कोदंडाराम मंदिर के पीछे की कथा

कोदंडाराम मंदिर के पीछे की कथा The story behind Kodandaram Temple

कोदंडाराम मंदिर के पीछे एक कथा है जो भगवान राम के जीवन से जुड़ी हुई है। इस कथा के अनुसार, यहां कई वर्ष पहले, कर्नाटक के इस शहर में एक समर्थ राजा था जिसका नाम कोदंडराम था। राजा को भगवान राम की अत्यंत भक्ति थी और वह उनका विशेष पूजन करते थे।
एक दिन, राजा को राम भगवान ने स्वप्न में दिखे और उन्होंने राजा से अपनी मूर्ति को निकालने की विनती की। इसके बाद, राजा ने अपनी राजमहल में स्थानीय पत्थर से भगवान राम की मूर्ति बनाई और उसका पूजन-अर्चना करना शुरू किया।
यह मंदिर बारह वीं सदी में बनाया गया था, जब इसे महाराष्ट्रीय राजा शिवाजी महाराज ने समर्पित किया था। कहानी के अनुसार, एक दिन राजा शिवाजी ने भगवान राम के स्थानीय पूजा-स्थल के बारे में सुना और उसने यहां का मंदिर समर्पित किया।
इस प्रकार, कोदंडाराम मंदिर का इतिहास और कथा इसे एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल बनाते हैं और लोगों को इसके प्रति विशेष आस्था और सम्मान का अनुभव कराते हैं।

श्री कोदंड रामास्वामी मंदिर, गुलमलामीदादा राम मंदिर

मंदिर को श्री कोदंड राम मंदिर के नाम से जाना जाता है और यह गोल्ला मामी दादा गाँव में स्थित है, इसलिए इसे गुलमलामीदादा राम मंदिर के नाम से जाना जाता है।
कोदंड राम मंदिर दक्षिण भारत का एक लोकप्रिय मंदिर है।  यह मंदिर पूरे आंध्र प्रदेश राज्य में लोकप्रिय है । इस मंदिर में विशाल गोपुरम हैं।  पूर्वी गोपुरम 170 फीट ऊँचा है,  पश्चिम गोपुरम 200 फीट ऊँचा है।मंदिर 16 एकड़ के क्षेत्र में स्थित है
मंदिर का निर्माण 1889 में द्वारमपुदी सुब्बी रेड्डी और रामा रेड्डी द्वारा किया गया था।मंदिर में भगवान राम, देवी सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां हैं।गोपुरम ऐसा लगता है जैसे 9 वीं मंजिल से आसमान को छू रहा है .. गोपुरम की हर मंजिल रामायण की पौराणिक मूर्तियों से गढ़ी गई है।

पौराणिक कथा  कोदंड राम मंदिर

क्षेत्रीय पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि कोदंड राम मंदिर ठीक उसी स्थान पर आधारित है, जहां भगवान राम ने 'किश्खिंडा' राज्य के नए शासक के रूप में 'सुग्रीव' की ताजपोशी से पहले 'बाली' को मार डाला था। ऐसा कहा जाता है कि राम, लक्ष्मण और सीता की मूर्तियों को सुग्रीव ने एक ही चट्टान से तराश कर बनाया था, क्योंकि वह चाहते थे कि इस मंदिर में देवताओं की पूजा की जाए। इसलिए ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर रामायण काल ​​से ही यहां विद्यमान है। अन्य पौराणिक वृत्तांतों का दावा है कि यह क्षेत्र नौ 'सिद्धों' का निवास स्थान था, जिन्होंने 'सिद्ध पुष्करणी' में एक तालाब के करीब तपस्या की थी, जो संत 'परशुराम' का निवास भी था, यही कारण है कि इसे भी जाना जाता है। 'भार्गवपुरी' या 'भार्गवों का शहर' के रूप मेंहालाँकि, 'स्थलपुराण' के अनुसार, हिरेमगलूर में भगवान राम द्वारा पुरुषोत्तम को पराजित किया गया था, जिसके बाद उन्होंने उनसे सीता के साथ अपने विवाह का दृश्य दिखाने का अनुरोध किया। यह सुनकर, हिंदू विवाह समारोहों की परंपराओं के अनुसार, सीता राम के दाहिनी ओर खड़ी हो गईं, जबकि लक्ष्मण उनके बाईं ओर खड़े हो गए।

कोदंडाराम मंदिर का इतिहास

कोदंडाराम मंदिर भारत के गुजरात राज्य में स्थित है और यह एक प्रमुख हिंदू मंदिर है जो गुजरात के सौराष्ट्र भूमि में स्थित है। यहाँ पर भगवान लोर्ड राम की पूजा की जाती है।
कोदंडाराम मंदिर का निर्माण सन् 1785 में हुआ था, जब महाराजा खेमसिंह जी ने इसे बनवाया था। यह मंदिर रामायण में उल्लेखित भगवान राम को समर्पित है और इसे विशेष रूप से उनके धनुष और बाणों के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।
यहाँ के मंदिर में विभिन्न अवतारों के देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी हैं, जिनकी पूजा की जाती है। इस मंदिर का स्थापना महाराष्ट्र के अखोली गाँव से किया गया था, जो रामायण के किश्किंधा कांड में हनुमान द्वारा जीता गया था।
कोदंडाराम मंदिर गुजरात के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और यहाँ के धार्मिक महत्त्व के कारण यात्री और पर्यटक इसे दर्शन के लिए आते हैं।

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