विजया एकादशी क्यों मनाते हैं, ये कब है और कैसे करें पूजन ,सब कुछ, Why do we celebrate Vijaya Ekadashi, when is it and how to worship, everything

विजया एकादशी क्यों मनाते हैं, ये कब है और कैसे करें पूजन ,सब कुछ

विजया एकादशी

शास्त्रों के मुताबिक, लंका विजय करने की कामना से बकदाल्भ्य मुनि के आदेशानुसार समुद्र के तट पर भगवान राम ने इसी एकादशी का व्रत किया था. जिसके बाद उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की थी
पौराणिक मान्यता के मुताबिक, भगवान राम ने रावण को हराने और युद्ध में जीत हासिल करने के लिए विजया एकादशी का व्रत रखा था. कहा जाता है कि इस दिन विष्णु जी की पूजा करने और सच्चे मन से व्रत रखने से सभी काम पूरे होते हैं. साथ ही, व्यक्ति अपने दुश्मनों पर भी जीत हासिल कर सकता है.
विजया एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है. इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

विजया एकादशी क्यों मनाई जाती है?

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। सभी एकादशियों की तरह ही इस एकादशी पर भी व्रत और भगवान विष्णु की भक्ति करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत मनुष्य को मृत्यु के उपरांत वैकुण्ठ धाम में स्थान प्रदान करता है।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, वनवास के समय, रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया। माता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए भगवान राम को वानर सेना सहित लंका पहुंचने के लिए समुद्र पार करने की आवश्यकता थी। उस समय वाकदलभ्य संत ने भगवान राम को विजया एकादशी का व्रत रखने का सुझाव देते हुए कहा कि विजया एकादशी का व्रत सभी बाधाओं से छुटकारा पाने और अपने लक्ष्य में विजय प्राप्त करने का सर्वोत्तम उपाय है।
इसके बाद वाकदलभ्य संत की आज्ञा से भगवान राम ने विजया एकादशी के व्रत का विधि विधान से पालन किया और इस व्रत के प्रभाव से ही भगवान श्री राम के हाथों अहंकारी रावण का अंत हुआ और धर्म की विजय हुई। उस समय से ही भक्तजन अत्यंत समर्पण के साथ विजया एकादशी का व्रत रखते हैं और इसके सफल समापन के लिए विजया एकादशी की कथा सुनते हैं।
vijaya ekaadashee kyon manaate hain, ye kab hai aur kaise karen poojan ,sab kuchh

विजया एकादशी 2024 में कब है ?

फागुन माह विजया एकादशी तिथि 6 मार्च 2024 बुधवार को पड़ रही है. पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी 6 मार्च को सुबह 06.30 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 7 मार्च 2024 को सुबह 04.13 मिनट पर समाप्त होगी. इस दिन सुबह 06.41 से सुबह 09.37 के बीच श्रीहरि की पूजा का शुभ मुहूर्त है.

विजया एकादशी व्रत पारण

विजया एकादशी का व्रत पारण 7 मार्च 2024 को दोपहर 01.43 से शाम 04.04 के बीच किया जाएगा. पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 09:30 है.

एकादशी व्रत में कैसे करें पूजन

एकादशी के दिन सुबह से निराहर व्रत का संकल्प लेकर शुभ मुहूर्त में विष्णु जी की पूजा करें, इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनें. एकादशी व्रतधारी को रात में सोना नहीं चाहिए, यह तिथि बेहद पुण्यदायी होती है. इस तिथि को पूरी रात भगवान विष्णु के भजन गाने चाहिए, मंत्र या आरती करनी चाहिए. भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठकर पूरी रात जागरण करना चाहिए.

विजया एकादशी की पूजा विधि इस प्रकार है

पूजा के दौरान भगवान विष्णु को खासतौर पर तुलसी और तिल चढ़ाना चाहिए. इस दिन सुबह जल्दी उठकर तुलसी के पौधे की पूजा करें और उसमें जल चढ़ाएं. इसके बाद भगवान विष्णु को केले और हलवे का भोग लगाएं. 
  • विष्णुजी को पीले वस्त्र चढ़ाएं. 
  • पूजा के लिए ये चीज़ें भी चाहिए:
  • भगवान विष्णु का अभिषेक
  • हार, फूल और वस्त्र
  • गहरे रंग का कपड़ा
  • गंगा जल
  • पीला चंदन और हल्दी कुमकुम
  • पुष्प और तुलसी दल 
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
  • पूजा स्थान को साफ़ करें.
  • घर के मंदिर में दीप जलाएं.
  • भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें.
  • भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें.
  • भगवान विष्णु को फल, फूल, मिठाई और दीप अर्पित करें.
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें.
  • भगवान विष्णु की आरती करें.
  • भगवान को भोग लगाएं.
  • अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें.
  • भगवान विष्णु को पीला चंदन और हल्दी कुमकुम से तिलक करें.
  • भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी जी का भी पूजन करें.
  • इस दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है.

टिप्पणियाँ