मां दुर्गा देवी कवच संस्कृत में एक प्रसिद्ध स्तोत्र है,Maa Durga Devi Kavach is a famous hymn in Sanskrit,

मां दुर्गा देवी कवच संस्कृत में एक प्रसिद्ध स्तोत्र है,

 जिसका उद्देश्य दुर्गा माता के आशीर्वाद से सुरक्षा, रक्षा और शक्ति प्राप्ति की प्रार्थना करना है। इसका पाठ करने से भक्त को आध्यात्मिक और शारीरिक सुरक्षा मिलती है। निम्नलिखित है मां दुर्गा देवी कवच का एक अंश:
ॐ जटाजूटसमायुक्तं रविकण्टं चटुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
जयावहं जपेन्नित्यं अक्षय्यं परमं शिवम्॥

दुर्गाकवचमिदं पुण्यं सर्वरोगनिवारणम्।
जपेद्वै वैदिकं मन्त्रं सर्वबाधाप्रशान्तये॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

कवचं ब्रह्मरूपेण सर्वकामार्थसाधनम्।
विद्यावाङ्मुखदेवेशि जङ्गमे जीवनं कुरु॥
इस दुर्गा देवी कवच का जप अथवा पाठ भक्ति और शक्ति प्राप्ति के लिए किया जाता है। यह अनुष्ठान किसी भी सुयोग्य समय में भक्ति भाव से किया जा सकता है।
कृपया ध्यान दें कि यहां उपरोक्त मंत्र का अनुवाद संस्कृत से हिंदी में किया गया है और इसके शुद्ध संस्कृत पाठ के लिए आप संबंधित स्रोतों से सहायता ले सकते हैं।

दुर्गा देवी कवच का जप अथवा पाठ हिंदी में निम्नलिखित है जिसमें मंत्रों का अर्थ भी दिया गया है:



ॐ जटाजूटसमायुक्तं रविकण्टं चटुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
अर्थ: हे दुर्गा माता, जिनके जटा-जूटे से सुसज्जित वक्रतुंड में अविराम रहने वाले चार भुजा स्वरूप का सुंदर वदन है, उनका ध्यान करते हैं। आप सभी विघ्नों को दूर करें।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
अर्थ: हे दुर्गा माता, जिनके हस्त के अग्रभाग में लक्ष्मीजी वास करती हैं, हस्त मध्य में सरस्वती देवी स्थित हैं और हस्त की मूलचक्री में गोविन्द (विष्णु) का दर्शन होता है।
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
जयावहं जपेन्नित्यं अक्षय्यं परमं शिवम्॥
अर्थ: यह आदित्यहृदय स्तोत्र पुण्यमय है और सभी शत्रुओं का नाश करने वाला है। हे दुर्गा, मैं हमेशा जयावाही रूप से इसे जपता हूँ, जो अक्षय और परम शिव स्वरूप है।
दुर्गाकवचमिदं पुण्यं सर्वरोगनिवारणम्।
जपेद्वै वैदिकं मन्त्रं सर्वबाधाप्रशान्तये॥
अर्थ: यह दुर्गा कवच अत्यंत पुण्यकारी है और सभी रोगों को नष्ट करने वाला है। इसलिए हे भक्तो, इसे जपने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे शिव रूपी सर्वमंगलमयी, सर्वार्थ सिद्धि प्रदायिनी और त्रिदेवी के स्वरूप में त्र्यम्बका (दुर्गा), गौरी (पार्वती), और नारायणी (लक्ष्मी) को मैं नमस्कार करता हूँ।
कवचं ब्रह्मरूपेण सर्वकामार्थसाधनम्।
विद्यावाङ्मुखदेवेशि जङ्गमे जीवनं कुरु॥
अर्थ: यह दुर्गा कवच सर्वांग सुरक्षा के रूप में ब्रह्मरूपी है, जो सभी कामनाओं की प्राप्ति को सिद्ध करता है। विद्या और वाक्यों के मुखरूपी देवी, जिसमें जगत्के समस्त जीवों का निवास है, आप मेरे जीवन को संचालित करें।
इस रूप में दुर्गा देवी कवच का पाठ करने से भक्त को आध्यात्मिक और शारीरिक सुरक्षा मिलती है, जगती माँ दुर्गा की कृपा से विचार और कर्मों में सिद्धि होती है। इसे नियमित भक्ति भाव से जपने से समस्त दुर्भावनाएं नष्ट हो जाती हैं और व्यक्ति अपने जीवन को सकारात्मक और उच्चतम ध्येय की ओर ले जाता है।

दुर्गा क्षमा प्रार्थना मंत्रसंस्कृत में निम्नलिखित है:

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
या देवी सर्वभू‍तेषु विद्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभू‍तेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभू‍तेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ:

ॐ नारायणि, आप पर भरोसा करने वाले और दीन-हीन भक्तों के परित्राण के लिए समर्पित हैं। हे देवि, आप सभी भूतों में विद्या रूपेण स्थित हैं, मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे देवि, आप सभी भूतों में शक्ति रूपेण स्थित हैं, मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे देवि, आप सभी भूतों में मातृ रूपेण स्थित हैं, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
यह मंत्र माँ दुर्गा के चरणों में शरण लेने, उनकी कृपा की प्राप्ति के लिए एवं अपने जीवन को सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए जपा जाता है। भक्ति भाव से इस मंत्र का जप करने से माँ दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और सभी अशुभ विचारों और परिस्थितियों के नाश का समर्थन होता है।

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