किये जा सकते हैं।
3. "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्" (Om Tryambakam Yajamahe, Sugandhim Pushtivardhanam):-यह मंत्र "महामृत्युंजय मंत्र" के रूप में जाना जाता है और शिव की रक्षा, शक्ति और उनकी कृपा के लिए जाप किया जाता है। इस मंत्र का जाप करने से दिल में शांति और सुरक्षा की अनुभूति होती है।
4. "ॐ नमः शिवाय महादेवाय" (Om Namah Shivaya Mahadevaya):- यह मंत्र शिव के रूप और गुणों की प्रशंसा के लिए जाप किया जाता है। इसके जाप से आप शिव के दिव्य स्वरूप को अनुभव कर सकते हैं।

इन मंत्रों को नियमित रूप से जाप करने से आप भगवान शिव के आस्थान पर समर्पित होंगे और उनके दर्शन करने में सहायता मिलेगी। जाप के साथ-साथ ध्यान, पूजा, और उनके गुणों की स्तुति करना भी अच्छा होगा।
 

शिव चालीसा और शिवारात्रि की आरती शिव के दर्शन करने के लिए बहुत ही प्रमुख पाठ हैं। नीचे दिए गए हैं शिव चालीसा और शिवारात्रि की आरती के पाठ के लिए श्लोक:

शिव चालीसा:

ॐ नमः शिवाय! जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
ओं हर हर महादेव, समर्पित चालीसा।
दुष्ट चित्त को लिए शुभ सुन्दर ज्ञानलीसा॥

जे कोई नर ध्यावे, जो कोई ध्यावे।
कहत शिव सुकर्मानी, सुख संपत्ति पावे॥
देवान जो पूज्ये, जिस घर में तुम रहते।
सो भूवनधारी, लखियो तब चारि रहते॥

तुब्यं कृपा करि केवल, शंकर हे त्रिभुवन स्वामी।
त्रिगुण स्वामी तुझे गुण गावैं, ब्रह्मा-विष्णु और जो कोई गावे॥
तुझ बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाठे।
कंठा बसधर सोई, लाखि लाखि जपते॥

कर में वस्त्र अच्छे, साफ करें मुख हारी।
केहरी वाहन राजत, खड़ा सदा धारी॥
चंद्रमा चामकता जटा में, मूक ठाड़े त्रिशूल।
मधुकर जैसे मधुर नील, गले मुक्तावली॥

रक्ताम्बर सदाविराजत, जीवन मुक्ताप्यारी।
केशरि वाहन सोहत नागरा, हैं चढ़ी दश भुजा धारी॥
ध्यानुध्यान धरैं नित यहीं, मृदुपुंज अविरामा।
मोको संकट हरो देवा, नाथ करुणासागरामा॥

ज्ञान और वैराग्य को जपे, देवगुरु शंकर आप।
जी को नारी मित्र सम्प्रेम भगति सेवा प्राप॥
मन वांछित फल पावै, सोहै अमित जन्म तियाग।
ब्रह्मद्वार आपन ते निकले, त्रिभुवन सुख सुन्दर आग॥

त्रिभुवन गुण आत्म नहिं देखा, जग निदान श्रुति ज्ञाना।
मनु वाचा बुधि जो जिते, सोइ निर्गुण सदानन्दांश्रीज्ञाना॥
तारक मंत्र तुहीँ राखो, नर गंगा जो जापे।
यम कुबेर नाम सुख भोगे, जो श्रवण सुख देते॥

वेद नाम महिमा तव गावे, भेद न जाने तव महिमा।
श्रवण बिनु कहि ना काना, जगत में कौन बिग्याना॥
कहै अयोध्या वासी नरशैंय, ब्रह्मादिक सुर मुनि यहीं।
साक्षात दरसते तिन्ह के तिन्ह के, हुए न अहि यहीं॥

पूजा तुम्हारी शिव ग्यानी, मन वांछित फल पावे।
दुर्गा जी की कृपा से, सागर श्याम पार लगावे॥
दश विद्या सब ग्यान सुख दाता, नाम तुम्हारा निराला।
भक्त जनों के तुम हो संकट हरो, ज्ञान-बुद्धि देई बड़ाला॥

ज्ञानी ने यह कहा जो कोई, श्रवण सुनै महिम भारी।
सो निश्चय ही श्री शंकर का, आश्रय ताहि निर्भारी॥

शिवारात्रि की आरती:

जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
लिंगराज धरण करत्री नटराज जरा आरती उतारे॥

ज्वलते त्रिपुण्ड शेष गंगा बहत हैं।
धरा ध्यान पर जो तिनके त्रिगुण स्वामी हैं॥
एक गुण स्वामी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिव सुकर्मानी, सुख संपत्ति पावे॥

दुर्गा नाम हैं सुहागिन, मंगलकारी।
निरंकारी अंबा, भवन की निराली॥
कहत नरद और शरदेवी मनवांछित फल पावै।
श्रुति शिवपुराणी, सुख संपत्ति दावै॥

जो कोई जन संत सदा, सुखी संकट काटै।
छूटै मन वांछित फल पावै, शिव चरण चरण जावै॥

आरती करत अनंत भक्ती, भवन जन अंकित।
देवी नरद नारद शरद सुभद्रा मुनि अभित॥
जय जय शंकर, करता जगत दृगयारी।
जय जय शंकर, स्वामी सबकी सुखकारी॥

ऊँ नमः शिवाय।

यह शिव चालीसा और शिवारात्रि की आरती का पाठ आप भगवान शिव के दर्शन करने के समय प्रयोग कर सकते हैं। इन्हें भक्ति भाव से पाठ करने से आपको भगवान शिव की कृपा मिलेगी और आपके मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।

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