ज्वालामुखी, हिमाचल प्रदेश, जो भगवानी ज्वालादेवी (माँ ज्वाला) को समर्पित /Jwalamukhi, Himachal Pradesh, dedicated to Goddess Jwaladevi (Mother Jwala)

ज्वालामुखी, हिमाचल प्रदेश, जो भगवानी ज्वालादेवी (माँ ज्वाला) को समर्पित

ज्वालामुखी, हिमाचल प्रदेश, भारत का एक प्रसिद्ध पर्वतीय जिला है। यह जिला कांगड़ा डिवीजन में स्थित है और हिमाचल प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित है। यहां की सरहदी संपर्क रेखा भारत और तिब्बती आयाधीन चीन के बीच है।

ज्वालामुखी जिले का मुख्यालय भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक ज्वालामुखी मंदिर है, जो भगवानी ज्वालादेवी (माँ ज्वाला) को समर्पित है। यह भारत के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण शक्ति पीठों में से एक माना जाता है।

माँ ज्वालादेवी मंदिर एक विशेष धार्मिक स्थल है, जिसे हर साल लाखों श्रद्धालुओं द्वारा दर्शन किया जाता है। मंदिर के दर्शनीय स्थलों में ज्वालामुखी की प्राकृतिक ज्वालाएं शामिल हैं, जो माँ की कृपा मानी जाती हैं।

ज्वालामुखी जिले में पर्वतीय सौंदर्य, वन्य जीवन, धार्मिक धरोहर और स्थानीय संस्कृति का आनंद लिया जा सकता है। यहां पर्वतीय यात्राएं, ट्रेकिंग, और खूबसूरत नजारों का आनंद लिया जा सकता है। इस जिले में कई पर्वतीय गांव और धार्मिक स्थल भी हैं जिन्हें दर्शनीय स्थल के रूप में देखा जा सकता है।
कांगड़ा जिला और ज्वालामुखी जिले की सौंदर्यपूर्ण प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांचक वातावरण और धार्मिक महत्व इसे भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल बनाते हैं।

ज्वालामुखी मंदिर कथा ( Jwalamukhi Mandir Katha ) 

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक कथा है। यह कथा माँ ज्वालादेवी के मंदिर के पीछे स्थित है, जो भारत के प्राचीन और महत्वपूर्ण शक्ति पीठों में से एक है।

ज्वालामुखी कथा का मूल धार्मिक अधार हिंदू पुराणों में स्थित है। यह कथा माँ ज्वालादेवी (ज्वाला माता) के ज्ञान, शक्ति और विजय की कहानी को वर्णित करती है।

कथा के अनुसार, दक्ष राजा ने अपने यज्ञ को सफल बनाने के लिए अपनी यज्ञशाला में अपनी पुत्री सती को भी न्यायिका के रूप में आमंत्रित किया था। लेकिन यज्ञशाला में राजा द्वारा यज्ञ में अपमानित होने पर सती ने अपनी अहिंसा के प्रतीक रूप में अपनी आत्मा को देह त्याग दिया।

सती के देहवान करने पर भगवान शिव अत्यंत दुखी हुए और उन्होंने अपनी विषाद से परिपूर्ण दिशा में तांडव नृत्य किया। इससे पृथ्वी के संतुलन में ख़राबी होने लगी और इससे प्रजा को भी खतरा होने लगा।

भगवान विष्णु ने इस संदर्भ में सती के शरीर के 51 अंशों को भिन्न-भिन्न स्थानों पर गिराने से ज्वालामुखी की ज्वालाएं उत्पन्न हुईं। माँ ज्वालादेवी के ज्वालामुखी मंदिर के विशाल भवन में ये 51 शक्तिपीठ हैं जो अभिवादन के लिए उपयुक्त हैं।

ज्वालामुखी मंदिर कथा में इस शक्ति पीठ के महत्व को दर्शाने के साथ-साथ भक्तों को माँ ज्वालादेवी के प्रति भक्ति और श्रद्धा का भाव विकसित करती है। यहां विभिन्न धार्मिक आयोजन भी होते हैं, जिनमें श्रद्धालु भाग लेते हैं और अपने मनोकामनाएं पूर्ण करने की कोशिश करते हैं।

ज्वालामुखी मंदिर के 15 महत्वपूर्ण तथ्य

ज्वालामुखी मंदिर, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है और भगवानी ज्वालादेवी को समर्पित है, जो भारत के प्रसिद्ध शक्ति पीठों में से एक है। यहां ज्वालामुखी मंदिर के 15 महत्वपूर्ण तथ्य हैं:
1. ज्वालामुखी मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो अधिकतर इतिहासकारों के अनुसार त्रेतायुग के समय से है।
2. मंदिर का नाम "ज्वालामुखी" उस प्राकृतिक ज्वाला कुंड से आया है जो माँ की कृपा से आज भी चिर शक्तिशाली ज्वालाओं से जलता है।
3. यह मंदिर विष्णुपुराण, महाभारत, वायुपुराण, देवी भागवत आदि प्राचीन हिंदू पुराणों में उल्लेखित है।
4. मंदिर का मुख्य गोपुरम वास्तुकला में नहीं बना है, जिसका इस्तेमाल भय और दुश्मनों को दूर रखने के लिए किया गया था।
5. ज्वालामुखी मंदिर का आधार सिंधु सभ्यता के समय से है, और यह विभिन्न शैली में बने रहे हैं, जो इसकी अद्भुतता को दर्शाते हैं।
6. मंदिर में माँ ज्वालादेवी के पावन मूर्ति के नज़दीक एक सबंधित मंदिर भी है जिसे "श्री राजराजेश्वरी" कहा जाता है।
7. मंदिर के भव्य गुमटी स्तंभों को माँ ज्वालादेवी की शक्ति के प्रतीक के रूप में संरक्षित करते हैं।
8. ज्वालामुखी मंदिर के भीतर स्थित माँ की प्राकृतिक ज्वालाएं प्रतिध्वनित होकर उच्च ध्वनि पैदा करती हैं, जिसे "ध्वनि विधुत" कहा जाता है।
9. मंदिर में प्रवेश करने के लिए आम तौर पर यात्रियों को बिना मुद्रा के नहीं जाने दिया जाता है।
10. मंदिर के समीप एक बड़ा कुंड है, जिसे भक्त भगवानी के अनुग्रह के लिए जलाते हैं। इसे "मां अग्नि कुंड" भी कहते हैं।
11. ज्वालामुखी मंदिर के प्रसिद्ध भोजनालय में भक्तों को अन्न भोजन की सुविधा उपलब्ध है।
12. ज्वालामुखी मंदिर के पास स्थित एक संध्या दर्शन स्थल है जहां आप समय बिता सकते हैं और सूर्यास्त का आनंद ले सकते हैं।
13. मंदिर के निकट एक प्राकृतिक गुफा है, जो विशाल धार्मिक और प्राकृतिक म
हत्व रखती है।
14. मंदिर वार्षिक नवरात्रि महोत्सव के समय भक्तों की भीड़ से भर जाता है और भक्तों के बीच एक उत्साहपूर्ण वातावरण होता है।
15. ज्वालामुखी मंदिर भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्वतीय पर्यटक स्थलों में से एक है, जो भक्तों को अपनी भक्ति और श्रद्धा का अनुभव कराता है।

(शक्तिपीठ के तत्वों को प्रशंसा करने वाला मंत्र) 

ज्वालामुखी मंदिर कथा को शक्ति स्त्रोत (शक्तिपीठ के तत्वों को प्रशंसा करने वाला मंत्र) के माध्यम से संबोधित किया जाता है। इस मंत्र के जाप से माँ ज्वालादेवी की कृपा प्राप्त होती है और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यहां नीचे ज्वालामुखी मंदिर का शक्ति स्त्रोत दिया गया है:

ॐ ज्वालायै विद्महे सहस्त्रायै धीमहि। तन्नो ज्वाला प्रचोदयात्॥

इस मंत्र को सुबह और शाम कम से कम 11 बार जप करने से ज्वालामुखी माता की कृपा हासिल होती है और आपकी आशाएं पूरी हो सकती हैं। ज्वालामुखी मंदिर का दर्शन करने वाले श्रद्धालु इस मंत्र के जप के साथ-साथ भक्ति भाव से माँ ज्वालादेवी की आराधना करते हैं।
कृपया ध्यान दें कि मंत्र का जाप विशेष नियमों और शुद्धि के साथ करें। यह धार्मिक प्रयास है, इसे सम्मान से करें और यथाशक्ति विधि के अनुसार इसका उपयोग करें।
सम्पूर्ण श्रद्धा और आदर के साथ माँ ज्वालादेवी की आराधना करने से हमें सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति मिलती है, जो हमारे जीवन को सुख-शांति से भर देती है।




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